पंजाब में खाद के लिए हाहाकार (AI जनरेटेड इमेज)पंजाब में धान की रोपाई से पहले खाद और कृषि दवाइयों की कमी और बढ़ती कीमतों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. राज्य के कई जिलों में यूरिया और डीएपी जैसी जरूरी खादों की भारी किल्लत देखने को मिल रही है, वहीं उपलब्ध खादों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. किसानों और फर्टिलाइजर कारोबारियों का कहना है कि इस स्थिति के कारण खेती की लागत काफी बढ़ गई है और आर्थिक बोझ दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है.
अमृतसर के खाद कारोबारी दीपक शर्मा ने बताया कि किसानों को जरूरत के हिसाब से खाद नहीं मिल रही है. उनके अनुसार, यूरिया की सप्लाई का बड़ा हिस्सा सोसायटियों और फैक्ट्रियों की ओर चला जा रहा है, जिससे निजी दुकानों पर स्टॉक खत्म हो रहा है. उन्होंने कहा कि कई दुकानों पर यूरिया पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और किसान एक दुकान से दूसरी दुकान तक चक्कर लगाने को मजबूर हैं. साथ ही उन्होंने सरकार से मांग की कि खाद की सप्लाई की जांच की जाए कि वह आखिर कहां जा रही है.
फर्टिलाइजर डीलरों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगाई और कच्चे माल की कमी का सीधा असर भारत में खाद और दवाइयों की कीमतों पर पड़ रहा है. जसदीप सिंह ने बताया कि जिंक सल्फेट, कीटनाशक और अन्य कृषि दवाइयों की कीमतें पिछले साल की तुलना में काफी बढ़ चुकी हैं. किसान जब पुरानी कीमतों के आधार पर खरीदने आते हैं, तो उन्हें महंगी दरें देखकर झटका लगता है.
कारोबारियों का कहना है कि विदेशों से आने वाली खादों की सप्लाई भी प्रभावित हुई है. इजराइल जैसे क्षेत्रों में चल रहे संघर्ष और समुद्री रास्तों में रुकावट के कारण रैक समय पर नहीं पहुंच पा रही हैं. फिरोजपुर के कारोबारियों के अनुसार, डीएपी, पोटाश और फॉस्फोरस जैसी कई खादें आयात पर निर्भर हैं, जिससे उनकी कमी और कीमतों में तेजी देखी जा रही है.
फिरोजपुर के किसान जसकरण सिंह ने बताया कि उनके 15 एकड़ खेत के लिए 45-50 कट्टे खाद की जरूरत होती है, लेकिन दुकानों से मुश्किल से 2 से 4 कट्टे ही मिल पा रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह दुकानदार ज्यादा खाद देने के लिए किसानों को अन्य गैर-जरूरी उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं. इससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है.
किसानों का कहना है कि खाद की कमी के चलते कई जगह कालाबाजारी भी बढ़ रही है. एमआरपी से अधिक कीमत वसूली जा रही है और किसानों को मजबूरी में महंगे दामों पर खरीद करनी पड़ रही है.
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि समय पर पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं होती है तो धान, सब्जियों और पशुओं के चारे की फसल प्रभावित हो सकती है. इससे किसानों की आय में कमी आएगी और इसका असर पूरी कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.
फर्टिलाइजर कारोबारी विकास ने बताया कि किसानों को नैनो यूरिया अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, लेकिन अधिकांश किसान अभी भी पारंपरिक यूरिया को ही प्राथमिकता दे रहे हैं.
किसानों और व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि खाद की सप्लाई व्यवस्था को मजबूत किया जाए, समय पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया जाए, कीमतों को नियंत्रित किया जाए और वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाया जाए. किसानों का कहना है कि अगर जल्द स्थिति नहीं सुधरी, तो इसका असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे मजदूर, व्यापारी और पूरे कृषि क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.
गुरदासपुर जिले में किसानों ने मांग की है कि प्रशासन तुरंत खाद की सप्लाई को सुचारु बनाए और ऐसे डीलरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे जो किसानों की मजबूरी का नाजायज़ फायदा उठा रहे हैं. किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही खाद की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित नहीं की और डीलरों पर लगाम नहीं लगाई, तो वे आने वाले समय में तीखा संघर्ष करने के लिए मजबूर होंगे.
इस संबंध में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. रणधीर सिंह ठाकुर ने कहा कि विभाग की ओर से खाद की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है और जिले में खाद की कोई कमी नहीं है. किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों पर डॉ. ठाकुर ने कहा कि किसी भी डीलर को खाद के साथ गैर-जरूरी सामान बेचने की अनुमति नहीं है. ऐसा करना गैर-कानूनी है और इस पर सख्त निगरानी रखी जा रही है. (अमित शर्मा, अक्षय कुमार और बिशंभर बिट्टू का इनपुट)
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