कुरुक्षेत्र में यूरिया-DAP के लिए हाहाकार, पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के बावजूद किसानों को नहीं मिल रही खाद

कुरुक्षेत्र में यूरिया-DAP के लिए हाहाकार, पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के बावजूद किसानों को नहीं मिल रही खाद

हरियाणा में धान की रोपाई से पहले यूरिया और डीएपी खाद की कमी किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है. खेत और पौध तैयार होने के बावजूद किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिल रही. किसानों का कहना है कि समय पर खाद उपलब्ध नहीं होने से खेती प्रभावित हो सकती है. उन्होंने सरकार से जल्द समाधान की मांग की है.

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कुरुक्षेत्र में यूरिया-DAP के लिए हाहाकार, पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के बावजूद किसानों को नहीं मिल रही खादधान सीजन से पहले खाद का संकट गहराया (सांकेतिक फोटो)

हरियाणा में धान की खेती की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं. खेत तैयार हैं और धान की पौध भी लगभग तैयार हो गई है. आने वाले 10 दिनों में यह पौध रोपाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगी. राज्य सरकार ने पहले ही निर्देश जारी कर दिए हैं कि 15 जून से पहले धान की रोपाई नहीं की जाएगी. लेकिन रोपाई शुरू होने से पहले ही किसानों के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है. प्रदेश के कई इलाकों में यूरिया और डीएपी खाद की भारी कमी देखने को मिल रही है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है.

सरकार की नई व्यवस्था, फिर भी नहीं मिल रही राहत

किसान नेता गुणी प्रकाश ने कहा सरकार ने किसानों के लिए "मेरी फसल मेरा ब्योरा" और Farmer ID जैसी व्यवस्था लागू की है. इसके तहत किसानों की जमीन का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है और उसी आधार पर खाद उपलब्ध कराने की बात कही गई है. सरकार का उद्देश्य यह है कि सही किसान तक सही मात्रा में खाद पहुंचे. लेकिन किसानों का कहना है कि इन व्यवस्थाओं के बावजूद उन्हें जरूरत के अनुसार खाद नहीं मिल रही है.

कई किसान घंटों लाइन में लगने के बाद भी खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं. कहीं दो बोरी मिल रही है तो कहीं पांच. किसानों का कहना है कि उनकी जमीन और जरूरत के हिसाब से खाद उपलब्ध नहीं कराई जा रही.

अंधाधुंध खाद के उपयोग पर उठे सवाल

कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि किसानों द्वारा यूरिया और कीटनाशकों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है. कई किसान प्रति एकड़ पांच से सात बैग यूरिया का उपयोग कर रहे हैं. इससे फसल पर तो असर पड़ता ही है, साथ ही मिट्टी, पानी और पर्यावरण भी प्रभावित हो रहा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यूरिया का बड़ा हिस्सा खेत में उपयोग होने के बजाय हवा में उड़ जाता है. वहीं कई ऐसे कीटनाशक भी बाजार में बिक रहे हैं, जिन्हें दुनिया के कई देशों में प्रतिबंधित किया जा चुका है. इसके बावजूद उनका इस्तेमाल भारत में जारी है. इससे किसानों के स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों पर खतरा बढ़ रहा है.

किसानों को सही जानकारी देने की जरूरत

किसानों का कहना है कि कृषि विभाग और खाद व कीटनाशक बनाने वाली कंपनियों को किसानों को सही जानकारी देनी चाहिए. उन्हें बताया जाना चाहिए कि किस फसल में कितनी मात्रा में खाद और कीटनाशकों का उपयोग करना चाहिए. इससे अनावश्यक खर्च भी कम होगा और खेती अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बन सकेगी.

किसानों का मानना है कि जिस तरह सरकार फसल का पूरा रिकॉर्ड रखती है, उसी तरह खाद और कीटनाशकों के सही उपयोग को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए.

किसान बोले- जरूरत के मुकाबले बहुत कम मिल रही खाद

किसान संजीव राणा ने बताया कि उनके पास करीब 25 एकड़ जमीन है. उनकी खेती के लिए बड़ी मात्रा में डीएपी और यूरिया की जरूरत है, लेकिन अभी तक उन्हें पर्याप्त खाद नहीं मिल पाई है. उन्होंने कहा कि सोसायटियों में खाद वितरण की व्यवस्था भी ठीक नहीं है. कभी सुबह वितरण होता है तो कभी रात में. कई किसानों को जरूरत से बहुत कम मात्रा में खाद दी जा रही है.

उनका कहना है कि धान की पौध तैयार है और खेत भी पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन खाद की कमी के कारण खेती का काम रुका हुआ है. यदि समय पर खाद नहीं मिली तो फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है.

मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री से की गई मांग

किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों ने राज्य सरकार, कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री से मांग की है कि किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार समय पर खाद उपलब्ध कराई जाए. उनका कहना है कि यदि किसानों को बुनियादी सुविधाएं और जरूरी संसाधन नहीं मिलेंगे तो इसका सीधा असर उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ेगा.

धान की रोपाई का समय नजदीक है और किसान चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करे, ताकि खेती का काम बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सके. (किसान नेता गुणी प्रकाश)

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