ट्रेड डील के पहले से अमेरिका से कृषि प्रोडक्ट का आयात जारी है (AI जनरेटेड फोटो)ट्रेड डील पर भारत और अमेरिका के बीच होने वाले समझौते को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं. सरकार जहां इस प्रस्तावित समझौते को ऐतिहासिक बता रही है, वही विपक्ष इसे काला दिन बता रहा है. देश के कई किसान संगठन भी ट्रेड डील के खिलाफ उतर आए हैं. संगठनों का कहना है कि ट्रेड डील का सबसे बड़ा धक्का किसानों और उनके कृषि उत्पादों को लगेगा. एक आरोप यह भी है कि अमेरिका का सस्ता कृषि प्रोडक्ट भारत में भर जाएगा तो अपना देसी माल कौन खरीदेगा. ऐसे में एक सवाल है कि क्या ट्रेड डील के बाद ही भारत में अमेरिकी प्रोडक्ट की आवक बढ़ेगी या पहले से आयात होता रहा है? आंकड़े बता रहे हैं कि इस डील से पहले भी अमेरिका से मक्का और दालों का आयात हो रहा था.
अमेरिका से आने वाले प्रमुख उत्पादों के आयात वाले आंकड़े यह दिखाते हैं कि दोनों देशों के बीच एग्री-ट्रेड पहले से ही मजबूत और बढ़ती हुई दिशा में है. ऐसा नहीं है कि ट्रेड डील के बाद ही एग्री प्रोडक्ट के लिए दरवाजे खुलेंगे. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ कमर्शियल इंटेलिजेंस एंड स्टैटिस्टिक्स (DGCIS) के अनुसार साल 2013-14 में हमने अमेरिका से 4,333.69 करोड़ रुपये के कृषि उत्पादों का आयात किया, जबकि 2024-25 में यह बढ़कर 18,587.51 करोड़ रुपये का हो गया. साल 2024-25 में भारत ने अमेरिका से 89,632 मीट्रिक टन दालों और 1100 मीट्रिक टन मक्के का आयात किया.
भारत में अमेरिका से सबसे ज्यादा ताजे फलों का आयात होता है. साल 2013-14 में भारत ने 2,886.50 करोड़ रुपये के ताजे फल मंगवाए, जिसका आंकड़ा 2024-25 में बढ़कर 9,482.41 करोड़ रुपये हो गया. इसके अलावा हम अल्कोहलिक ड्रिंक्स, कॉटन, वेजिटेबल ऑयल, दालें, मरीन प्रोडक्ट्स, मसाले, पोल्ट्री प्रोडक्ट्स, चाय, ग्वारगम, कैस्टर ऑयल, अनाज से बनी चीजें और कॉफीमिल्ड प्रोडक्ट्स मंगाते रहे हैं.
केवल मूल्य ही नहीं, बल्कि आयात की मात्रा में भी लंबे समय से बढ़ोतरी का रुझान देखा जा रहा है. 2012-13 में अमेरिका से APEDA उत्पादों का कुल आयात 2.84 लाख मीट्रिक टन था, जो 2013-14 में 3.11 लाख मीट्रिक टन हो गया. 2023-24 में यह बढ़कर 4.25 लाख मीट्रिक टन और 2024-25 में 8.27 लाख मीट्रिक टन के पार पहुंच गया.
डेटा के मुताबिक, Alcoholic Beverages लंबे समय से अमेरिका से भारत के आयात में अहम श्रेणी रही है. 2012-13 में जहां इसका आयात मूल्य केवल 28.61 करोड़ रुपये था, वहीं 2013-14 में यह 264.30 करोड़ रुपये पहुंच गया. 2023-24 में यह बढ़कर 2,403.44 करोड़ रुपये और 2024-25 में 3,824.08 करोड़ रुपये दर्ज किया गया.
इसके अलावा दालें, ताजे फल, प्रोसेस्ड फल, जूस और नट्स, अखरोट, Miscellaneous Preparations और Albumin (Eggs & Milk) जैसे उत्पादों में भी समय के साथ लगातार आयात होता रहा है. यह बताता है कि भारत का आयात फोकस केवल कच्चे कृषि उत्पादों तक सीमित नहीं, बल्कि वैल्यू-एडेड और प्रोसेस्ड फूड सेगमेंट पर भी रहा है.
अमेरिका से भारत में पोल्ट्री प्रोडक्ट्स का आयात कुल APEDA आयात की तुलना में भले ही सीमित रहा हो, लेकिन इसमें समय-समय पर उतार-चढ़ाव देखा गया है. 2012-13 में पोल्ट्री प्रोडक्ट्स का आयात मूल्य 4.88 करोड़ रुपये था, जो 2013-14 में घटकर 2.27 करोड़ रुपये रह गया. हालांकि 2023-24 में इसमें तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई और आयात मूल्य 25.93 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. वित्त वर्ष 2024-25 में पोल्ट्री प्रोडक्ट्स का आयात 19.21 करोड़ रुपये रहा.
मात्रा के लिहाज से, 2012-13 में पोल्ट्री प्रोडक्ट्स का आयात 405.16 मीट्रिक टन था, जो 2013-14 में घटकर 63.88 मीट्रिक टन रह गया. 2023-24 में यह 42.78 मीट्रिक टन रहा, जबकि 2024-25 में बढ़कर 69.35 मीट्रिक टन दर्ज किया गया.
मक्का (Maize) के मामले में अमेरिका से भारत का आयात कम रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें बढ़त का रुझान दिखा है. 2012-13 में मक्के का आयात मूल्य 1.48 करोड़ रुपये था, जो 2013-14 में 2.39 करोड़ रुपये हो गया. 2023-24 में यह बढ़कर 9.74 करोड़ रुपये और 2024-25 में 18.19 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
मात्रा के आधार पर, 2012-13 में अमेरिका से 284.65 मीट्रिक टन मक्का आयात हुआ था, जो 2013-14 में 331.08 मीट्रिक टन रहा. 2023-24 में यह बढ़कर 499.84 मीट्रिक टन और 2024-25 में 1100.75 मीट्रिक टन तक पहुंच गया.
विशेषज्ञ मानते हैं कि इथेनॉल ब्लेंडिंग, पोल्ट्री फीड और इंडस्ट्रियल यूज में बढ़ती मांग के चलते भविष्य में मक्के के आयात को लेकर भारत-अमेरिका कृषि व्यापार में नई संभावनाएं बन सकती हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, ये आंकड़े बताते हैं कि भारत-अमेरिका कृषि व्यापार किसी नए ट्रेड एग्रीमेंट पर निर्भर नहीं रहा है, बल्कि पहले से बने मजबूत सप्लाई चेन और बाजार मांग के आधार पर आगे बढ़ता रहा है. इस अंतरिम ट्रेड डील से इस मौजूदा व्यापार को और प्रभावी और व्यापक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
कुल मिलाकर, ताजा ट्रेड डील से पहले भी अमेरिका भारत के लिए एक अहम कृषि और प्रोसेस्ड फूड सप्लायर रहा है, और APEDA उत्पादों के आंकड़े इस लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक संबंध की पुष्टि करते हैं.
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