महाराष्ट्र में प्याज संकटदेश के प्रमुख प्याज उगाने वाले जिले नासिक में इस बार गर्मियों के प्याज उत्पादन में बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है. आकलन के मुताबिक नासिक में गर्मियों की प्याज पैदावार में करीब 29 फीसदी तक कमी आने की संभावना है. इसके बावजूद राहत की बात यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर प्याज की कुल उपलब्धता बनी रहने की उम्मीद है और देश में शॉर्टेज के हालात नहीं बनेंगे.
हालांकि निर्यात के मोर्चे पर बुरी खबर है क्योंकि उत्पादन गिरने से निर्यात घटेगा. इससे पहले ईरान युद्ध ने प्याज निर्यात को नुकसान में डाल रखा है. ऐसे में उत्पादन की गिरावट दोहरी चोट से कम नहीं.
गर्मियों के प्याज उत्पादन में गिरावट का सबसे बड़ा कारण खेती के रकबे में कमी है. साल 2024-25 में जहां नासिक में 2.51 लाख हेक्टेयर में प्याज की खेती हुई थी, वहीं 2025-26 में यह रकबा घटकर 2.25 लाख हेक्टेयर रह गया. इसके अलावा मार्च के अंत में पड़े मौसम की मार ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी.
19 मार्च से 2 अप्रैल के बीच नासिक और आसपास के इलाकों में हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि से करीब 44 हजार हेक्टेयर में खड़ी प्याज की फसल को नुकसान पहुंचा. इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है. 'टाइम्स ऑफ इंडिया' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्याज की औसत उपज जो पहले लगभग 25 टन प्रति हेक्टेयर थी, अब घटकर 23 टन प्रति हेक्टेयर रहने का अनुमान है.
केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, देशभर में गर्मियों के प्याज उत्पादन में भी करीब 11 फीसदी की कमी आ सकती है. अनुमान है कि कुल उत्पादन 377 लाख टन से घटकर लगभग 277 लाख टन तक सिमट सकता है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट इतनी अधिक नहीं है कि देश में प्याज की भारी कमी पैदा हो.
इस साल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्याज बाजार पर असर देखने को मिला है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और व्यापारिक बाधाओं के चलते प्याज निर्यात में गिरावट आई है. साथ ही कंटेनर भाड़े में भारी बढ़ोतरी ने निर्यात को और महंगा बना दिया है. जहां पहले कंटेनर भाड़ा करीब 600 डॉलर था, वह बढ़कर लगभग 7,500 डॉलर तक पहुंच गया है.
निर्यात की रफ्तार धीमी पड़ने का फायदा घरेलू बाजार को मिल रहा है. उत्पादन में कमी के बावजूद देश में प्याज की उपलब्धता बनी हुई है, जिससे कीमतों पर ज्यादा दबाव पड़ने की संभावना कम है.
विशेषज्ञ बताते हैं कि खरीफ प्याज जल्दी खराब हो जाता है, जबकि गर्मियों में पैदा होने वाला प्याज 6 से 7 महीने तक भंडारण लायक होता है. यही वजह है कि गर्मियों का प्याज देश की सप्लाई चेन में अहम भूमिका निभाता है और कीमतों को स्थिर रखने में मदद करता है.
खास बात यह है कि नासिक अकेले महाराष्ट्र के कुल प्याज निर्यात में करीब 90 फीसदी का योगदान देता है. ऐसे में यहां उत्पादन में होने वाले किसी भी उतार-चढ़ाव का असर पूरे राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्याज बाजार पर भी दिखाई देता है. फिलहाल चुनौती जरूर है, लेकिन निर्यात में कमी और स्टोरेज स्टॉक के चलते बाजार में संतुलन बने रहने की उम्मीद जताई जा रही है.
2023 में घरेलू बाजार में प्याज की भारी कमी के बाद, सरकार ने 1 अप्रैल, 2025 को व्यापार को बढ़ावा देने और किसानों को सही दाम दिलाने के लिए 20% एक्सपोर्ट ड्यूटी हटा दी थी. भारत के प्याज खरीदारों में बांग्लादेश, मलेशिया, UAE और श्रीलंका शामिल हैं, और सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट महाराष्ट्र से होता है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में कुल 15.4 लाख टन प्याज के निर्यात में से केवल 7% बांग्लादेश को भेजा गया, जबकि 2024-25 में, इस पूर्वी पड़ोसी देश का हिस्सा भारत के कुल निर्यात का 46% था. आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि पिछले साल, भारत से निर्यात किए गए प्याज में मलेशिया का हिस्सा सबसे ज्यादा 21% था, जबकि वित्त वर्ष 25 में यह 13% था. UAE का निर्यात हिस्सा भी वित्त वर्ष 26 में बढ़कर 19% हो गया, जबकि पिछले साल यह 11% था. आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 26 में लगभग 17% निर्यात श्रीलंका को किया गया.
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