सतना में खाद के संकट से जूझ रहे किसानों को यूरिया की कतार में खड़े होकर पुलिस की गालियां सुननी पड़ रही है. वहीं, विरोध करने पर एफआईआर का भी सामना करना पड़ रहा है. बीते गुरुवार को नागौद मंडी के पास किसान यूरिया के लिए पहुंचे थे, जहां उन्हें खाद नहीं मिली. तब नाराज किसानों ने हाईवे पर जाम लगा दिया. फिर इसके बाद पुलिस ने करीब 150 किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी. यही नहीं आरोप है कि खाद की कतार में लगने के दौरान किसानों को पुलिस आरक्षक ने अपशब्द भी कहे. इस पर कांग्रेस जिला अध्यक्ष और सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा ने कड़ी आपत्ति जताते हुए एफआईआर वापस लेने की मांग की है.
सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा ने शुक्रवार को कलेक्टर से मुलाकात की. जिला अध्यक्ष ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि जिलेभर के किसानों को इस समय खेती के लिए यूरिया की सख्त जरूरत है, लेकिन खाद की अनुपलब्धता के कारण किसान लाइन में लगने को मजबूर हैं. बावजूद इसके उन्हें खाद नहीं मिल रही.
विधायक का आरोप है कि नागौद में खाद लेने पहुंचे किसानों को खाद उपलब्ध न कराकर उल्टा 150 किसानों पर केस दर्ज कर दिया गया है. गौरतलब है कि गुरुवार को नागौद में यूरिया संकट से नाराज किसानों ने नेशनल हाईवे-39 पर जाम लगा दिया था, जिससे करीब एक घंटे तक यातायात बाधित रहा. इस मामले में पुलिस ने बीएनएस की धारा 126(2) और 3(5) के तहत एहतियातन कार्रवाई की थी.
पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह प्रकरण किसानों के खिलाफ नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से दर्ज किया गया है. बताया जा रहा है कि जिले में यूरिया किल्लत के चलते हाईवे जाम की यह तीसरी बड़ी घटना है. इससे पहले 13 और 14 अगस्त को मैहर क्षेत्र में भी खाद वितरण केंद्रों पर अव्यवस्था के कारण लोगों ने रीवा-कटनी हाईवे रोका था. लगातार दोहराई जा रही ऐसी घटनाएं प्रशासन के लिए चुनौती बनती जा रही हैं. वहीं, किसान खाद के लिए परेशान है.
बता दें कि सतना एकमात्र जिला नहीं है, जहां किसानों खाद की मांग को लेकर हंगामा कर रहे हैं. कई अन्य जिलों में भी किसान किल्लत की बात कह रहे हैं. वहीं, कुछ दिनों पहले सीएम मोहन यादव ने कहा था कि प्रदेश में इस खरीफ सीजन मक्का की खेती का रकबा बढ़ा है, जिसके चलते यूरिया की मांग बढ़ गई है. उस समय उन्होंने जल्द प्रदेश को और स्टॉक मिलने की संभावना जताई थी. (वेंकटेश द्विवेदी की रिपोर्ट)
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