किसान लाल सिंह मीणाराजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के बड़ीसादड़ी क्षेत्र का पायरी गांव कभी पथरीली जमीन और सीमित संसाधनों के कारण खेती की चुनौतियों के लिए जाना जाता था. यहां खेती का मतलब पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहना और कम आय में गुजारा करना था. लेकिन, इसी कठिन जमीन पर अब बदलाव की नई कहानी लिखी गई है. इस बदलाव के केंद्र में हैं- प्रगतिशील किसान लाल सिंह मीणा, जिन्होंने मशरूम उत्पादन को अपनाकर न सिर्फ अपनी आमदनी बढ़ाई, बल्कि पूरे इलाके के किसानों के लिए नई राह भी खोल दी.
लाल सिंह मीणा पहले मक्का जैसी पारंपरिक फसलों की खेती करते थे, जिसमें मेहनत ज्यादा लगती थी, लेकिन आमदनी उम्मीद के मुताबिक नहीं होती थी. इसी दौरान उन्हें नाबार्ड की वाड़ी परियोजना के तहत प्रशिक्षण लेने का मौका मिला. इस प्रशिक्षण ने उनकी सोच को नया दिशा दी और उन्होंने पारंपरिक खेती से हटकर कुछ अलग करने का फैसला लिया. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने घर के छोटे से कमरे में मशरूम उत्पादन की शुरुआत की और करीब 20 से 30 बेड लगाकर प्रयोग शुरू किया.
शुरुआत के कुछ ही हफ्तों में उनकी मेहनत रंग लाने लगी. लगभग 25 दिनों में मशरूम तैयार होने लगे और उत्पादन ने उन्हें आत्मविश्वास दिया. हालांकि शुरुआती दौर में बाजार में ताजे मशरूम बेचने में कठिनाइयां आईं, लेकिन उन्होंने समस्या का समाधान ढूंढ लिया. विशेषज्ञों के सुझाव पर उन्होंने मशरूम को सुखाकर उसका पाउडर बनाना शुरू किया, जिससे उनकी उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के साथ-साथ बेहतर दाम भी मिलने लगे.
आज मशरूम पाउडर 1200 से 1500 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है, जिससे उनकी आय में बड़ा उछाल आया है. लाल सिंह मीणा बताते हैं कि जहां मक्का की एक फसल से सीमित कमाई होती थी, वहीं अब सिर्फ दो कमरों में मशरूम उत्पादन करके उससे लगभग तीन गुना अधिक लाभ मिल रहा है. यह बदलाव उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में अहम साबित हुआ है.
उनकी सफलता का असर अब पूरे क्षेत्र में दिखाई देने लगा है. आसपास के किसान भी उनसे प्रेरित होकर मशरूम उत्पादन और अन्य वैकल्पिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. लाल सिंह मीणा का मानना है कि अगर किसान नई तकनीकों और आधुनिक खेती के तरीकों को अपनाएं, तो कम जमीन और कम समय में भी अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है.
उनके नवाचार और उत्कृष्ट कार्य को देखते हुए उन्हें जिला स्तर पर सम्मानित भी किया गया है. उद्यान विभाग की ओर से उन्हें 5 एचपी का सोलर पंप भी मिला है, जिससे उनके कृषि कार्यों को अतिरिक्त सहारा मिला है. अब उनका लक्ष्य मशरूम उत्पादन को बड़े स्तर पर विस्तार देना है और अधिक से अधिक किसानों को इससे जोड़ना है.
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