क्रॉप कैफेटेरिया से किसानों को मदद मिल रही हैकिसानों की आमदनी बढ़ाने में फसलों की उन्नत किस्मों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है. इसके बावजूद आज भी बड़ी संख्या में किसान परंपरागत बीजों पर निर्भर हैं. वहीं, जो किसान वैज्ञानिक सिफारिशों के अनुसार उन्नत वैरायटी अपनाते हैं, वे कम समय में अधिक उत्पादन लेकर अपनी आय दो से तीन गुना तक बढ़ाने में सफल हो रहे हैं
इसी उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, जालौन में ‘क्रॉप कैफेटेरिया’ का विशेष प्रदर्शन आयोजित किया गया. इस प्रदर्शन में कुल 45 प्रकार की फसलों और उनकी उन्नत किस्मों को शामिल किया गया है, ताकि किसान एक ही स्थान पर विभिन्न विकल्पों को देख-समझ सकें.
क्रॉप कैफेटेरिया में मटर, मसूर, तिलहन, अलसी समेत कई रबी फसलों की उन्नत वैरायटी प्रदर्शित की गई हैं. विशेष रूप से गेहूं की 12 से 13 उन्नत किस्मों को शामिल किया गया है, ताकि किसान अपनी भूमि की स्थिति, सिंचाई सुविधा और बाजार की मांग के अनुसार सही चयन कर सकें.
मटर की किस्मों में ‘काशी अगेती’ प्रमुख है, जो कम अवधि में तैयार होने वाली वैरायटी है. इसके अलावा भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित ‘काशी उदय’, ‘काशी मुक्ति’, ‘काशी समृद्धि’ और ‘काशी नंदिनी’ जैसी उन्नत किस्मों को भी प्रदर्शित किया गया है.
इन किस्मों की खासियत है कि ये लगभग 100 से 110 दिनों में तैयार हो जाती हैं और उच्च उत्पादन क्षमता रखती हैं, जिससे किसानों को बेहतर लाभ मिल सकता है.
क्रॉप कैफेटेरिया में गेहूं की DW-187, DW-303, K-17, K-1616 और राज जैसी उन्नत किस्मों का प्रदर्शन किया गया है. वहीं, सूखे की स्थिति के लिए K-1317 वैरायटी को बेहतर विकल्प बताया गया है. इन किस्मों के प्रदर्शन से न सिर्फ उत्पादन में वृद्धि संभव है, बल्कि किसानों की आय में भी उल्लेखनीय इजाफा हो सकता है.
अलसी की JLS-79 वैरायटी को विशेष रूप से सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त बताया गया है. यह किस्म लगभग 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने में सक्षम है. अलसी के बीजों में मौजूद पोषक तत्वों और स्वास्थ्य लाभ के कारण बाजार में इसकी मांग और कीमत दोनों बेहतर मिलती हैं, जिससे किसानों को अतिरिक्त लाभ मिल रहा है.
इस प्रदर्शन की खास बात यह है कि प्रत्येक वैरायटी के साथ उसकी विशेषताओं, आवश्यक सिंचाई, फसल अवधि और संभावित उत्पादन की विस्तृत जानकारी भी दी गई है. इससे किसान केवल बीज चयन ही नहीं, बल्कि पूरी फसल प्रबंधन तकनीक को भी समझ पा रहे हैं.
कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मुस्तफा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि फसल चयन करते समय जमीन की बनावट, पानी की उपलब्धता और बाजार की मांग का विशेष ध्यान रखना चाहिए. सही वैरायटी और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.
‘क्रॉप कैफेटेरिया’ का यह प्रयास किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने और उनकी आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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