यूरिया बंटवारे में फार्मर आईडी का होगा इस्तेमाल (सांकेतिक तस्वीर)केंद्र सरकार उर्वरक सब्सिडी पर बढ़ते बोझ को काबू में करने के लिए एक नए डिजिटल रास्ते पर विचार कर रही है. सरकार यूरिया की बिक्री को डिजिटल किसान पहचान पत्र यानी फार्मर आईडी से जोड़ने की तैयारी कर रही है. 'बिजनेस स्टैंडर्ड' में छपी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि यह पहल चरणबद्ध तरीके से लागू की जा सकती है और शुरुआत चुनिंदा जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर होने की संभावना है. वित्त वर्ष 2025-26 में उर्वरक सब्सिडी का खर्च अनुमान से कहीं ज्यादा बढ़ गया है.
बजट में जहां 1.68 लाख करोड़ रुपये का अनुमान रखा गया था, वहीं वास्तविक खर्च 1.91 लाख करोड़ रुपये के पार जाने का अंदेशा है. इसकी सबसे बड़ी वजह रिकॉर्ड स्तर पर यूरिया की खपत बताई जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच यूरिया की खपत 3.11 करोड़ टन तक पहुंच चुकी है, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 4 फीसदी ज्यादा है.
पिछले महीने केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय ने राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में यह प्रस्ताव रखा था कि यूरिया की बिक्री को एग्री स्टैक से जोड़ा जाए. पहले चरण में उन सात जिलों को चुना जा सकता है, जहां पहले से बड़ी संख्या में किसान आईडी जारी की जा चुकी हैं. इस चरण में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उर्वरक केवल जमीन के मालिक, वास्तविक किसान या उनके अधिकृत व्यक्ति को ही बेचा जाए.
सूत्रों का कहना है कि पायलट चरण में सरकार सीधे तौर पर बिक्री पर रोक नहीं लगाएगी, बल्कि सलाह आधारित व्यवस्था लागू करेगी. अगर कोई किसान तय सिफारिश से ज्यादा उर्वरक खरीदता है तो उसे डिजिटल माध्यम से चेतावनी और मार्गदर्शन दिया जाएगा, ताकि अत्यधिक इस्तेमाल को हतोत्साहित किया जा सके.
वहीं, दूसरे चरण में इस व्यवस्था को अन्य राज्यों तक विस्तार देने की योजना है. इस चरण में फसलों के प्रकार, जोत के आकार और सिंचाई की उपलब्धता जैसे कारकों को ध्यान में रखते हुए उर्वरक की अधिकतम मात्रा तय की जा सकती है. यह मात्रा आईसीएआर (Indian Council of Agricultural Research) की सिफारिशों पर आधारित होगी.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 की शुरुआत तक देश में करीब 7.67 करोड़ किसानों की डिजिटल पहचान तैयार की जा चुकी है. ये पहचान पत्र किसान की जनसांख्यिकीय जानकारी, जमीन के विवरण और फसल पैटर्न को दर्ज करते हैं. डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027 तक 11 करोड़ किसानों को इस प्रणाली से जोड़ने का है.
रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र ने राज्यों से यह भी कहा है कि वे किसान आईडी कवरेज को तेजी से पूरा करें और कृषि भूमि की जियो-रेफरेंसिंग सुनिश्चित करें. इसके अलावा, 2026 की खरीफ फसल से पहले सभी जिलों में डिजिटल फसल सर्वे पूरा करने पर जोर दिया गया है.
1. Farmer ID क्या है?
Farmer ID किसानों की एक यूनिक डिजिटल पहचान है, जिसमें किसान की व्यक्तिगत जानकारी, जमीन का रिकॉर्ड और फसल पैटर्न दर्ज होता है. इसे सरकार डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत तैयार कर रही है.
2. सरकार Farmer ID को यूरिया सब्सिडी से क्यों जोड़ना चाहती है?
यूरिया की बढ़ती खपत और बढ़ते सब्सिडी खर्च को नियंत्रित करने के लिए सरकार Farmer ID के जरिए यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उर्वरक सही किसान तक और सीमित मात्रा में पहुंचे.
3. क्या Farmer ID से यूरिया खरीदना अनिवार्य होगा?
फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है. पहले चरण में चुनिंदा जिलों में पायलट प्रोजेक्ट चलाने की योजना है, जिसमें सीधे रोक की बजाय निगरानी और सलाह की व्यवस्था होगी.
4. Farmer ID से किसानों को क्या फायदा होगा?
इससे फर्जी या अतिरिक्त उर्वरक बिक्री पर रोक लगेगी. साथ ही भविष्य में सब्सिडी, बीमा, क्रेडिट और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे सही किसान तक पहुंच सकेगा.
5. क्या ज्यादा यूरिया खरीदने पर रोक लग सकती है?
शुरुआती चरण में सिर्फ सलाह दी जाएगी. आगे चलकर फसल, जमीन के आकार और सिंचाई क्षमता के आधार पर तय सीमा लागू की जा सकती है.
6. अभी कितने किसानों की Farmer ID बन चुकी है?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक देश में करीब 7.67 करोड़ किसानों की डिजिटल Farmer ID तैयार की जा चुकी है.
7. क्या Farmer ID से DBT और अन्य योजनाएं भी जुड़ेंगी?
हां. सरकार की योजना Farmer ID को DBT, उर्वरक, बीमा, क्रेडिट, भंडारण और खरीद जैसी सभी कृषि सेवाओं से जोड़ने की है.
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