DAP के लिए उमड़ी भारी भीड़राजस्थान के अलवर जिले के रामगढ़ कस्बे में DAP खाद लेने के लिए किसानों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. सरसों की बुआई का सीजन शुरू होने के साथ ही खाद की मांग बढ़ गई है. शुक्रवार को बस स्टैंड स्थित बहुउद्देश्यीय प्राथमिक ग्राम सेवा सहकारी समिति के बाहर किसान सुबह करीब 6 बजे से ही लाइन लगाकर खड़े हो गए थे. समिति का खाद वितरण केंद्र करीब 10 बजे खुला, जिसके बाद किसानों को DAP खाद बांटना शुरू किया गया. किसानों की संख्या ज्यादा होने के कारण मौके पर पुलिस बुलानी पड़ी. पुलिस की निगरानी में किसानों की कतार लगवाई गई और खाद का वितरण कराया गया.
शुक्रवार को समिति के पास DAP खाद के 600 कट्टे उपलब्ध थे, लेकिन खाद लेने के लिए पहुंचने वाले किसानों की संख्या इससे काफी ज्यादा थी. सीमित स्टॉक के कारण किसानों में खाद लेने की होड़ मच गई. कतार में कई बार धक्का-मुक्की और कहासुनी की स्थिति भी बनी. मामले की जानकारी मिलने पर एएसआई चंद्रपाल चौधरी और कांस्टेबल महमूद खान मौके पर पहुंचे. पुलिसकर्मियों ने किसानों की लाइन व्यवस्थित करवाई और अपनी निगरानी में खाद का वितरण कराया.
पुलिस की मौजूदगी से व्यवस्था बनी रही और दोपहर करीब 2 बजे तक खाद का वितरण शांतिपूर्ण तरीके से चलता रहा. लेकिन 600 कट्टे खत्म होने के बाद भी कई किसान खाद के इंतजार में लाइन में लगे थे. स्टॉक खत्म होने के कारण इन किसानों को बिना DAP लिए ही वापस लौटना पड़ा. सुबह से लाइन में लगे किसानों ने खाद की कम उपलब्धता को लेकर नाराजगी भी जताई.
इससे एक दिन पहले गुरुवार को भी समिति के बाहर DAP खाद लेने के लिए किसानों की लंबी कतार लगी थी. खाद के कुछ कट्टे बांटे जाने के बाद किसानों के बीच विवाद की स्थिति बन गई थी. इसके बाद समिति सदस्यों ने व्यवस्था संभालने के लिए रामगढ़ थाने से पुलिस की मदद लेने और पर्ची व्यवस्था कराने का प्रयास किया.
हालांकि उस समय थाने में पर्याप्त पुलिस बल मौजूद नहीं था. दरअसल, पंचायत राज चुनाव के तहत रामगढ़ एसडीएम कार्यालय में सरपंच पदों की लॉटरी निकाली जा रही थी. इसके चलते थाने का अधिकांश पुलिस बल एसडीएम कार्यालय में तैनात था. पुलिसकर्मियों की कमी के कारण खाद लेने के लिए थाने के बाहर लगी किसानों की कतार को बाद में वापस भेजना पड़ा, शुक्रवार को पुलिस की निगरानी में खाद बांटे जाने से व्यवस्था तो संभली रही, लेकिन DAP का सीमित स्टॉक किसानों के लिए बड़ी परेशानी बना रहा. बड़ी संख्या में किसानों को खाद नहीं मिल सकी और उन्हें खाली हाथ वापस लौटना पड़ा.
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