पराली जलाने पर लगी रोक! (Photo Credit-Kisan Tak)हरियाणा के अंबाला जिले में इस साल पराली प्रबंधन योजनाओं के तहत 37,061 किसानों ने पंजीकरण कराया है. इन योजनाओं का उद्देश्य पराली जलाने से रोकना और किसानों को इसके वैकल्पिक प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करना है. यह पंजीकरण 2.20 लाख एकड़ धान की फसल वाली जमीन पर हुआ है.
किसानों को इन-सिचू (In-Situ) और एक्स-सिचू (Ex-Situ) पराली प्रबंधन के लिए ₹1,200 प्रति एकड़ की सहायता दी जा रही है. यह योजना ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल के माध्यम से संचालित हो रही है. अंबाला में लगभग 2.46 लाख एकड़ जमीन पर धान की खेती दर्ज की गई है, जिसमें से अब तक लगभग 45 प्रतिशत फसल की कटाई हो चुकी है.
अंबाला के कृषि उप निदेशक डॉ. जसविंदर सैनी ने बताया कि अब तक पराली जलाने का कोई भी मामला सामने नहीं आया है. जबकि पिछले साल इसी समय तक 9 मामले दर्ज हुए थे और कुल 99 मामले आए थे. इस बार सरकार की सख्ती और किसानों की जागरूकता के कारण सुधार देखा जा रहा है.
पराली प्रबंधन को सफल बनाने के लिए 639 नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं जो गांवों में जाकर किसानों को समझा रहे हैं कि पराली जलाना कैसे मिट्टी की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाता है और वायु प्रदूषण फैलाता है. इसके अलावा, हर गांव में जागरूकता शिविर भी लगाए जा रहे हैं.
सोमवार को हुई बेमौसम बारिश से खेतों में खड़ी फसल और मंडियों में पड़ा धान भीग गया. इससे न केवल कटाई में देरी होगी, बल्कि धान की गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा. हामिदपुर गांव के किसान जसबीर सिंह ने बताया कि बारिश और हवा के कारण फसल गिर गई है, जिससे कटाई की लागत भी बढ़ेगी.
अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अंबाला जिले की 15 अनाज मंडियों और खरीद केंद्रों में अब तक 1.95 लाख मीट्रिक टन धान की आमद हुई है. इनमें से 1.53 लाख मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी है और 63,418 मीट्रिक टन धान को मंडियों से उठाया जा चुका है.
अंबाला छावनी अनाज मंडी के सचिव नीरज भारद्वाज ने बताया कि बारिश के दौरान धान को तिरपाल से ढक दिया गया था जिससे नुकसान नहीं हुआ. जैसे ही मौसम साफ हुआ, खरीद कार्य फिर से शुरू कर दिया गया.
अंबाला जिले में किसानों ने पराली जलाने से बचने के लिए बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया है. हालांकि, मौसम की मार ने उनकी चिंता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन प्रशासन और किसान मिलकर इन चुनौतियों से निपटने की पूरी कोशिश कर रहे हैं.
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