
खरीफ सीजन 2026 की शुरुआत के साथ ही मध्य प्रदेश के किसान खेतों की तैयारी में जुट गए हैं.कई क्षेत्रों में धान की नर्सरी, रोपाई और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई का कार्य भी शुरू हो चुका है.ऐसे समय में किसानों के लिए समय पर खाद उपलब्ध होना सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता होती है.किसानों को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने इस बार ई-विकास प्रणाली (E-Vikas System) के माध्यम से खाद वितरण की नई डिजिटल व्यवस्था लागू की है.
नई व्यवस्था के तहत किसानों को खाद प्राप्त करने के लिए पहले ऑनलाइन पंजीयन कर ई-टोकन (E-Token) प्राप्त करना होगा.
इसके बाद किसान निर्धारित अवधि के भीतर किसी भी अधिकृत उर्वरक विक्रय केंद्र से खाद खरीद सकेंगे. सरकार का दावा है कि इस प्रणाली से खाद वितरण में पारदर्शिता आएगी, कालाबाजारी पर रोक लगेगी और वास्तविक किसानों तक समय पर उर्वरक पहुंच सकेगा.
राज्य में 1 अप्रैल 2026 से ई-विकास पोर्टल के माध्यम से उर्वरक वितरण की प्रक्रिया शुरू की गई है. अब किसानों को खाद लेने के लिए पहले ऑनलाइन टोकन बुक करना होगा.टोकन जारी होने के बाद किसान तीन दिन के भीतर खाद उठा सकते हैं. यदि निर्धारित समय में खाद नहीं ली जाती है तो टोकन स्वतः निरस्त हो जाएगा और किसान को दोबारा आवेदन करना होगा.
भोपाल के रापड़िया स्थित सहकारी समिति के प्रबंधक मुकेश कुमार सेन के अनुसार, नई व्यवस्था में फार्मर आईडी (Agristack Farmer ID) की महत्वपूर्ण भूमिका है. जिन किसानों की फार्मर आईडी अभी तक नहीं बनी है, वे ई-विकास पोर्टल पर ई-टोकन जनरेट नहीं कर पाएंगे और खाद लेने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
उन्होंने किसानों से जल्द से जल्द फार्मर आईडी बनवाने की अपील की है ताकि खरीफ सीजन में उर्वरक प्राप्त करने में कोई बाधा न आए.
नई प्रणाली की एक विशेषता यह भी है कि किसान अपनी भूमि और फसल की आवश्यकता के अनुसार खाद प्राप्त कर सकते हैं. यदि पहली बार खाद लेने के बाद उन्हें अतिरिक्त उर्वरक की आवश्यकता होती है तो वे दोबारा ई-टोकन बुक कर खाद प्राप्त कर सकते हैं. इससे किसानों को जरूरत के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराने में सुविधा होगी.
ई-विकास पोर्टल के माध्यम से किसान प्रतिदिन सुबह 7 बजे से रात 8 बजे के बीच टोकन बुक कर सकते हैं. टोकन जारी करते समय किसान की एग्रीस्टैक आईडी (फार्मर आईडी) में दर्ज भूमि क्षेत्र और फसल विवरण को आधार बनाया जाता है.किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार डीएपी, यूरिया, एनपीके या अन्य उर्वरकों का चयन कर सकते हैं. खाद का वितरण होते ही संबंधित विक्रय केंद्र के स्टॉक में ऑनलाइन कटौती दर्ज हो जाती है.इससे विभाग को वास्तविक मांग और उपलब्धता की जानकारी तुरंत मिल जाती है.
कृषि विभाग का मानना है कि डिजिटल प्रणाली लागू होने से खाद वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी.प्रत्येक बोरी का रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज होने से कालाबाजारी और अनधिकृत बिक्री पर नियंत्रण लगाया जा सकेगा. साथ ही किसानों को लाइन में लगने और बार-बार केंद्रों के चक्कर लगाने की आवश्यकता भी कम होगी.
कृषि विभाग का कहना है कि खरीफ सीजन के लिए राज्य में पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों का भंडारण किया गया है. विभाग ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि उन्हें खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा और ई-विकास प्रणाली के माध्यम से समय पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा.
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