Camel Milk Plant: गुजरात के भुज में शुरू हुआ ऊंटनी के दूध का पहला प्रोसेसिंग प्लांट 

Camel Milk Plant: गुजरात के भुज में शुरू हुआ ऊंटनी के दूध का पहला प्रोसेसिंग प्लांट 

Camel Milk Plant गुजरात के भुज में ऊंटनी के दूध का पहला प्रोसेसिंग प्लांट शुरू हो चुका है. यहां बड़ी मात्रा में ऊंटनी के दूध से आइसक्रीम बनाई जा रही है. ऊंट पालाकों से हजारों लीटर दूध की रोजाना खरीद की जा रही है. बीते वित्त वर्ष में ऊंट पालकों को दूध की खरीद के लिए 8.71 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है. 

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Camel Milk Plant: गुजरात के भुज में शुरू हुआ ऊंटनी के दूध का पहला प्रोसेसिंग प्लांट 

पाली, राजस्थान के बाद अब गुजरात के कच्छ में भी ऊंटनी के दूध का प्रोसेसिंग प्लांट शुरू हो गया है. साल 2024-25 में इसकी शुरुआत हुई है. प्लांट की शुरुआत कच्छ जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (कोऑपरेटिव) ने की है. प्लांट सरहद डेयरी के नाम से काम कर रहा है. प्लांट में ऊंटनी के दूध से कई तरह के अलग-अलग प्रोडक्ट बनाए जा रहे हैं. इस प्लांट से ऊंट पालने वाले करीब 350 लोग जुड़े हुए हैं. ये परिवार रोजाना प्लांट को करीब 5 हजार लीटर दूध रोजाना बेचते हैं. खबर जारी करते हुए कोऑपरेटिव के पदाधि‍कारियों का कहना है कि ऊंटनी का दूध जरूरी खनिजों से भरपूर होता है. 

हेल्दी स्वास्थ्य को बढ़ावा देकर इम्यूनिटी को मजबूत करता है. पदाधि‍कारियों का ये भी कहना है कि सरहद डेयरी के पास भारत का पहला डीओडोराइजिंग ऊंटनी के दूध का प्रोसेसिंग प्लांट है. डेयरी ने ऊंटनी के दूध के लिए प्राइमरी ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन भी हासिल किया है. अमूल मॉडल का पालन करते हुए सरहद डेयरी कच्छ जिले के चार केंद्रों (रापर, नखत्राणा, गढ़शिशा और कोटड़ा अथमणा) से रोजाना ऊंटनी का दूध इकट्ठा किया जाता है.

दूध से बनाई जा रही है राजभोग आइसक्रीम 

मीडिया सोर्स के मुताबिक  सरहद डेयरी प्लांट में रोजाना 4754 लीटर ऊंटनी का दूध खरीदा जाता है. दूध को प्लांट में ही प्रोसेस किया जाता है. दावा किया जा रहा है कि सरहद देश की पहली डेयरी है जहां ऊंटनी के दूध से राजभोग फ्लेवर वाली आइसक्रीम बनाई जाती है. गौरतलब रहे फरवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसका उद्घाटन किया था. आइसक्रीम की 80 से ज्यादा वैरायटी लॉन्च कर दी गई हैं. 2024-25 में कुल 24.52 लाख लीटर आइसक्रीम का उत्पादन किया गया. 2024 में कोच्चि में IDF (इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन) द्वारा आयोजित पहली रीजनल डेयरी कॉन्फ्रेंस में सरहद डेयरी के जनरल मैनेजर नीरव गुसाई एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में ऊंटनी के दूध उत्पादन के लिए एक मॉडल पेश कर चुके हैं. 

ऊंटनी के दूध से जुड़ीं ये जरूरी 7 बातें 

  • ऊंटनी के दूध में फैट की फीसद 1.5 से 3.5 के बीच होता है, जो मवेशियों और भैंसों के दूध से कम है.
  • ऊंटनी के दूध में इंसुलिन की मात्रा ज्यादा होती है (करीब 40 µIU/ml).
  • ऊंट रिसर्च सेंटर द्वारा विभिन्न डेयरी प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे हैं जैसे- चाय, कॉफी, फ्लेवर्ड मिल्क, फॉर्मेंट दूध, पाश्चुरीकृत दूध, कुल्फी, पनीर, मावा, गुलाब जामुन, बर्फी, रसगुल्ला, पेड़ा और दूध पाउडर आदि.
  • जैसा कि हम जानते हैं कि प्रोसेसिंग की वजह से हर एक फूड आइटम अपने कुछ पोषक तत्व खो देता है और प्रोटीन समेत अन्य तत्वों का भी विकृतीकरण हो जाता है. इसलिए इसके कार्यात्मक मूल्य में कमी आ सकती है. क्योंकि दूध उत्पादन, हैंडलिंग और परिवहन के दौरान विभिन्न रोगाणुओं का कैरियर होता है, इसलिए हम कभी भी बिना पाश्चुरीकृत दूध के सेवन का सुझाव नहीं देते हैं.
  • शोधकर्ताओं का कहना है कि ऊंटनी के दूध में इंसुलिन की उच्च मात्रा के कारण, इसका सेवन मनुष्यों में टाइप-1 डायबिटीज के प्रबंधन में प्रभावी भूमिका निभाता है. यह इंसानों में विभिन्न प्रकार के तपेदिक रोगों के स्वास्थ्य प्रबंधन में भी कारगर बताया गया है.
  • ऊंटनी के दूध की प्रोटीन संरचना मानव दूध के बहुत करीब है और यह बच्चों में एलर्जी पैदा नहीं करती है.
  • ऊंटनी के दूध के सेवन से इंसानों में लैक्टोज इनटॉलरेंस की रिपोर्ट नहीं की गई है.

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