ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कीटनाशकों की बिक्री ने बढ़ाई टेंशन. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिक रहे कीटनाशक कृषि क्षेत्र के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं, क्योंकि इनके असली होने की कोई गारंटी नहीं है. एग्रो केमिकल इंडस्ट्री के संगठन क्रॉप लाइफ इंडिया ने सरकार से पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल में कीटनाशकों की ऑनलाइन होने वाली बिक्री पर सख्त प्रावधान करने की मांग की है. संगठन के अध्यक्ष अंकुर अग्रवाल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अगर कोई किसान किसी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से कोई कीटनाशक खरीदता है और उससे फसल खराब होती है तो कौन जिम्मेदार होगा? सरकार तो एक्ट का हवाला देकर कंपनी को पकड़ लेगी, भले ही वह नकली उत्पाद हो. ऐसे में इस तरह का प्रावधान होना चाहिए कि कंपनी की अनुमति के बिना उसका कोई भी उत्पाद कोई भी ऑनलाइन न बेच सके.
अग्रवाल ने बुधवार को एक कार्यक्रम में कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से अनाधिकृत तौर पर कीटनाशकों की बिक्री हो रही है. भारत में एग्रो केमिकल का घरेलू बाजार करीब 26 हजार करोड़ रुपये का है, जिसका 1 फीसदी से कम ही कारोबार ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर हो रहा है. इसके बावजूद रेगुलेशन न होने की वजह से ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले कीटनाशकों के नकली होने की संभावना ज्यादा है. जिसकी वजह से किसानों को नुकसान होता है और इंडस्ट्री बदनाम होती है. इस समय भारत से करीब 40 हजार करोड़ रुपये के कीटनाशकों का एक्सपोर्ट हो रहा है.
अग्रवाल ने कहा कि सरकार कीटनाशक मैनेजमेंट बिल, 2025 के मसौदा के माध्यम से कीटनाशकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को शामिल कर रही है. इस मसौदे में कीटनाशकों की ऑनलाइन बिक्री से जुड़े उभरते जोखिमों को भी खत्म करने का प्रावधान करने की जरूरत है. दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में क्रॉप लाइफ इंडिया ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़े अधिकारियों से भी बातचीत की.
अग्रवाल ने कहा कि कीटनाशकों की ऑनलाइन बिक्री अगर मनमाने तरीके से होगी तो उसका सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को होगा. इसलिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कीटनाशक बेचने वालों का रजिस्ट्रेशन और कंपनियों की मंजूरी अनिवार्य की जाए.
केंद्रीय कृषि आयुक्त डॉ. पीके सिंह ने कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर खतरनाक एग्रो केमिकल भी बेचे जा रहे हैं. एक ही व्यक्ति खाना और इतने खतरनाक कीटनाशकों की एक साथ डिलीवरी कर रहे हैं? क्या यह सुरक्षित है? अगर किसी कीटनाशक का कोई पैकेट खुल गया और वह खराब निकला तो उसे कैसे वापस किया जाएगा. इन मुद्दों पर इंडस्ट्री के लोग पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल 2025 में रखने के लिए सरकार को सुझाव दें.
इस मौके पर केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति (CIB&RC) के सचिव डॉ. सुभाष चंद ने कहा कि ग्रामीण भारत में डिजिटलीकरण और ई-कॉमर्स तेजी से हो रहा है. यह अपने साथ नए जोखिम भी ला रहा है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कीटनाशक खतरनाक उत्पाद हैं और ऑनलाइन बिक्री बढ़ने के साथ गुणवत्ता और किसान सुरक्षा की जिम्मेदारी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और निर्माताओं द्वारा साझा की जानी चाहिए. ई-कॉमर्स प्लेटफार्म कीटनाशकों की ऑनलाइन बिक्री से जुड़े खतरों की जिम्मेदारी लेने से भाग नहीं सकते. इस मौके पर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ONDC में एग्रीकल्चर डोमेन देखने वाले रवि शंकर भी मौजूद रहे.
इसे भी पढ़ें: Seed Act 2026: बीज के हर पैकेट पर QR कोड, नकली बेचने पर 30 लाख जुर्माना और 3 साल तक जेल
इसे भी पढ़ें: भारतीय बासमती का सबसे बड़ा आयातक था ईरान, बदलते गए हालात...कम होती गई मांग, आगे क्या होगा अंजाम?
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today