गरीबों का चावल बना मुनाफे का सौदागरीब मजदूरों, दिहाड़ी कामगारों और प्रवासी मजदूरों को सस्ते दाम पर चावल उपलब्ध कराने की योजना में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) और नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चरल मार्केटिंग कॉरपोरेशन (NERAMAC) के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है. CBI का आरोप है कि गरीबों के लिए कम कीमत पर दिया गया चावल कथित तौर पर निजी कारोबारियों तक पहुंचाया गया और उसे मुनाफे के लिए आगे बेचा गया.
CBI की FIR के मुताबिक, इस पूरे मामले में FCI को करीब 28.49 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है. जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि चावल बांटने की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया. इसके अलावा अधिकारियों पर दबाव बनाने, चावल को कारोबारियों तक पहुंचाने और चावल के वितरण को सही दिखाने के लिए कथित तौर पर गलत रिकॉर्ड तैयार करने के आरोप भी लगाए गए हैं. यह मामला केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की ओर से दी गई एक रिपोर्ट के आधार पर दर्ज किया गया है. हालांकि, FIR में लगाए गए आरोप अभी जांच का हिस्सा हैं और आरोपों की पुष्टि अदालत में होना बाकी है.
CBI के अनुसार, NERAMAC के गुवाहाटी कार्यालय के अतिरिक्त महाप्रबंधक ने 7 जनवरी को दिल्ली सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री को पत्र भेजकर हर सप्ताह 31,000 मीट्रिक टन चावल देने की मांग की थी. यह मांग ओपन मार्केट सेल स्कीम (डोमेस्टिक) यानी OMSS(D) के तहत बिना ई-नीलामी के चावल उपलब्ध कराने के लिए की गई थी. बताया गया कि इस चावल का इस्तेमाल दिल्ली में आम लोगों, दिहाड़ी मजदूरों, श्रमिकों, प्रवासी मजदूरों और ऐसे लोगों के लिए किया जाना था, जिन्हें राशन कार्ड नहीं होने के कारण सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का लाभ नहीं मिल पा रहा था.
जांच एजेंसी के मुताबिक, दिल्ली में FCI ने 13 अप्रैल से 15 मई के बीच करीब 62,000 मीट्रिक टन चावल NERAMAC को दिया. CBI का आरोप है कि 2025-26 की नीति के तहत NERAMAC को बिना ई-नीलामी के रियायती दर पर चावल लेने की पात्रता नहीं थी. FIR में कहा गया है कि बिना ई-नीलामी के चावल देने की सुविधा केवल राज्य सरकारों और राज्य सरकार की कंपनियों के लिए थी. इसके बावजूद NERAMAC को इस तरह चावल दिए जाने का आरोप है.
FIR के अनुसार, FCI ने NERAMAC को चावल 23,200 रुपये प्रति मीट्रिक टन की दर से दिया. वहीं, उस समय चावल की तय रिजर्व कीमत 26,900 रुपये प्रति मीट्रिक टन थी. CBI का आरोप है कि कम कीमत पर चावल दिए जाने से FCI को करीब 28.49 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. जांच एजेंसी का कहना है कि NERAMAC को गरीबों और जरूरतमंद लोगों तक चावल पहुंचाने के लिए एक माध्यम के तौर पर इस्तेमाल किया गया, लेकिन कथित तौर पर चावल का रास्ता निजी कारोबारियों तक पहुंच गया.
CBI के अनुसार, NERAMAC ने 26 मार्च को तीन अलग-अलग निजी संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापन यानी MoU किया था. इन संस्थाओं को कृषि उत्पादों को आम लोगों और गैर-सरकारी संगठनों तक पहुंचाने के लिए चैनल पार्टनर बनाया गया था. जांच एजेंसी का आरोप है कि इन समझौतों में NERAMAC को OMSS(D) के तहत चावल खरीदने और बांटने के लिए अधिकृत बताया गया, जबकि FCI की ओर से ऐसी अनुमति नहीं दी गई थी. CBI का कहना है कि NERAMAC की ओर से चावल लेने के लिए दिए गए शुरुआती प्रस्ताव और बाद में किए गए MoU के उद्देश्य भी अलग थे.
जांच में आरोप लगाया गया है कि निजी संस्थाओं ने कारोबारियों से संपर्क किया. इन कारोबारियों ने NERAMAC के बैंक खाते में करीब 23.25 रुपये प्रति किलो की दर से पैसे जमा किए. इसके बाद कथित तौर पर उन्हें FCI के गोदामों से चावल उठाने की सुविधा मिली. CBI के मुताबिक, इन संस्थाओं ने कारोबारियों से प्रति किलो 64 पैसे से लेकर 2.50 रुपये तक कमीशन लिया. इसके बाद कारोबारियों ने FCI के डिपो से चावल उठाकर दूसरे कारोबारियों को मुनाफे के लिए बेच दिया. यानी जिस चावल को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना था, उसके व्यापारिक इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है.
CBI ने यह भी आरोप लगाया है कि चावल वास्तव में लोगों तक पहुंचा या नहीं, यह दिखाने के लिए कथित तौर पर गलत रिकॉर्ड तैयार किए गए. जांच में फर्जी वितरण रिकॉर्ड और पीछे की तारीख में बनाए गए नियुक्ति पत्र तैयार करने का आरोप भी लगाया गया है. इन रिकॉर्ड के जरिए यह दिखाने की कोशिश किए जाने का आरोप है कि चावल खुदरा दुकानों के माध्यम से उन लोगों तक पहुंचाया गया, जिनके लिए यह योजना बनाई गई थी.
CBI ने FIR में FCI और NERAMAC के अधिकारियों के साथ निजी कारोबारियों के बीच कथित मिलीभगत की आशंका जताई है. जांच एजेंसी का आरोप है कि FCI के कुछ अधिकारियों ने नियमों से जुड़ी आपत्तियों के बावजूद चावल आवंटित करने की प्रक्रिया में जल्दबाजी की. पूरे मामले में कथित साजिश के जरिए FCI को आर्थिक नुकसान पहुंचाने और आरोपियों को गलत तरीके से फायदा पहुंचाने की बात कही गई है. फिलहाल CBI मामले की जांच कर रही है और FIR में लगाए गए आरोपों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
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