ईरान-इजरायल युद्ध से खाद पर संकटCrisil Ratings की एक रिपोर्ट ने बताया है कि मध्य पूर्व में चल रही लड़ाई के कारण सप्लाई चेन में रुकावट आई है. इससे देश में कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर और यूरिया दोनों के सालाना घरेलू उत्पादन पर 10-15 प्रतिशत तक असर पड़ सकता है. खाद के लिए मुख्य कच्चे माल की सप्लाई में कमी आई है जिससे कारखाने अपनी क्षमता से कम चल रहे हैं. इससे खाद बनाने वाली कंपनियों का मुनाफा घटने की आशंका बढ़ गई है.
रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि कच्चे माल और आयातित फर्टिलाइजर की कीमतों में बढ़ोतरी से सरकार का सब्सिडी बिल भी 20,000-25,000 करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है.
भारत में फर्टिलाइजर की कुल खपत में यूरिया का हिस्सा 45 प्रतिशत है, कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर (डाई-अमोनियम फॉस्फेट, या DAP, और नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम, या NPK) का हिस्सा एक-तिहाई है, और बाकी हिस्सा सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) और म्यूरिएट ऑफ पोटाश (MOP) का है.
फर्टिलाइजर क्षेत्र की आयात पर निर्भरता अभी भी बहुत ज्यादा है. लगभग 20 प्रतिशत यूरिया और एक-तिहाई कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर (मुख्य रूप से DAP) आयात किया जाता है. इसके अलावा, यूरिया (नेचुरल गैस, जो कच्चे माल की कुल लागत का लगभग 80 प्रतिशत है) और कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर (अमोनिया और फॉस्फोरिक एसिड) के लिए जरूरी मुख्य कच्चा माल भी ज्यादातर आयात ही किया जाता है, क्योंकि देश में इसके भंडार बहुत कम हैं.
यूरिया और DAP दोनों के आयात के लिए मध्य पूर्व एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्षेत्र बना हुआ है. वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में कुल आयात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र से आया (वित्त वर्ष 2025 में 42 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2024 में 28 प्रतिशत). घरेलू फर्टिलाइजर उत्पादन के मामले में तो मध्य पूर्व पर निर्भरता और भी ज्यादा है. लगभग 60-65 प्रतिशत लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और 75-80 प्रतिशत अमोनिया का आयात इसी क्षेत्र से होता है.
Crisil Ratings के डायरेक्टर आनंद कुलकर्णी कहते हैं, "मध्य पूर्व में चल रहे मुद्दों से खरीफ सीजन के एक अहम समय पर खाद सप्लाई चेन में रुकावट आ सकती है. LNG और अमोनिया की सप्लाई में लगभग तीन महीने तक जारी रहने वाली रुकावट से घरेलू यूरिया और कॉम्प्लेक्स खाद का उत्पादन 10-15 प्रतिशत तक कम हो सकता है. उत्पादन पर पड़ने वाले इस असर को कुछ हद तक सरकार के हालिया निर्देश से कम किया जा सकेगा, जिसके तहत यूरिया बनाने वालों को 70 प्रतिशत गैस दी जाएगी. इसके अलावा, लगभग तीन महीने का खाद स्टॉक, और साथ ही दूसरे स्रोतों से होने वाले आयात से, तत्काल सप्लाई की कमी का जोखिम कम हो जाएगा."
कच्चे माल की कमी और सप्लाई चेन की बढ़ती लागतों के कारण, लड़ाई शुरू होने के बाद से अमोनिया की कीमतें पहले ही लगभग 24 प्रतिशत बढ़ चुकी हैं. बाकी खादों का भी यही हाल है. इस असर को कम करने के लिए उद्योग को सरकार से अतिरिक्त सब्सिडी सहायता की जरूरत होगी. खेती में खाद के महत्व को देखते हुए, सरकार ने पहले NBS दरों में बढ़ोतरी करके और DAP बनाने वालों को अलग से सब्सिडी देकर खाद कंपनियों की मदद की है.
रिपोर्ट के आखिर में यह कहा गया है कि अगर मध्य पूर्व की लड़ाई लंबी खिंचती है, तो खाद बनाने वालों की दूसरे स्रोतों से जरूरी कच्चा माल खरीदना होगा. अगर इसकी सप्लाई दुरुस्त नहीं होती है तो किसानों के साथ-साथ खाद बनाने वाली कंपनियों को भी जूझना पड़ेगा.
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