Bakrid and Goat: बकरीद के लिए खरीदे गए बकरे को टीके लगे हैं या नहीं, ऐसे करें जांच Bakrid and Goat: बकरीद के लिए खरीदे गए बकरे को टीके लगे हैं या नहीं, ऐसे करें जांच
Bakrid and Goat एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो जब भी आप बकरा खरीद रहे हों तो बेचने वाले से बकरे को लगे टीकों के बारे में जरूर पूछें. यहां खबर में टीको का चार्ट बताया गया है. चार्ट के हिसाब से आप जांच कर सकते हैं कि खरीदे जा रहे बकरे को सभी टीके लगे हैं या नहीं.
नासिर हुसैन - New Delhi,
- May 12, 2026,
- Updated May 12, 2026, 1:04 PM IST
आजकल बकरों की जमकर खरीद हो रही है. बकरीद पर कुर्बानी के लिए बकरे खरीदे जा रहे हैं. तीन दिन तक बकरों की कुर्बानी दी जाती है. इसके लिए साप्ताहिक हाट और बाजारों से बकरे खरीदे जा रहे हैं. लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि बकरों की बिना किसी जांच-पड़ताल के खरीद-फरोख्त हो रही है. बकरों को बीमारियों के टीके लगे हैं या नहीं ये भी नहीं बताया जाता है. हालांकि दूसरे पशुओं के मुकाबले बकरे हार्ड इम्यूनिटी वाले माने जाते हैं. गाय-भैंस को कोई भी बीमारी जल्दी लग सकती है. लेकिन बकरे-बकरी जल्द बीमारी की चपेट में नहीं आते हैं. गोट एक्सपर्ट की मानें तो बीमारियों के बचे हुए जोखिम को भी वक्त से वैक्सीनेशन करा कर खत्म और कंट्रोल किया जा सकता है.
लेकिन जरूरी है कि सभी टीके वक्त से लग जाएं. हर एक टीके के लगने का वक्त तय है. केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (सीआईआरजी), मथुरा के मुताबिक खुरपका-मुंहपका (एफएमडी), बकरी की चेचक, बकरी की प्लेग जैसी बीमारियों समेत पैरासाइट से बकरे-बकरियां बीमारी और संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं. बीमार बकरे का मीट का मीट खाने से खाने वाला भी बीमारी की चपेट में आ सकता है. खासतौर पर एफएमडी बीमारी तो जानलेवा हो सकती है.
यहां जानें टीके और उसे लगवाने का वक्त
- खुरपका- 3 से 4 महीने की उम्र पर. बूस्ट र डोज पहले टीके के 3 से 4 हफ्ते बाद. 6 महीने बाद दोबारा.
- बकरी चेचक- 3 से 5 महीने की उम्र पर. बूस्ट र डोज पहले टीके के एक महीने बाद. हर साल लगवाएं.
- गलघोंटू- 3 महीने की उम्र पर पहला टीका. बूस्टूर डोज पहले टीके के 23 दिन या 30 दिन बाद.
- पीपीआर (बकरी प्लेाग)- 3 महीने की उम्र पर. बूस्टकर की जरूरत नहीं है. 3 साल की उम्र पर दोबारा लगवा दें.
- इन्टेररोटोक्सपमिया- 3 से 4 महीने की उम्र पर. बूस्टकर डोज पहले टीके के 3 से 4 हफ्ते बाद. हर साल एक महीने के अंतर पर दो बार.
पैरासाइट संक्रमण से बचाने की दवाई
- कुकडिया रोग- दो से तीन महीने की उम्र पर दवा पिलाएं. 3 से 5 दिन तक पिलाएं. 6 महीने की उम्र पर दवा पिलाएं.
- डिवार्मिंग- 3 महीने की उम्र में दवाई दें. बरसात शुरू होने और खत्मे होने पर दें. सभी पशुओं को एक साल दवा पिलाएं.
- डिपिंग- दवाई सभी उम्र में दी जा सकती है. सर्दियों के शुरू में और आखिर में दें. सभी पशुओं को एक साल नहलाएं.
- बीमारी से बचाने को कराएं ये रेग्यू्लर जांच
- ब्रुसेल्लोलसिस- 6 महीने और 12 महीने की उम्र पर जांच कराएं. जो पशु संक्रमित हो चुका है उसे गहरे गड्डे में दफना दें.
- जोहनीज (जेडी)- 6 महीने और 12 महीने की उम्र पर जांच कराएं. संक्रमित पशु को फौरन ही झुंड से अलग कर दें.
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