योगी सरकार का बड़ा प्लान (AI- तस्वीर)ईरान-इजरायल संघर्ष के चलते दुनिया भर में उर्वरकों की सप्लाई पर असर पड़ने लगा है. भारत में भी डीएपी और यूरिया जैसे रासायनिक खादों की स्टॉक को लेकर चिंता बढ़ रही है. ऐसे मुश्किल समय में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसकी चर्चा अब किसानों से लेकर कृषि विशेषज्ञों तक के बीच हो रही है. दरअसल, यूपी सरकार ने फैसला किया है कि प्रदेश की करीब 7,500 गौशालाओं को अब सिर्फ पशु संरक्षण केंद्र नहीं, बल्कि जैविक खेती के बड़े केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा.
योगी सरकार की योजना के तहत गौशालाओं में मौजूद करीब 1.25 लाख गायों के गोबर और गोमूत्र से बड़े पैमाने पर जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशक तैयार किए जाएंगे. इन्हें किसानों को सस्ते दामों पर उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वे महंगे रासायनिक उर्वरकों पर अपनी निर्भरता कम कर सकें. सरकार का मानना है कि इससे किसानों को खेती की लागत घटाने में मदद मिलेगी और खेती ज्यादा टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बन सकेगी.
दरअसल, पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण उर्वरकों की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है. कई देशों में उत्पादन और निर्यात पर असर पड़ा है, जिससे डीएपी और यूरिया की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार ने आत्मनिर्भर खेती की दिशा में यह बड़ा कदम उठाया है.
सरकार की इस योजना का सबसे खास पहलू यह है कि इससे एक साथ कई समस्याओं का समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है. एक ओर जहां किसानों को सस्ती जैविक खाद मिलेगी, तो वहीं दूसरी ओर गौशालाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का रास्ता भी खुलेगा. गोबर से तैयार खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करेगी, जबकि प्राकृतिक कीटनाशकों से फसलों पर रसायनों का असर कम होगा. इससे जमीन की सेहत भी सुधरेगी और किसानों की पैदावार भी बढ़ेगी.
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह योजना सही तरीके से लागू होती है, तो उत्तर प्रदेश जैविक खेती के क्षेत्र में एक बड़ा मॉडल बन सकता है. खासकर छोटे और सीमांत किसानों को इससे सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि रासायनिक खादों की बढ़ती कीमतें उनके लिए बड़ी चुनौती बन चुकी हैं. ऐसे में योगी सरकार की यह पहल अब सिर्फ गौ संरक्षण तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसे खेती, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के बड़े अभियान के रूप में देखा जा रहा है. ऐसे समय में जब दुनिया उर्वरक संकट से जूझ रही है, तो उत्तर प्रदेश का यह मॉडल देश के लिए नई राह दिखा सकता है.
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