चाय नीलामी (सांकेतिक तस्वीर)तमिलनाडु के कुन्नूर में हुई ताजा चाय नीलामी में बाजार का रुख मिला-जुला रहा. निर्यातकों की सक्रिय खरीद से कुछ पारंपरिक चाय- ऑर्थोडॉक्स लीफ ग्रेड्स के दामों में मजबूती दिखी, लेकिन बाकी श्रेणियों में मांग कमजोर बनी रही. खासकर ब्लेंडर्स की सीमित दिलचस्पी के कारण कई ग्रेड्स पुराने स्तर पर ही टिके रहे. व्यापारियों ने कहा कि बढ़ते तापमान ने चाय उत्पादन को प्रभावित किया है, जिससे नीलामी प्लेटफॉर्म पर आवक घट गई है. इसका असर सीधे कारोबार की गति पर दिखा.
ग्लोबल टी ऑक्शनियर्स के आंकड़ों के अनुसार, लीफ ग्रेड्स में करीब 14.08 लाख किलो पेशकश के मुकाबले 84 प्रतिशत बिक्री दर्ज हुई. वहीं, डस्ट ग्रेड्स में 4.74 लाख किलो में से 89 प्रतिशत चाय की बिक्री हो सकी.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, सीटीसी लीफ श्रेणी में ऊंचे दाम वाले और बेहतर लिकर वाले चाय लॉट्स में 4 से 5 रुपये तक की बढ़त देखने को मिली, जबकि कुछ लॉट्स 3 से 4 रुपये तक कमजोर भी पड़े. मीडियम क्वालिटी में हल्की मजबूती के साथ 1 से 2 रुपये तक की बढ़त दर्ज की गई.
ऑर्थोडॉक्स लीफ में प्रमुख होल लीफ ग्रेड्स में सीमित दायरे में 2 से 3 रुपये तक की तेजी रही, हालांकि कुछ लॉट्स में इतनी ही गिरावट भी देखी गई. ब्रोकन ग्रेड्स पर दबाव रहा और ये 1 से 2 रुपये तक सस्ते बिके.
सीटीसी डस्ट में ऊंचे ग्रेड्स 4 से 5 रुपये तक कमजोर हुए, जबकि बेहतर मीडियम क्वालिटी में हल्की मांग के चलते 1 से 2 रुपये की मजबूती बनी रही. सामान्य मीडियम ग्रेड्स पिछले स्तर के आसपास स्थिर रहे. रिपोर्ट के मुताबिक, साधारण क्वालिटी की चाय में 2 से 3 रुपये की गिरावट के साथ कुछ लॉट्स वापस भी ले लिए गए. ऑर्थोडॉक्स डस्ट के प्राइमरी ग्रेड्स में हल्की तेजी 2 से 3 रुपये तक देखी गई, जबकि सेकेंडरी और फाइन ग्रेड्स लगभग स्थिर रहे.
इधर, नीलगिरी क्षेत्र के बॉट लीफ टी उत्पादकों ने चाय उद्योग की नीतियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि टी बोर्ड ऑफ इंडिया की नीतियों को देशभर में एक समान तरीके से लागू नहीं किया जा रहा, जिससे दक्षिण भारत के उत्पादकों को नुकसान झेलना पड़ रहा है.
नीलगिरी बॉट लीफ टी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के मुताबिक, उत्तर और दक्षिण भारत में नीलामी व्यवस्था अलग-अलग तरीके से संचालित हो रही है. इतना ही नहीं, दक्षिण भारत में अपनाई जा रही बिलिंग प्रणाली भी उत्तर भारत से भिन्न है, जिससे व्यापारिक पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ रहा है.
एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि दक्षिण भारत में औसत मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया अलग है, जो उत्पादकों के हित में नहीं है. उनका मानना है कि इस असंतुलन के कारण बाजार में सही मूल्य नहीं मिल पा रहा और उद्योग की स्थिरता प्रभावित हो रही है. इन मुद्दों को लेकर एसोसिएशन ने हाल ही में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal को ज्ञापन सौंपा है. इसमें मांग की गई है कि पूरे देश में नीतियों का समान और पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी क्षेत्र के साथ भेदभाव न हो.
उत्पादकों का कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं किए गए तो दक्षिण भारत का बॉट लीफ टी सेक्टर और कमजोर हो सकता है. ऐसे में समान नीति लागू करना ही बाजार संतुलन और उत्पादकों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम माना जा रहा है.
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