मूंगफली की खेती के जरिए अपनी किस्मत बदल रहे पंजाब के भुंगा प्रखंड के किसान, बढ़ रहा है खेती का रकबा

मूंगफली की खेती के जरिए अपनी किस्मत बदल रहे पंजाब के भुंगा प्रखंड के किसान, बढ़ रहा है खेती का रकबा

दविंदर सिंह बुर्रा भी एक ऐसे ही किसान हैं जो धान की खेती को छोड़कर मूंगफली की खेती कर रहे हैं. दविंदर सिंह फिलहाल 25 एकड़ क्षेत्र में मूंगफली की खेती करते हैं.

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मूंगफली की खेती के जरिए अपनी किस्मत बदल रहे पंजाब के भुंगा प्रखंड के किसान, बढ़ रहा है खेती का रकबामूंगफली की खेती (सांकेतिक तस्वीर)

पंजाब के होशियारपुर जिला अंतर्गत भुंगा प्रखंड के किसान अब पारंपरिक धान की खेती से किनारा कर रहे हैं. लगभग दो दशक से यहां के किसान धान की खेती से दूर मूंग फली की खेती को अपना रहे हैं और सफलता का कहानी लिख रहे हैं. इस मुहीम में कई किसान है जो साथ चल रहे हैं. क्योंकि मूंगफली खेती में धान की खेती की तुलना में कम पानी की खपत होती है. इपकदरस तरह से किसान  इस प्रखंड में पानी की बचत भी कर रहे हैं और मूंगफल की खेती करके अच्छी कमाई भी हासिल कर रहे हैं. 

दविंदर सिंह बुर्रा भी एक ऐसे ही किसान हैं जो धान की खेती को छोड़कर मूंगफली की खेती कर रहे हैं. दविंदर सिंह फिलहाल 25 एकड़ क्षेत्र में मूंगफली की खेती करते हैं. इसमें उनकी खुद की जमीन पांच एकड़ है. उन्होंने कहां कि अभी मूंगफली की अच्छी मांग होती है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार दविंदर की तरह ही प्रखंड और सैंकड़ों किसान हैं जो अब धान की खेती को छोड़कर मूंगफली की खेती कर रहे हैं. उनकी खेती का रकबा भी बढ़ता जा रहा है. इसके कारण प्रखंड में आज मूंगफली की खेती का रकबा बढ़कर 5000 एकड़ तक हो गया है. जिसके कारण यह पंजाब का एकमात्र ऐसा प्रखंड बन गया है जहां पर कमर्शियल तौर पर मूंगफली की खेती की जाती है. 

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मूंगफली की खेती एक अच्छा विकल्प

दविंदर सिंह बुर्रा बताते हैं कि धान की खेती के मुकाबले मूंगफली की खेती एक अच्छा विकल्प है. इसमें सिंचाई के लिए अधिक पानी की जरूरत नहीं होती है. मूंगफली की सिंचाई वर्षा के पानी से हो जाती है. इससे भूजल की बचत 100 प्रतिशत तक हो जाती है. उन्होंने कहा कि 100 दिनों की इस फसल में वो 30 एकड़ में 13 लाख रुपये कमाते हैं. इसके बाद फिर वो दो फसल टेबल आलू और गेहूं की खेती कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लिए मूंगफली की खेती उपयुक्त मानी जानी जाती है क्योंकि यहां कि मिट्टी हल्की और रेतीली है इससे खेत में पानी बना हुआ रहता है.

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इतनी आती है लागत

दविंदर आगे बताते हैं कि मूंगफली की मांग काफी अधिक होती है, खास कर सर्दियों में इसकी मांग अधिक होती है. इसे लोग भूनकर भी खाते हैं और गुड़ के साथ मिठाई भी बनाकर खाते हैं.  उन्होंने कहा कि मूंगफली की ज़्यादातर किस्में 90 से 105 दिनों में पक जाती हैं. हालांकि कुछ किस्मों को पकने में चार महीने तक का समय लगता है. इसकी खेती करने में 13,000 से 14,000 रुपये प्रति एकड़ तक खर्च होता है.  इसमें बीज भी शामिल है, जिसके लिए प्रति एकड़ 35-40 किलो बीज की ज़रूरत होती है, जिसकी कीमत लगभग 5,000 से 6,000 रुपये होती है. 

 

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