Kesar Farming: CM चंद्रबाबू नायडू ने दी हरी झंडी, लमबासिंगी में होगी बड़े स्तर पर केसर की खेती

Kesar Farming: CM चंद्रबाबू नायडू ने दी हरी झंडी, लमबासिंगी में होगी बड़े स्तर पर केसर की खेती

आंध्र प्रदेश सरकार लमबासिंगी में बड़े पैमाने पर केसर की खेती को बढ़ावा देगी. योजना में आदिवासी समुदाय और कंपनियों की भागीदारी होगी.

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Kesar Farming: CM चंद्रबाबू नायडू ने दी हरी झंडी, लमबासिंगी में होगी बड़े स्तर पर केसर की खेतीकेसर की खेती (फाइल फोटो)

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राज्य में केसर की खेती बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि खासकर लमबासिंगी इलाके में यह खेती बढ़ाई जाए. लमबासिंगी पूर्वी घाटों में है और यहां की जलवायु और मिट्टी केसर की खेती के लिए बहुत अच्छी है.

कंपनियों और आदिवासी समुदाय का सहयोग

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जो कंपनियां लमबासिंगी में बड़े पैमाने पर केसर की खेती करना चाहती हैं, उन्हें अनुमति दी जाए. लेकिन यह काम पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के जरिए होना चाहिए. इसका मतलब है कि सरकारी मदद, निजी कंपनियां और स्थानीय आदिवासी समुदाय मिलकर काम करेंगे. इससे आदिवासी समुदाय को भी रोजगार और लाभ मिलेगा.

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने यह योजना प्राकृतिक खेती के विकास के लिए भी जोड़ी. उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 18 लाख किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और यह खेती 20 लाख एकड़ में फैली हुई है. प्राकृतिक खेती में रसायन का कम उपयोग होता है और इससे मिट्टी और फसलों की गुणवत्ता बढ़ती है.

रसायन कम, उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ाए

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को रासायनिक उर्वरक कम इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए. साथ ही, किसानों के उत्पाद की गुणवत्ता और प्रमाणन (Certification) पर ध्यान दिया जाए ताकि उनका उत्पाद अच्छे दाम में बिक सके.

ट्रेनिंग और जागरूकता

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पूरे राज्य में किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाए. इसके लिए सुभाष पालेकर, जो प्राकृतिक खेती के जानकार हैं, उनके सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे. इससे किसान सीखेंगे कि कैसे प्राकृतिक तरीके से फसल उगाई जाए और रसायन कम इस्तेमाल हो.

योजना का महत्व

इस योजना से आंध्र प्रदेश में केसर की खेती बड़े पैमाने पर बढ़ेगी. आदिवासी समुदाय को रोजगार मिलेगा, किसानों की आमदनी बढ़ेगी और राज्य देश में प्राकृतिक खेती का नेतृत्व कर सकेगा. साथ ही, रसायन का कम उपयोग होने से मिट्टी और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा.

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