Organic Milk: यहां बकरी पालन के साथ ऑर्गेनिक चारा उगाने की भी दी जा रही ट्रेनिंग

Organic Milk: यहां बकरी पालन के साथ ऑर्गेनिक चारा उगाने की भी दी जा रही ट्रेनिंग

Organic Milk केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थाधन (CIRG), मथुरा के साइंटिस्ट का दावा है कि बकरियों का दूध सिर्फ दूध ही नहीं दवाई भी है. दूध को डेंगू में पिया जाता है. और भी कई बीमारियों में बहुत ही फायदेमंद है. करीब 40 साल से सीआईआरजी बकरियों पर रिसर्च कर रहा है. दूध के महत्व को देखते हुए ही इसे ऑर्गेनिक बनाने की कोशि‍श चल रही है. 

Advertisement
Organic Milk: यहां बकरी पालन के साथ ऑर्गेनिक चारा उगाने की भी दी जा रही ट्रेनिंगबकरीपालन

बाजार में ऑर्गेनिक की डिमांड सिर्फ फल-सब्जी तक की सीमित नहीं है. अब तो डेयरी में भी ऑर्गेनिक दूध-घी की डिमांड होने लगी है. और धीरे-धीरे ये डिमांड फूड सेक्टर के हर एक आइटम को कवर कर रही है. यानि सीधा सा मतलब है कि हर वो चीज ऑर्गेनिक डिमांड में शामिल है जो प्राकृति से हमे सीधे मिलती है. यही वजह है कि अब बकरी का दूध भी ऑर्गेनिक की लिस्ट में शामिल हो गया है. और इसके लिए जरूरत है ऑर्गेनिक हरे चारे की. क्योंकि जब तक बकरियों को ऑर्गेनिक चारा नहीं मिलेगा तो दूध उत्पादन भी ऑर्गेनिक नहीं होगा. इसी डिमांड को देखते हुए केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थाधन (CIRG), मथुरा में बकरी पालन के साथ-साथ अब ऑर्गेनिक हरा चारा उगाने के बारे में भी बताया जा रहा है. 

गोट एक्सपर्ट की मानें तो बकरे-बकरियों को ऑर्गेनिक हरा चारा खि‍लाने का एक नहीं कई फायदे हैं. इसके चलते बकरा का मीट एक्सपोर्ट करने में भी दिक्कत नहीं आती है. क्योंकि होता ये है कि जब बकरे का मीट एक्सपोर्ट होता है तो उससे पहले हैदराबाद की एक लैब में मीट की जांच होती है. जांच में यह देखा जाता है कि मीट में किसी तरह के नुकसानदायक पेस्टीसाइट तो नहीं है. और यह सिर्फ बकरे के मीट ही नहीं बीफ के मामले में भी ऐसा ही होता है. रिर्पोट पॉजिटिव आने पर मीट के कंसाइनमेंट को रोक दिया जाता है. 

ऐसे उगा सकते हैं ऑर्गेनिक चारा 

फोडर एक्सपर्ट की मानें तो जब तक बकरी खुद से बाग, मैदान और जंगल में चर रही है तो उसका दूध 100 फीसद ऑर्गेनिक है. क्योंकि बकरी की आदत है कि वो अपने चारे को पेड़ और झाड़ी से खुद चुनकर खाती है. लेकिन जब हम फार्म या घर में पाली हुई बकरियों को बरसीम, चरी या और दूसरा हरा चारा देते हैं तो उसमे पेस्टी साइट शामिल रहता है. जिसके चलते उस पेस्टीससाइट का असर बकरी के दूध में भी शामिल हो जाता है. 

इसीलिए हम संस्थान में बकरी पालन की ट्रेनिंग लेने के लिए आने वाले किसानों को ऑर्गेनिक चारा उगाने के बारे में बता रहे हैं. इतना ही नहीं हम खुद भी अपने संस्थान के खेतों में ऑर्गेनिक चारा उगा रहे हैं. इसके हमने जीवामृत, नीमास्त्रह और बीजामृत बनाया है. जीवामृत बनाने के लिए गुड़, बेसन और देशी गाय के गोबर-मूत्र में मिट्टी मिलाकर बनाया जा रहा है. यह सभी चीज मिलकर मिट्टी में पहले से मौजूद फ्रेंडली बैक्टीरिया को और बढ़ा देते हैं. इसी का फायदा चारे को मिलता है. 

बकरी के दूध का कारोबार 

दूध देने वाली बकरियां 
राजस्थान- 68 लाख 
उत्तर प्रदेश- 46 लाख 
मध्य प्रदेश- 41 लाख 
महाराष्ट्रा- 37 लाख 
तमिलनाडु- 32 लाख 

यहा दूध उत्पादन सबसे ज्यादा है 

राजस्थान- 21.80 लाख 
उत्तर प्रदेश- 13.19 लाख 
मध्य प्रदेश- 9.10 लाख 
गुजरात- 3.52 लाख 
महाराष्ट्रा- 3.22 लाख 
नोट- आंकड़े टन में है. 

साल 2020-21 में दूध देने वाली बकरियों की संख्या 3.63 करोड़ थी. 
साल 2014-15 में दूध देने वाली बकरियों की संख्या 3.09 करोड़ थी.

ये भी पढ़ें-

Milk Adulteration: दूध में पानी मिलाया है या पूरा दूध ही सिंथेटिक है, खुद से ऐसे करें जांच 

Goat Farming: तेजी से बढ़ रही है बकरी पालन करने वालों की संख्या, ये हैं वो 20 वजह

POST A COMMENT