राजस्थान के किसान का कमालराजस्थान में खेती के सामने तेज गर्मी, पानी की कमी और सीमित आमदनी जैसी कई चुनौतियां हैं. ऐसे में राजस्थान में एक किसान ने खेती और बिजली उत्पादन को एक साथ जोड़कर अनोखी पहल की है. कुंदनपुरा गांव के किसान कजोड़मल जाट के खेत में जमीन पर मक्का, हरी मिर्च और टमाटर की फसल उगाई जा रही है, जबकि इनके ऊपर लगे सोलर पैनल बिजली बना रहे हैं. इस तकनीक से एक ही जमीन पर खेती करने और सौर ऊर्जा पैदा करने का काम एक साथ हो रहा है.
कजोड़मल जाट पहले गेहूं और बाजरे की खेती करते थे. बाद में उन्होंने अपने खेत में सोलर प्लांट लगवा लिया. इससे बिजली उत्पादन और कमाई का नया जरिया तो मिला, लेकिन खेती करना मुश्किल हो गया. किसान होने के नाते वे खेती छोड़ना नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने ऐसा तरीका अपनाने का फैसला किया, जिससे सोलर प्लांट भी चलता रहे और खेत में फसलें भी उगाई जा सके.
इसके लिए खेत में एग्री-पीवी यानी एग्री वोल्टाइक तकनीक अपनाई गई. इस तकनीक में सोलर पैनलों को जमीन से करीब 11 फीट की ऊंचाई पर लगाया जाता है, ताकि उनके नीचे खेती के लिए जगह बनी रहे. कजोड़मल जाट अब सोलर पैनलों के नीचे मक्का, हरी मिर्च और टमाटर की फसल उगा रहे हैं. फिलहाल टमाटर की फसल ज्यादा दिखाई दे रही है. पैनल ऊंचाई पर होने की वजह से किसान नीचे आसानी से खेती और फसलों की देखभाल कर सकते हैं.
इस तकनीक का एक फायदा यह भी हो सकता है कि सोलर पैनलों से मिलने वाली आंशिक छाया के कारण मिट्टी की नमी बनाए रखने में मदद मिले. साथ ही तेज धूप का असर भी कुछ कम हो सकता है. हालांकि, इसका फायदा किस फसल को कितना मिलेगा, यह मौसम, पानी और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है.
किसान कजोड़मल जाट के खेत में करीब 600 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगा है. इससे बनने वाली बिजली ग्रिड को दी जाती है. वहीं, इसी जमीन पर खेती भी जारी है. यानी किसान एक ही खेत का इस्तेमाल दो कामों के लिए कर रहे हैं. इससे जमीन को केवल बिजली उत्पादन तक सीमित रखने की जरूरत नहीं पड़ती. इस मॉडल से किसान की आमदनी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.
इस प्रयोग के जरिए किसान की आय बढ़ाने की संभावनाएं अच्छी है. पहले कजोड़मल जाट जहां पारंपरिक खेती से प्रति एकड़ सालाना करीब 40 हजार रुपये की कमाई करते थे. वहीं खेती और सौर ऊर्जा से होने वाली पूरी कमाई चार लाख रुपये से ज्यादा होने की संभावना है.
कजोड़मल जाट की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब किसानों की आय बढ़ाने और कृषि भूमि का बेहतर इस्तेमाल करने के विकल्प तलाशे जा रहे हैं. अगर इस तकनीक को स्थानीय जरूरतों, लागत और फसलों के अनुकूल विकसित किया जाए, तो यह किसानों के लिए खेती छोड़े बिना सौर ऊर्जा से जुड़ने का रास्ता बन सकती है. खेत में फसल और ऊपर बिजली का यह मेल भविष्य की खेती के लिए एक नई संभावना पेश करता है. (रिदम जैन की रिपोर्ट)
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