ओडिशा में खाद संकट पर रार (सांकेतिक तस्वीर)ओडिशा में खरीफ सीजन के बीच खाद की उपलब्धता को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. बीजू जनता दल (BJD) ने राज्य की भाजपा सरकार पर किसानों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं कराने, कालाबाजारी रोकने में विफल रहने और प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया है. वहीं, राज्य सरकार ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि खरीफ सीजन के लिए खाद की कोई कमी नहीं है. BJD नेताओं अरुण कुमार साहू, संजय दास बर्मा और अतनु एस. नायक ने बुधवार को कहा कि सरकार लगातार पर्याप्त खाद उपलब्ध होने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी स्थिति इससे अलग है. उन्होंने कहा कि राज्य के कई हिस्सों में किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पा रही है, जिससे धान की रोपाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है.
पूर्व कृषि मंत्री अरुण कुमार साहू ने कहा कि ओडिशा में करीब 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है और खरीफ सीजन में लगभग 39 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होती है. इस सीजन में राज्य को करीब 11.43 लाख मीट्रिक टन खाद की जरूरत है. उन्होंने दावा किया कि 17 जुलाई तक केवल 1.81 लाख मीट्रिक टन खाद ही प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) तक पहुंची, जबकि किसानों में लगभग 1.14 लाख मीट्रिक टन बांटी जा सकी. BJD का आरोप है कि कुल जरूरत का लगभग 10 प्रतिशत ही उपलब्ध होने से कृत्रिम खाद संकट पैदा हो गया है.
BJD नेताओं का कहना है कि कई जिलों में किसानों को एक बोरी यूरिया लेने के लिए रातभर इंतजार करना पड़ रहा है. विपक्षी दल ने आरोप लगाया कि सरकारी दुकानों में कमी के कारण किसान खुले बाजार से 45 किलो की यूरिया की बोरी 500 से 600 रुपये तक में खरीदने को मजबूर हैं, जबकि सरकार द्वारा निर्धारित खुदरा मूल्य 266.50 रुपये है. विपक्ष ने खाद की कालाबाजारी पर भी सरकार को घेरा है.
अतनु एस. नायक ने आरोप लगाया कि सरकार यूरिया और डीएपी की कमी छिपाने के लिए किसानों को वैकल्पिक और कॉम्प्लेक्स उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित कर रही है. उन्होंने कहा कि यूरिया में 46 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है, जबकि जिन विकल्पों को बढ़ावा दिया जा रहा है, उनमें लगभग 21 प्रतिशत नाइट्रोजन ही होती है, इसलिए वे यूरिया का प्रभावी विकल्प नहीं बन सकते.
अरुण कुमार साहू ने कहा कि भाजपा ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन खेती की लागत लगातार बढ़ी है. उनके अनुसार वर्ष 2014 में प्रति एकड़ उर्वरक पर करीब 3,000 रुपये खर्च होते थे, जो अब बढ़कर 7,000 से 7,500 रुपये तक पहुंच गए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र में लंबे समय से भाजपा सरकार होने के बावजूद तालचेर उर्वरक संयंत्र से अब तक उत्पादन शुरू नहीं हो सका है.
वहीं, राज्य के सहकारिता मंत्री प्रदीप बल सामंत ने BJD के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है. उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन के लिए राज्य में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है और किसानों को आवश्यक मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जा रही है. विपक्ष बेवजह भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है. (पीटीआई)
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