मिशन जल रक्षाछत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से जल संरक्षण को लेकर एक अच्छी खबर सामने आई है. जल शक्ति मंत्रालय ने बताया है कि 'मिशन जल रक्षा' के तहत किए गए वैज्ञानिक प्रयासों से जिले में भूजल स्तर औसतन 2.04 मीटर बढ़ गया है. यह पहल केंद्र सरकार के 'कैच द रेन' अभियान का हिस्सा है. इस अभियान का उद्देश्य बारिश के पानी को बचाकर जमीन के अंदर पहुंचाना और ग्राउंड लेवल वाटर को फिर से भरना है. वहीं, इस अभियान से किसानों को काफी फायदा होगा.
मंत्रालय के अनुसार, राजनांदगांव जिले के 662 गांवों में पानी बचाने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया गया. यहां 60 हजार से ज्यादा जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज संरचनाएं बनाई गईं. इसके अलावा 500 से अधिक बेकार पड़े बोरवेल को रिचार्ज शाफ्ट में बदला गया, ताकि बारिश का पानी सीधे जमीन के अंदर जा सके. इसके अलावा भूजल बढ़ाने के लिए जिले में 1,700 से ज्यादा मिनी परकोलेशन टैंक बनाए गए. इनके साथ 600 से अधिक इंजेक्शन वेल भी तैयार किए गए हैं. साथ ही 2,500 से ज्यादा तालाब और अन्य जल स्रोतों को जियो-टैग किया गया, जिससे उनकी निगरानी और रखरखाव आसान हो पाए.
मंत्रालय ने बताया कि इस अभियान से सिर्फ पानी का बचाव ही नहीं हुआ, बल्कि लोगों को रोजगार भी मिला. इस पहल के तहत 51 लाख से ज्यादा मानव-दिवस का रोजगार सृजित हुआ. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आय बढ़ाने में भी मदद मिली. वहीं, 'मिशन जल रक्षा' में आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया. इसके तहत GIS मैपिंग, रिमोट सेंसिंग, एक्विफर मैपिंग, डिजिटल एलिवेशन मॉडल (DEM) और रिज-टू-वैली प्लानिंग जैसी वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से उन जगहों की पहचान की गई, जहां भूजल रिचार्ज सबसे अधिक प्रभावी हो सकता था.
मंत्रालय के अनुसार, इस अभियान के तहत ऐसा ढांचा तैयार किया गया है, जिससे बारिश का पानी बहकर बर्बाद होने के बजाय जमीन के अंदर पहुंच सके. खासकर कठोर चट्टानी क्षेत्रों में रिचार्ज शाफ्ट, इंजेक्शन वेल और परकोलेशन टैंक के जरिए पानी को गहरे भूजल भंडार तक पहुंचाया जा रहा है.
इस अभियान की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि यह सिर्फ सरकारी योजना नहीं रहा, बल्कि जन-आंदोलन बन गया. इसमें किसानों, महिलाओं, युवाओं, ग्राम पंचायतों और स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. लोगों ने जल बजटिंग, जागरूकता अभियान और पानी बचाने की आदतों को अपनाया.
मंत्रालय ने बताया कि किसानों ने फसल विविधीकरण को भी अपनाया है. गर्मी के मौसम में होने वाली धान की खेती का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा कम पानी वाली फसलों की ओर स्थानांतरित हो गया है. इससे भूजल पर दबाव कम हुआ है और खेती अधिक टिकाऊ बनी है.
जल शक्ति मंत्रालय का कहना है कि 'मिशन जल रक्षा' यह साबित करता है कि बारिश के पानी का संरक्षण केवल एक मौसमी काम नहीं, बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा का मजबूत आधार है. राजनांदगांव का यह मॉडल अब दूसरे जिलों और राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है, जहां वैज्ञानिक तकनीक और जनभागीदारी के जरिए पानी की समस्या का स्थायी समाधान खोजा जा सकता है. (PTI)
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today