पराली प्रबंधन (सांकेतिक तस्वीर)पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की जा रही है. इसी सिलसिले में कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) की तीन सदस्यीय टीम शनिवार को तरनतारन पहुंची. टीम ने अमृतसर और तरनतारन में पराली प्रबंधन के इंतजामों का जायजा लिया. ये दोनों जिले पराली जलाने के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं. दौरे के दौरान अधिकारियों ने किसानों से बातचीत की. उनसे पराली जलाने के कारणों और पराली प्रबंधन के लिए मिल रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली.
टीम में CAQM के सदस्य डॉ. एसडी अत्री, डायरेक्टर आरके अग्रवाल और डॉ. प्रियंका मैत्री शामिल थे. तरनतारन के एसडीएम डॉ. करणवीर सिंह और कृषि विभाग के मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. तेजबीर सिंह भंगू भी इस दौरान मौजूद रहे.
कृषि विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में डॉ. अत्री ने किसानों से पूछा कि वे पराली क्यों जलाते हैं, प्रशासन की ओर से क्या सुविधाएं मिल रही हैं और पराली प्रबंधन की व्यवस्था से वे कितने संतुष्ट हैं. इसके बाद टीम ने पराली डंप का दौरा किया और वहां पराली के संग्रह, प्रबंधन और इस्तेमाल की प्रक्रिया की जानकारी ली. अधिकारियों ने डंप संचालकों से भी बातचीत की.
डॉ. एसडी अत्री ने कहा कि पंजाब में पराली जलने से चारों ओर धुआं फैलने की जो तस्वीर पेश की जाती थी, वैसी स्थिति उन्हें इस दौरे के दौरान नजर नहीं आई. उन्होंने पराली प्रबंधन के लिए किसानों और प्रशासन की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की. साथ ही कहा कि इन प्रयासों को लगातार जारी रखना जरूरी है, ताकि पराली जलाने की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके.
उन्होंने बताया कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने और प्रशासन की कार्रवाई पर नजर रखने के लिए पंजाब के 18 जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड की टीमें पहुंच चुकी हैं. ये टीमें हर दिन अपनी रिपोर्ट CAQM को सौंपेंगी. डॉ. अत्री ने किसानों से अपील की कि वे पराली में आग लगाने के बजाय वैज्ञानिक तरीकों से उसका प्रबंधन करें.
राणा शुगर मिल के पराली डंप प्रबंधक गुरजिंदर सिंह संधू ने बताया कि उनकी टीम रोजाना किसानों से संपर्क करती है और उन्हें पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक करती है. उन्होंने दावा किया कि एक एकड़ खेत में पराली का प्रबंधन करने पर करीब 200 रुपये खर्च आता है. (मनीष शर्मा की रिपोर्ट)
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today