सीड बिल 2025 पर बढ़ी बहस, विशेषज्ञ बोले—किसानों को भरोसे में लिए बिना न हो लागू

सीड बिल 2025 पर बढ़ी बहस, विशेषज्ञ बोले—किसानों को भरोसे में लिए बिना न हो लागू

नए सीड बिल 2025 को लेकर बहस तेज है. कृषि विशेषज्ञ रंजीत सिंह घुमन ने कहा कि बीज कानून लागू करने से पहले किसानों की चिंताओं को सुनना जरूरी है. उन्होंने सरकार को जल्दबाजी से बचने और भरोसे की खाई पाटने की सलाह दी.

Advertisement
सीड बिल 2025 पर बढ़ी बहस, विशेषज्ञ बोले—किसानों को भरोसे में लिए बिना न हो लागूसीड बिल पर कृषि अर्थशास्त्री रंजीत सिंह घुमन ने दी राय

केंद्र सरकार बहुत जल्द नया सीड बिल लाने जा रही है जिसमें नकली बीज या दोयम दर्जे का बीज बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इस बिल को लेकर देशभर में चर्चा है. इस बिल के नफा-नुकसान पर बहस हो रही है. पक्ष और विपक्ष में बातें निकल कर सामने आ रही हैं. इस बीच कृषि अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ और कृषि पर सुप्रीम कोर्ट में हाई पावर कमेटी के सदस्य रंजीत सिंह घुमन ने अपनी राय रखी है. घुमन ने कहा कि इस बिल को लागू करने से पहले हर पक्ष की बात सुनी जानी चाहिए.

'आजतक' से बातचीत में रंजीत सिंह घुमन ने कहा, केंद्र सरकार जो सीड बिल 2025 ला रही है, वह 1966 के सीड बिल की जगह लेगा. बीज हमारी खेती-बाड़ी का सबसे महत्वपूर्ण इनपुट है और पूरी प्रक्रिया बीज से ही शुरू होती है. अगर बीज अच्छी क्वालिटी का होगा तो नतीजे भी अच्छे होंगे और किसानों को फायदा होगा. किसानों और सरकार के बीच भरोसे की कमी है और सरकार को इसे पाटना होगा.

किसानों को भरोसे में लेने का सुझाव

घुमन ने कहा, अगर 1966 के सीड बिल में बदलाव की जरूरत है तो किसानों को भरोसे में लेना चाहिए और उनकी चिंताओं को सुनना और उनका समाधान करना चाहिए. नहीं तो यह किसी आंदोलन का रूप ले सकता है. इस बिल की सार्वजनिक आलोचना हो रही है और विशेषज्ञों को भी शक है. इसलिए सभी की बात सुनी जानी चाहिए. सबसे महत्वपूर्ण किसान हैं. पहले मुद्दों का समाधान किया जाना चाहिए और फिर बिल लागू किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, यह अच्छी बात है कि सरकार ने इसे फीडबैक के लिए सार्वजनिक डोमेन में दिया है, लेकिन किसान सबसे महत्वपूर्ण हैं. भारत की 46 प्रतिशत वर्क फोर्स कृषि में है. यह खाद्य सुरक्षा के नजरिए से बहुत महत्वपूर्ण है. मुझे यह भी लगता है कि इस सीड बिल में सरकार को 86 प्रतिशत छोटे किसानों पर ध्यान देना चाहिए. उसे यह समझना चाहिए कि यह उन पर कैसे असर डालेगा.

सरकार कोई जल्दबाजी ना करे-घुमन

घुमने ने आगे कहा, सरकार को जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए क्योंकि कोई इमरजेंसी नहीं है. कृषि कानूनों के दौरान भी कोई इमरजेंसी नहीं थी. इसलिए सरकार को जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए.

केंद्र सरकार 2025 के बीज बिल के साथ भारत में कृषि के लिए एक नई शुरुआत करने पर काम कर रही है. यह बड़ा कानून है जिसे भारत में कृषि बीजों के उत्पादन, वितरण और क्वालिटी को रेगुलेट करने के लिए डिजाइन किया गया है.

पुराने बीज कानून की जगह लेगा नया सीड बिल

लगभग छह दशक पुराने 1966 के बीज अधिनियम की जगह लेने वाला यह नया कानून रेगुलेशन और पारंपरिक खेती के तरीकों की सुरक्षा पर फोकस करते हुए नई तकनीकी और प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करता है.

नए प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिक्री और आयात के लिए उच्च क्वालिटी वाले बीज बनाए जाएं, बीजों के उत्पादन को सही किया जाए और नकली बीजों की बढ़ती समस्या से निपटा जाए, जिसने वर्षों से किसानों के बीच चिंता पैदा की है.

POST A COMMENT