मक्का उत्पादन में आगे, पोल्ट्री फीड में पीछे क्यों रह गया बिहार? गुजरात मॉडल से समझिए पूरा गणित

मक्का उत्पादन में आगे, पोल्ट्री फीड में पीछे क्यों रह गया बिहार? गुजरात मॉडल से समझिए पूरा गणित

मक्का उत्पादन में आगे होने के बावजूद बिहार पोल्ट्री और कैटल फीड में क्यों पिछड़ गया? गोधरा मक्का रिसर्च सेंटर, सरकारी समर्थन और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ने गुजरात को फीड इंडस्ट्री में कैसे आगे पहुंचाया—पूरी पड़ताल.

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मक्का उत्पादन में आगे, पोल्ट्री फीड में पीछे क्यों रह गया बिहार? गुजरात मॉडल से समझिए पूरा गणितबिहार में पोल्ट्री फीड उत्पादन बहुत कम है

मक्का उत्पादन में गुजरात से बिहार बहुत आगे है लेकिन पोल्ट्री फीड बनाने में पीछे. वजह कई हैं जिनमें सबसे महत्वपूर्ण है गोधरा स्थित मक्का रिसर्च सेंटर. इस सेंटर ने मक्का की दो ऐसी वैरायटी तैयार की जिससे गुजरात पोल्ट्री फीड बनाने में बहुत आगे निकल गया. पोल्ट्री और पशु आहार (कैटल फीड) बनाने में गुजरात आज वहां खड़ा है जिसका मुकाबला करना कई राज्यों के लिए मुश्किल है, बिहार के लिए खासकर. बिहार में मक्का तो है, लेकिन पोल्ट्री फीड के लिहाज से उतना सार्थक नहीं. सरकारी समर्थन भी बड़ा कारण है जिसने गुजरात के किसानों और व्यापारियों को पोल्ट्री फीड से फायदा पहुंचाया है. और भी कई कारण हैं जिनकी वजह से बिहार पोल्ट्री और कैटल फीड में पिछड़ गया है.

फीड इंडस्ट्री का हाल

साल 2024 में लोकसभा में पशुपालन मंत्री ललन सिंह ने एक जवाब में बताया कि बिहार में छह पशु आहार प्लांट्स हैं जिनमें अररिया (1), मुजफ्फरपुर (3), पटना और वैशाली (1) जिले शामिल हैं. इसी तरह, एनिमल फीड सप्लायर की संख्या अररिया, पटना, वैशाली में एक-एक और मुजफ्फरपुर में तीन है. बिहार में जिस स्तर पर मक्के का उत्पादन होता है, उस लिहाज से यह संख्या निराशाजनक है.

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि गुजरात में 25 फीड प्लांट ऑपरेशनल हैं जिनमें अहमदाबाद, अमरेली, आनंद, भरूच, भावनगर, कच्छ, नर्मदा, नवसारी, पंचमहल, राजकोट, साबरकांठा, सूरत में एक-एक और बनासकांठा, खेड़ा और बड़ोदरा में दो-दो, मेहसाणा में तीन फीड प्लांट चल रहे हैं. 

इसी तरह, अमरेली, आनंद, भरूच, भावनगर, कच्छ, नर्मदा, नवसारी, पंचमहल, राजकोट, साबरकांठा, सूरत, तापी में एक-एक, बनासकांठा, खेड़ा, बड़ोदरा में दो-दो, मेहसाणा में तीन, अहमदाबाद में चार फीड सप्लायर और मैन्युफैक्चरर हैं.  

इस लिहाज से बिहार और गुजरात में फीड इंडस्ट्री के इंफ्रास्ट्रक्चर और मार्केटिंग सुविधाओं में भारी अंतर है. 

फीड सेक्टर में क्यों पिछड़ा बिहार?

कोई भी राज्य केवल मक्का उगाकर पोल्ट्री और पशु आहार में आगे नहीं निकल सकता क्योंकि कच्चे माल के लिए मक्का ही अकेला इनपुट नहीं होता. मक्के के अलावा सोया भी बड़ी भूमिका निभाता है. बिहार सोयबीन और सोयामील के मामले में फिसड्डी है क्योंकि इसकी खेती नहीं होती. बिहार में जो कुछ भी फीड इंडस्ट्री है, उसे महंगे रेट पर दूसरे राज्यों से सोया मंगाना पड़ता है. इस आयात का खर्च इंडस्ट्री के लिए भारी पड़ता है. 

बिहार में मक्के खेती खूब है, मगर पूरे राज्य में एक समान नहीं है जिससे फीड इंडस्ट्री के लिए मक्के की सप्लाई प्रभावित होती है. इसके अलावा, इंफ्रास्ट्रक्चर गैप यानी कोल्ड स्टोरेज की कमी और बिजली सप्लाई भी बड़ी बाधा है. फीड बनाने के लिए कच्चे माल के तौर पर सोया के अलावा मक्का भी बाहर से मंगाया जाता है जो कि इंडस्ट्री मालिकों के लिए महंगा सौदा है. चौंकाने वाली बात ये है कि बिहार में मक्का भरपूर है, लेकिन व्यापारी अपनी क्वालिटी की मांग पूरी करने के लिए दूसरे राज्यों से मंगाते हैं. इंडस्ट्री के लिए यह अतिरिक्त बोझ साबित होता है.

कोल्ड स्टोरेज की कम सुविधाएं, गांव के इलाकों में बिजली की खराब सप्लाई, और मॉडर्न प्रोसेसिंग यूनिट्स की कमी बड़े पैमाने पर क्वालिटी फीड की मैन्युफैक्चरिंग में रुकावट डालती हैं. लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी की कमी और खराब सप्लाई चेन से ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर लोकल लेवल पर बनने वाली फीड की अच्छी कीमत पर पड़ता है.

मक्का और फीड उत्पादन में गुजरात कहां

गुजरात में मक्का मुख्य रूप से सेंट्रल गुजरात के पंचमहल, दाहोद और छोटा उदयपुर जिलों में बारिश पर निर्भर खरीफ फसल के तौर पर उगाया जाता है, जो मिलकर राज्य के कुल प्रोडक्शन का 80% से ज्यादा हिस्सा हैं. गुजरात में मक्का का उपयोग बड़े पैमाने पर मवेशियों के चारे और मुर्गी पालन के लिए किया जाता है, जो पोल्ट्री क्षेत्र की बढ़ती मांग के कारण है. 

गुजरात में क्वालिटी मक्के के उत्पादन के लिए गोधरा का मुख्य मक्का अनुसंधान केंद्र जिम्मेदार है. हालांकि बिहार में भी एक ऐसा ही सेंटर बेगूसराय में है, लेकिन वह क्षेत्रीय अनुसंधान और बीज उत्पादन केंद्र है. गोधरा रिसर्च सेंटर से इसका काम अलग है. गोधरा सेंटर ने मक्के की उपज बढ़ाने के लिए GAYMH-1 और GAWMH-2 जैसी उन्नत, उच्च उपज देने वाली संकर किस्मों को विकसित किया है जिसका फायदा फीड इंडस्ट्री को मिलता है. 

इसके अलावा गुजरात का उद्योग कनेक्शन भी बहुत अहम है जिसमें बिहार पिछड़ जाता है. गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट्स लिमिटेड कडी में एक बड़ा प्रोसेसिंग यूनिट चलाता है, जिसका एग्री प्रोसेसिंग वैल्यू चेन में बड़ा नाम है. बिहार में इस तरह की बड़ी यूनिटों की घोर कमी है जिसका खामियाजा मक्का किसान और व्यापारियों को भुगतना पड़ता है.

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