मक्के की नई वैरायटी से किसानों को फायदावसंत ऋतु में मक्का की खेती किसानों के लिए आज एक मुनाफे का सौदा साबित हो रही है. इस मौसम की उन्नत किस्में न केवल बंपर पैदावार देती हैं, बल्कि बेहतरीन पोषण भी प्रदान करती हैं. इसे देखते हुए नई बायोफोर्टिफाइड किस्में एपीक्यूएच 1 और एपीक्यूएच 5 हर परिस्थिति में बंपर पैदावार देने के लिए तैयार की गई हैं. भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (IIMR) के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. शंकर लाल जाट ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली द्वारा विकसित ये नई बायोफोर्टिफाइड किस्में न केवल स्थिर उत्पादन देती हैं, बल्कि इनके दानों की गुणवत्ता भी बहुत शानदार है, जो बाजार में किसानों को प्रतिस्पर्धी बढ़त दिलाती है.
वैज्ञानिकों ने भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की मिट्टी और जलवायु को ध्यान में रखते हुए इन किस्मों को इस तरह तैयार किया है कि वे "लैब टू लैंड" रणनीति के तहत सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचें और उन्हें अधिकतम लाभ पहुंचा सकें. डॉ. जाट के अनुसार, मक्का की ये प्रजातियां न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मददगार होंगी, बल्कि आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्वों के माध्यम से देश की पोषण सुरक्षा को भी मजबूत करेंगी. वसंत काल में इन उन्नत बीजों को अपनाकर किसान जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करते हुए बेहतर और टिकाऊ मुनाफा कमा सकते हैं.
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा नई दिल्ली द्वारा विकसित एपीक्यूएच 1 एक श्रेष्ठ बायोफोर्टिफाइड हाइब्रिड है, जो विशेष रूप से अपनी उच्च उत्पादकता और बेहतरीन पोषण गुणवत्ता के लिए पहचानी जाती है . यह किस्म लगभग 8.10 टन प्रति हेक्टेयर तक की शानदार पैदावार देने वाली इस किस्म में आयरन और जिंक जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं, जो देश की पोषण सुरक्षा में बड़ा योगदान देते हैं. इसके भुट्टे एक समान आकार के होते हैं और दानों का भराव बहुत ठोस होता है, जिसकी वजह से किसानों को बाजार में इसका बहुत अच्छा दाम मिलता है.
साथ ही एपीक्यूएच 1 सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह वसंत ऋतु के अलावा रबी के मौसम में भी उतनी ही प्रभावशाली और सफल साबित होती है. भारत के लगभग सभी प्रमुख मक्का उत्पादक राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए बेहद उपयुक्त है.
मक्का की उन्नत किस्म एपीक्यूएच 5 (APQH 5) भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली द्वारा विशेष रूप से उन किसानों के लिए विकसित की गई है जो कम समय में सुरक्षित और अधिक पैदावार चाहते हैं. यह एक बायोफोर्टिफाइड किस्म है जिसकी सिफारिश मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के लिए की गई है. वसंत ऋतु में यह किस्म लगभग 8.00 टन प्रति हेक्टेयर तक की औसत उपज देती है और इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका जल्दी तैयार होना है, जिससे किसानों को फसल चक्र के प्रबंधन में आसानी होती है और अगली फसल के लिए खेत जल्दी खाली हो जाता है.
एपीक्यूएच 5 किस्म आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्वों से भरपूर है जो मानव उपभोग और पशु आहार दोनों के लिए पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करती है. साथ ही यह वसंत की अत्यधिक गर्मी जैसे प्रतिकूल मौसम में भी अपना उत्पादन स्तर बनाए रखने के लिए जानी जाती है.
मक्का की इन नई किस्मों का सबसे अच्छी बात और मानवीय पहलू इनका 'बायोफोर्टिफाइड' होना है. एपीक्यूएच 1 और एपीक्यूएच 5 में आयरन और जिंक जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा को प्राकृतिक रूप से बढ़ाया गया है. यह नवाचार देश की पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने और कुपोषण जैसी गंभीर समस्याओं के खिलाफ एक निर्णायक हथियार साबित होगा. चूंकि ये वसंतकालीन किस्में बहुत कम समय में तैयार हो जाती हैं और इनका दाना भराव बहुत बेहतर होता है. इसलिए ये मानव आहार के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाले पशु और पोल्ट्री आहार के लिए भी पहली पसंद बनती जा रही हैं.
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