धान के साथ ग्राफ्टेड बैंगन की खेती ने बदली कमाई, गौरव ने 1 एकड़ से कमाए ₹2.65 लाख

धान के साथ ग्राफ्टेड बैंगन की खेती ने बदली कमाई, गौरव ने 1 एकड़ से कमाए ₹2.65 लाख

महासमुन्द के गुलझर गांव के किसान गौरव कुठारे ने धान के साथ ग्राफ्टेड बैंगन की खेती अपनाकर आमदनी बढ़ाई.राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से मिले 30 हजार रुपये के अनुदान और ड्रिप-मल्चिंग तकनीक की मदद से एक एकड़ में करीब 23 टन बैंगन का उत्पादन कर लगभग 2.65 लाख रुपये की सकल आमदनी हासिल की.

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धान के साथ ग्राफ्टेड बैंगन की खेती ने बदली कमाई, गौरव ने 1 एकड़ से कमाए ₹2.65 लाख

छत्तीसगढ़ में पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक और उद्यानिकी फसलों को अपनाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं. महासमुन्द जिले के बागबाहरा विकासखंड के ग्राम गुलझर निवासी किसान गौरव कुठारे ने भी खेती में बदलाव कर अपनी आय बढ़ाने की राह तैयार की है. धान की खेती के साथ उन्होंने ग्राफ्टेड बैंगन समेत विभिन्न उद्यानिकी फसलों को अपनाया. ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से उन्हें करीब 23 टन उत्पादन मिला और लगभग 2.65 लाख रुपये की सकल आमदनी हुई.

धान के साथ शुरू की उद्यानिकी फसलों की खेती

किसान गौरव कुठारे पहले मुख्य रूप से धान की खेती करते थे. बाद में उन्होंने खेती में विविधता लाने के उद्देश्य से उद्यानिकी फसलों की ओर रुख किया.वर्तमान में वे अपने 1.60 हेक्टेयर प्रक्षेत्र में वर्षभर टमाटर, बैंगन, सेम और गेंदा जैसी फसलों की खेती कर रहे हैं.उद्यानिकी फसलों को अपनाने से उन्हें अलग-अलग समय पर बाजार में फसल बेचने का अवसर मिला.इससे खेती से आय के नए रास्ते भी खुले.

30 हजार रुपये के अनुदान से मिला प्रोत्साहन

वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के घटक ग्राफ्टेड बैंगन, टमाटर सीडलिंग प्रदर्शन के अंतर्गत गौरव कुठारे को एक एकड़ में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती के लिए 30 हजार रुपये का अनुदान डीबीटी के माध्यम से प्राप्त हुआ.

अनुदान और विभागीय सहयोग का लाभ लेते हुए उन्होंने ग्राफ्टेड बैंगन की खेती को अपनाया. इस तकनीक से उन्हें बेहतर उत्पादन प्राप्त हुआ और खेती में आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों को इस्तेमाल करने का अवसर मिला.

23 टन बैंगन उत्पादन, 2.65 लाख की सकल आमदनी

गौरव कुठारे के अनुसार, ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से उन्हें करीब 23 टन उत्पादन प्राप्त हुआ. उत्पाद को लगभग 20 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचने पर उन्हें करीब 2 लाख 65 हजार रुपये की सकल आमदनी प्राप्त हुई.

खेती में ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और कृषि यंत्रों का उपयोग करने से उत्पादन लागत को नियंत्रित करने में भी मदद मिली.सिंचाई और फसल प्रबंधन में इन तकनीकों के इस्तेमाल से खेती को अधिक व्यवस्थित तरीके से करने में सहायता मिली.

दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा

गौरव कुठारे की सफलता अब आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। वे स्वयं अन्य किसानों को पारंपरिक धान की खेती के साथ सब्जियों और दूसरी उद्यानिकी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं.

उनका कहना है कि किसान यदि अपनी जमीन और स्थानीय बाजार की जरूरत के अनुसार फसल विविधीकरण करें और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करें, तो खेती से बेहतर आय के अवसर बनाए जा सकते हैं.

ग्राफ्टेड बैंगन की खेती के जरिए गौरव कुठारे ने यह उदाहरण पेश किया है कि पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी और आधुनिक कृषि तकनीकों को जोड़कर किसान अपनी खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं.

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