
मूंग और उड़द की फसल में कीट का खतरा. (सांकेतिक तस्वीर)खरीफ सीजन में किसानों ने दालों की फसलों की बंपर बुवाई की है. दाल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के लिए केंद्र की ओर से मिले प्रोत्साहन का असर रकबे में भारी बढ़ोत्तरी के रूप में देखा गया है. हालांकि, मूंग और उड़द की फसल में दो कीट रोग पीला चितकबरी या मोजेक रोग और सर्कोस्पोरा पत्ती धब्बा रोग का खतरा बढ़ गया है. दरअसल, इस बार बंपर बारिश के चलते जिन खेतों में ज्यादा देर तक पानी भरा रहा है उनमें इन रोगों का खतरा और कीट के हमले का संकट अधिक है. इससे बचने के लिए उत्तर प्रदेश कृषि विभाग ने उपाय बताए हैं.
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार इस बार खरीफ सीजन में दालों की बंपर बुवाई हुई है. 12 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार मूंग दाल की बुवाई 33 लाख हेक्टेयर हो चुकी है. जबकि, पिछले साल इसी अवधि तक केवल 29 लाख हेक्टेयर में ही बुवाई हो सकी थी. इसके अलावा उड़द दाल की बुवाई 28 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है. वहीं, अन्य सभी दालों की बुवाई रकबा मिलाकर 118 लाख हेक्टेयर में बुवाई की गई है, जो पिछले सीजन में हुई 111 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 7 लाख हेक्टेयर बुवाई अधिक है.
उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि विभाग की ओर से जारी एडवाइजरी के अनुसार उड़द और मूंग फसल में पीला चितवर्ण रोग जिसे पीला चितकबरी या मोजेक रोग भी कहा जाता है, फैसले का खतरा है. इस रोग के प्रकोप से पौधे की पत्तियों पर पीले सुनहरे चकत्ते पड़ जाते हैं. रोग के अधिक बढ़ने पर पूरी पत्ती पीली पड़ जाती है. यह एक संक्रमित रोग है जो सफेद मक्खियों के जरिए फैलता है. मक्खियां पौधों पर इस रोग को फैलाती है और धीरे-धीरे पूरी फसल इसकी चपेट में आ जाती है. पत्तियों की चिकनाई खत्म हो जाती है और वह सिकुड़ने लगती हैं.

कई अति बारिश वाले राज्यों में मूंग और उड़द फसल में सर्कोस्पोरा पत्ती धब्बा रोग का प्रकोप देखा जा रहा है. सर्कोस्पोरा पत्ती धब्बा रोग से फसल को बचाने के लिए किसान ध्यान दें कि खेत में पौधे घने नहीं होने चाहिये. इस रोग के लक्षण दिखने पर किसान मेंकोजेब 75 डब्लूपी कीटनाशक को 2.5 ग्राम लीटर या फिर कार्बेन्डाइजिम 50 डब्लूपी 1 ग्राम की कीटनाशक को प्रति लीटर पानी में घोल 2-3 बार खेत में छिड़काव कर लें.
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