Poultry: पोल्ट्री फार्मर ने पीएम मोदी को लिखी चिठ्ठी, जानें क्या लगाई गुहार Poultry: पोल्ट्री फार्मर ने पीएम मोदी को लिखी चिठ्ठी, जानें क्या लगाई गुहार
पिछले करीब डेढ़-दो साल से पोल्ट्री सेक्टर फीड महंगा होने की परेशानी से जूझ रहा है. छोटे कारोबारी तो अब इस सेक्टर को छोड़ने लगे हैं. लेकिन अब हालात ये हो गए हैं कि इस महंगाई का असर अंडों और चिकन के दाम पर भी दिखाई देने लगा है. इसी को देखते हुए पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया (PFI) ने पीएम नरेन्द्र मोदी से अपील करते हुए इस सेक्टर को बचाने की बात कही है.
नासिर हुसैन - New Delhi,
- Oct 30, 2026,
- Updated Oct 30, 2026, 5:42 PM IST
देश के बड़े कारोबार में शामिल पोल्ट्री सेक्टर इस वक्त अपने बुरे दौर से गुजर रहा है. अंडे और चिकन के कारोबार से जुड़े इस सेक्टर के छोटे-छोटे पोल्ट्री फार्मर ने तो अपने पोल्ट्री फार्म पर ताला लटका दिया है. कुछ इस बुरे वक्त को काटने के लिए लागत पर ही काम कर रहे हैं. पोल्ट्री फार्मर छोटा हो या बड़ा सभी एक जैसी इस खास परेशानी से जूझ रहे हैं. हालांकि इसका असर अंडे और चिकन के खरीदारों पर भी पड़ने लगा है. अंडे के दाम 8 से 10 रुपये प्रति अंडे पर पहुंच गए हैं तो चिकन 250 से 350 रुपये किलो तक बिक रहा है. और इस सब के पीछे बड़ी वजह है मुर्गियों को खिलाया जाने वाला दाना (फीड). 22-23 रुपये किलो बिकने वाला फीड आज 30 रुपये किलो को भी पार कर चुका है.
और फीड के दाम बढ़ने के पीछे हैं इसमे मिलाया जाने वाला मक्का और सोयाबीन. इन्हीं परेशानियों के चलते पोल्ट्री फार्मर की संस्था पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया (PFI) ने पीएम नरेन्द्र मोदी के नाम एक चिठ्ठी लिखी है. चिठ्ठी में पोल्ट्री सेक्टर को बचाने की अपील के साथ ही फीड के लिए खास पॉलिसी बनाने की डिमांड भी की गई है. 30 अक्टूबर को अपनी डिमांड के साथ पीएफआई के पदाधिकारी डेयरी और पशुपालन मंत्रालय के अफसरों से भी मिले. उनके सामने भी पोल्ट्री सेक्टर के मौजूदा हालात बयां किए.
पीएम मोदी से की ये अपील
- कुछ लोगों का दबदबा होने के चलते अनाज की जमाखोरी, स्टॉक की जानकारी छिपाना आम है.
- एनिमल फीड और इथेनॉल उत्पादन के बीच अनाज का सही बंटवारा हो.
- अगले 5-10 साल के लिए एनिमल फीड सिक्योरिटी पर एक नेशनल टास्क फोर्स बने.
- पशु चारे के बाजार की जानकारी देने वाला एक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाना
- घरेलू खेती को नुकसान न पहुंचे और जरूरत पड़ने पर इंपोर्ट के लिए कंटिंजेंसी प्लान बनाया जाए.
- पोल्ट्री, मक्का और इथेनॉल से जुड़े आर्थिक जोखिमों को पहचानना और दूर करना.
- किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले मक्के के बीजों की उपलब्धता प्राथमिकता पर हो.
- एनिमल फीड उत्पादन को बेहतर बनाना और किसी एक सामग्री पर निर्भरता न रहे.
- अनाज की बाजार में चल रही कीमतें और सरकारी मंडियों की कीमतें काफी अलग होती हैं.
पोल्ट्री बचाने को दिए ये सुझाव
- व्यापारियों, बड़े स्टॉक रखने वालों, गोदामों और बाजार के बड़े भागीदारों को एक केंद्रीय डिजिटल पोर्टल होना चाहिए. कारोबारी अपने पास मौजूद शुरुआती स्टॉक, रोज की खरीद-बिक्री, दिन के अंत का स्टॉक और एक बाजार से दूसरे बाजार में भेजे गए माल की जानकारी इस पोर्टल पर दे.
- पोर्टल पर खरीदी गई और बेची गई मात्रा, लेनदेन की तारीख, कीमत और खरीदार-विक्रेता की पहचान दर्ज होनी चाहिए. इसमें डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा के उचित इंतजाम भी होने चाहिए.
- शुरुआत में, यह अनिवार्य रिपोर्टिंग उन व्यापारियों और स्टॉक रखने वालों पर भी लागू होनी चाहिए जिनका कारोबार या स्टॉक की मात्रा एक तय सीमा से अधिक है. छोटे व्यापारियों के लिए नियम थोड़े अलग और उनके कारोबार के हिसाब से होने चाहिए.
- मंडियों में आने वाले माल, कीमतों के संकेत, कुल कारोबार, स्टॉक की मात्रा और अलग-अलग क्षेत्रों में मांग-आपूर्ति के बड़े असंतुलन के बारे में हर दिन का डेटा सार्वजनिक किया जाना चाहिए. व्यापार की संवेदनशील जानकारी केवल अधिकृत नियामकों (रेगुलेटर्स) के पास ही उपलब्ध होनी चाहिए.
- बताई गई स्टॉक की मात्रा का मिलान गोदाम की रसीदों, इलेक्ट्रॉनिक इनवॉइस, परिवहन रिकॉर्ड और जरूरत पड़ने पर भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) के जरिए किया जाना चाहिए.
- गैर-कानूनी तरीके से स्टॉक छिपाने, मिलीभगत करके बाजार को नियंत्रित करने (कार्टेलाइजेशन), बोली लगाने में सांठ-गांठ करने या जानबूझकर कमी पैदा करने जैसे मामलों की जांच होनी चाहिए और कानून के अनुसार दंड दिया जाना चाहिए.
- स्टॉक की सीमा या माल की आवाजाही पर कोई भी रोक सबूतों पर आधारित, उचित, एक निश्चित समय के लिए और किसानों के हितों को ध्यान में रखकर लगाई जानी चाहिए.
इथेनॉल के लिए कही ये बड़ी बात
- अनाज-आधारित इथेनॉल क्षमता को और बढ़ाने की मंजूरी देने या ऐसी क्षमता के लिए अनाज आवंटित करने से पहले, राष्ट्रीय स्तर पर 'पशु-चारे की सुरक्षा' (feed-security) का आकलन करें.
- अनाज आवंटन के लिए एक पारदर्शी ढांचा अपनाएं, जिसमें भोजन और पशु-चारे की अनुमानित जरूरतों, घरेलू उपलब्धता, कीमतों में स्थिरता, रणनीतिक भंडार और वैकल्पिक कच्चे माल (feedstocks) की उपलब्धता को ध्यान में रखा जाए.
- यदि स्वतंत्र रूप से सत्यापित आकलन से यह पता चलता है कि पशु-चारे की भारी कमी है या इसकी आपूर्ति पर गंभीर खतरा है, तो इथेनॉल उत्पादन के लिए अनाज के इस्तेमाल पर अस्थायी और नियंत्रित प्रतिबंध लगाने का प्रावधान रखें.
- अनाज-आधारित इथेनॉल उत्पादन के लिए दिए जाने वाले प्रोत्साहनों की समीक्षा करें. इसमें अनाज की कुल आर्थिक लागत, सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र को दी जाने वाली सहायता, पशु-चारे के बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव, उप-उत्पादों (by-products) से होने वाली आय, और घरेलू मांग को पूरा करने के लिए किए जाने वाले अतिरिक्त आयात की लागत को शामिल करें.
- ऐसे वैकल्पिक तरीकों को बढ़ावा दें जो आर्थिक रूप से व्यावहारिक और पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित हों. इनमें उपयुक्त गैर-खाद्य कच्चे माल, कृषि अवशेष और अन्य योग्य सामग्री शामिल हो सकती हैं, बशर्ते तकनीकी, पर्यावरणीय और नियामक सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए.
- डिमांड के संबंध में अफसरों से मुलाकात करने वालों में पीएफआई प्रेसिडेंट रणपाल ढांडा, संजीव गुप्ता, रिकी थापर, विजय सरदाना और जगदीश कादियान शामिल थे.
ये भी पढ़ें-
Analog Paneer: AIIMS की डॉ. पिंकी बोलीं खा सकते हैं एनालॉग पनीर, लेकिन ध्यान रखें ये बात
Honey Production: शहद उत्पादन में आगे बढ़ रहा, लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में कम हुए दाम