गुजरात में पशुपालकों के लिए बड़ा फैसलागुजरात विधानसभा के मॉनसून सत्र के दूसरे दिन गुरुवार को चार अहम बिल पास किए गए, जिसमें से किसानों और पशुपालकों से जुड़े दो अहम बिल पास हुए. इनमें गुजरात लैंड रेवेन्यू (संशोधन) बिल, 2026 और पशु और पोल्ट्री चारे से जुड़ा बिल शामिल है. दोनों बिल सर्वसम्मति से पास हुए. इन नए नियमों से जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव और पशु चारे की क्वालिटी से जुड़े नियमों में बदलाव होगा. आइए जानते हैं इस बिल से किसानों और पशुपालकों को क्या फायदा होगा.
नए भूमि कानून के तहत अगर जमीन की रजिस्ट्री सही और साफ है, तो कुछ शर्तें पूरी होने पर जमीन के मालिक का नाम रिकॉर्ड में उसी दिन दर्ज किया जा सकेगा. इसके लिए जमीन के सभी मालिकों की सहमति जरूरी होगी और जमीन को लेकर कोई पुराना विवाद नहीं होना चाहिए. इसके अलावा अगर अधिकारी, अदालत या ट्रिब्यूनल जमीन के मालिकाना हक को लेकर कोई आदेश देता है, तो उसके आधार पर भी रिकॉर्ड में नाम बदलने की प्रक्रिया तुरंत पूरी की जा सकेगी.
सरकार का कहना है कि इससे किसानों और जमीन के असली खरीदारों को रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा. साथ ही जमीन से जुड़े काम में बिचौलियों की भूमिका कम होगी और लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिल सकती है.
पशुपालकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बदलाव लाइवस्टॉक फीड, पोल्ट्री फीड और मिनरल मिक्सचर से जुड़ा है. नए कानून के तहत पशुओं और मुर्गियों के लिए चारा बनाने, उसका भंडारण करने और बेचने के लिए लाइसेंस लेना जरूरी होगा. चारा बनाने वाली कंपनियों और कारोबारियों को ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तय मानकों का पालन करना होगा. वहीं, सरकार समय-समय पर चारे के सैंपल की जांच भी कर सकेगी. इसके अलावा चारे की पैकेजिंग और लेबल पर सही जानकारी देना जरूरी होगा. इसका उद्देश्य मिलावट, घटिया चारे और गलत दावे करने पर रोक लगाना है.
नए कानून में नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है. घटिया चारा या गलत ब्रांडिंग के मामले में 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा अगर मिलावटी या खराब चारे के कारण किसी पशु की मौत हो जाती है, तो दोषी को 7 से 10 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. सरकार का कहना है कि इस कानून से पशुपालकों को बेहतर और सुरक्षित पशु आहार मिलने की उम्मीद है. अच्छी क्वालिटी वाला चारा पशुओं की सेहत, दूध उत्पादन और कुल उत्पादकता के लिए भी महत्वपूर्ण है.
गुजरात सरकार के इन दोनों बदलावों का सीधा संबंध ग्रामीण आबादी से है. जमीन खरीदने के बाद रिकॉर्ड में मालिकाना बदलाव की प्रक्रिया तेज होने से किसानों और खरीदारों को राहत मिल सकती है. वहीं, पशु चारे की क्वालिटी पर सख्ती से पशुपालकों को घटिया या मिलावटी चारा मिलने का जोखिम कम करने की कोशिश की गई है. सरकार का दावा है कि इन बदलावों से जमीन के रिकॉर्ड की प्रक्रिया आसान होगी और पशुधन की सेहत और उत्पादकता बेहतर बनाने में मदद मिलेगी. (PTI)
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