मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच और गहराया खाद का संकट (Photo- AI)धान की बुवाई का मौसम शुरू होने से कुछ ही दिन पहले पंजाब के किसान एक गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं. पूरे राज्य में DAP, यूरिया, पोटाश और जिंक की भारी कमी है.फिरोजपुर, अमृतसर और गुरदासपुर के किसानों ने खाद डीलरों पर स्थिति का फायदा उठाने का आरोप लगाया है. किसानों का कहना है कि डीलर उन्हें खाद के साथ-साथ महंगी और गैर-जरूरी चीजें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं.
इस संकट का असर हरियाणा पर भी पड़ रहा है, जहां सोनीपत, रेवाड़ी और करनाल से भी इसी तरह की शिकायतें आ रही हैं. पंजाब-हरियाणा के किसान खाद की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं दोनों राज्यों की सरकारें कह रही हैं कि सब कुछ ठीक है.
आइए, जमीनी हकीकत पर एक नजर डालते हैं-
खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई रूटों में आई रुकावटों के कारण पंजाब में खाद का संकट पैदा हो गया है. धान की बुवाई का मौसम शुरू होने से पहले ही, फिरोजपुर, अमृतसर और गुरदासपुर के किसान जरूरी खाद पाने के लिए जूझ रहे हैं.
फिरोजपुर के 'श्री वाला बराड़' गांव में किसान जसवंत सिंह बताते हैं कि उन्हें अपनी 15 एकड़ जमीन के लिए 45 से 50 बोरी खाद की जरूरत है, लेकिन दुकानें उन्हें सिर्फ 2 से 4 बोरी ही दे रही हैं. आरोप है कि डीलर किसानों को महंगी कीटनाशक दवाएं या अन्य गैर-जरूरी चीजें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं. अगर किसान मना करते हैं, तो उन्हें खाद नहीं दी जाती.
“वे कहते हैं कि अगर आपको खाद चाहिए, तो आपको ये दूसरी चीजें भी खरीदनी पड़ेंगी. हमें इन चीजों की जरूरत नहीं है. यह अतिरिक्त बोझ हमें घाटे की ओर धकेल रहा है.”
अमृतसर में खाद की कमी और बढ़ती कीमतें, दोनों ही किसानों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं. दीपक शर्मा (डीलर, अमृतसर) कहते हैं, “यूरिया की ज्यादातर आपूर्ति सहकारी समितियों (Cooperative Societies) को भेजी जा रही है. निजी दुकानों को लगभग कुछ भी नहीं मिल रहा है. पिछले साल के मुकाबले जिंक सल्फेट और कीटनाशकों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है.”
जसदीप सिंह (डीलर, अमृतसर) ने कहा, “इज़रायल युद्ध और अन्य अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का असर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है. खेती की लागत हर दिन बढ़ रही है, लेकिन फसलों की कीमतें उस अनुपात में नहीं बढ़ रही हैं.”
गुरदासपुर में किसानों ने आरोप लगाया है कि इस मुश्किल दौर में डीलर उनका खुलेआम शोषण कर रहे हैं. गुरदासपुर के एक किसान ने कहा, “ये हमें लूट रहे हैं. अगर हम इनका सामान नहीं खरीदते, तो ये हमें खाद देने से मना कर देते हैं. इस समय हम बेबस हैं.”
इन जिलों के किसानों ने ऐसे डीलरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और खाद की तुरंत और सुचारू सप्लाई की मांग की है. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया, तो वे ज़ोरदार आंदोलन करेंगे.
• खरीफ सीजन के लिए कुल जरूरत: 15 लाख मीट्रिक टन
• पिछला बचा हुआ स्टॉक: 3.5 लाख मीट्रिक टन
• 1 अप्रैल 2026 तक मिली यूरिया: 5.5 लाख मीट्रिक टन
• कुल उपलब्ध स्टॉक: 9 लाख मीट्रिक टन
• इस्तेमाल के बाद बचा हुआ स्टॉक: 4.74 लाख मीट्रिक टन
पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा, “चूंकि युद्ध की चर्चाएं चल रही हैं और PM ने भी सतर्क रहने को कहा है, इसलिए हमें डर लगना लाजमी है. लेकिन अभी तक पंजाब में खाद की सप्लाई ठीक है. जहां तक यूरिया की बात है, इस सीजन के लिए हमारी जरूरत 15 लाख मीट्रिक टन है. हमारे पास 3.5 लाख मीट्रिक टन स्टॉक में था. 1 अप्रैल तक हमें 5.5 लाख मीट्रिक टन मिल चुका है. तो हमारे पास कुल मिलाकर लगभग 9 लाख मीट्रिक टन हो गया, और इस्तेमाल के बाद, अभी हमारे पास स्टॉक में 4.74 लाख मीट्रिक टन यूरिया बचा है.
अभी तक खाद की स्थिति ठीक है. लेकिन जब फसल आएगी और भविष्य में क्या हालात होंगे, यह तो वक्त ही बताएगा. हम केंद्र सरकार के साथ लगातार संपर्क में हैं और वे हमें सप्लाई भेज रहे हैं. आशंकाएं हैं कि अगर युद्ध शुरू हो गया, तो दिक्कतें बढ़ सकती हैं. लेकिन फिलहाल खाद की सप्लाई ठीक है.हमने अपने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि कोई भी किसी भी तरह की जमाखोरी न करे और हर किसान को खाद की सही सप्लाई मिले."
गुरदासपुर के मुख्य कृषि अधिकारी रणधीर सिंह ठाकुर ने कहा, “जिले में खाद की कोई कमी नहीं है. हम इसकी लगातार सप्लाई सुनिश्चित कर रहे हैं. किसी भी डीलर को खाद के साथ गैर-जरूरी चीजें बेचने की इजाजत नहीं है — यह गैर-कानूनी है. नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें लाइसेंस रद्द करना भी शामिल है. अगर कोई डीलर किसानों पर कोई अतिरिक्त चीज खरीदने का दबाव डालता है, तो किसानों को तुरंत इसकी शिकायत करनी चाहिए.”
कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने कहा, “सरकार खाद की सप्लाई को संभालने में पूरी तरह नाकाम रही है. डीलर किसानों का शोषण कर रहे हैं, और सरकार चुपचाप तमाशा देख रही है. यह शासन की एक गंभीर नाकामी है. हम मांग करते हैं कि इस मामले की तुरंत जांच हो और किसानों को लूटने वाले डीलरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बुवाई शुरू होने से पहले हर किसान तक खाद पहुंच जाए.”
इस संकट का असर हरियाणा पर भी बुरी तरह पड़ा है. सोनीपत, रेवाड़ी और करनाल के किसानों को भी इसी तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
हालांकि सरकार का दावा है कि उसके पास खाद का पर्याप्त स्टॉक है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है. ‘मेरी फसल मेरी योजना’ के तहत ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाने वाले किसानों को भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है.
सोनीपत के किसान ने कहा, “हमने 10 दिन पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाया था. अभी तक खाद नहीं मिली है. बुवाई में बस 15 दिन बाकी हैं. अगर हमें समय पर DAP और यूरिया नहीं मिली, तो पूरी फसल खराब हो जाएगी.”
रेवाड़ी के किसान ने कहा, “पिछले साल हमें आसानी से खाद मिल गई थी. इस साल रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद भी, दुकानें कह रही हैं कि स्टॉक नहीं आया है. हम परेशान हैं.”
करनाल के किसान ईशम सिंह ने कहा, “मैं DSR तरीके से खेती कर रहा हूं. इसके लिए DAP की जरूरत होती है. मैंने पिछले दो दिनों में कई दुकानों पर जाकर देखा है. कहीं भी DAP नहीं मिल रही है. यूरिया भी नहीं है. सरकार कहती है कि DSR करो, लेकिन बिना खाद के यह कैसे मुमकिन है?”
हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा, “अमेरिका और ईरान के बीच के हालात की वजह से ऐसा होना लाजमी था. डीजल, पेट्रोल और खाद की सप्लाई पर असर पड़ा है. हम इस असर को कम करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. अब खाद का वितरण ‘मेरी फसल मेरी योजना’ के तहत आधार कार्ड पर किया जा रहा है. हमें केंद्र सरकार से कोटा मिलता है — राज्य के लिए 11 लाख मीट्रिक टन यूरिया, जो ट्रेनों से आता है. खाद का 60% हिस्सा सबसे पहले सहकारी समितियों (cooperative societies) को दिया जाता है. हमारे पास अगले दो महीनों के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. हम यह सुनिश्चित करेंगे कि किसानों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े. हालांकि, हम किसी को भी खाद की जमाखोरी या जरूरत से ज्यादा स्टॉक रखने की इजाजत नहीं दे रहे हैं.”
आंकड़ों का हवाला देते हुए हरियाणा सरकार का दावा है कि उनके पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है.
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