बेंगलुरु-पुणे हाईवे पर किसानों का विरोध प्रदर्शनहजारों किसानों ने पुणे-बेंगलुरु हाईवे को जाम कर दिया है. किसानों के आंदोलन का आज तीसरा दिन है. इस आंदोलन की वजह से पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर लगातार तीसरे दिन भी ट्रैफिक बाधित है. चूंकि यह आंदोलन दिवाली के दौरान हो रहा है, इसलिए यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
कोल्हापुर के किनी टोल बूथ पर किसान पिछले तीन दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं. यह आंदोलन किसान नेता राजू शेट्टी के नेतृत्व में चल रहा है. किसानों की मांग है कि गन्ने का दाम 4500 रुपये प्रति टन होना चाहिए. किसानों का कहना है कि जब तक उन्हें यह दाम नहीं मिल जाता, वे यहां से नहीं हटेंगे.
पुलिस ने कुछ जगहों पर ट्रैफिक को दूसरे रास्तों की ओर मोड़ दिया है, लेकिन भारी वाहन अभी भी फंसे हुए हैं. इस आंदोलन के कारण पुणे-बेंगलुरु NH-48 पूरी तरह से ठप हो गया है. दिवाली के समय बड़ी संख्या में लोग पुणे से कोल्हापुर और अन्य जगहों की यात्रा करते हैं, और वे इस स्थिति से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.
पूर्व सांसद और 'स्वाभिमानी शेतकरी संगठन' के संस्थापक राजू शेट्टी के नेतृत्व में हजारों किसानों ने पुणे-बेंगलुरु नेशनल हाईवे पर किनी टोल प्लाजा के पास लगातार तीसरे दिन भी अनिश्चितकालीन सड़क जाम जारी रखा. किसान मांग कर रहे हैं कि मौजूदा पेराई सीजन के दौरान चीनी मिलों को दी जाने वाली गन्ने की फसल के लिए उन्हें पहली किस्त के रूप में कम से कम 4,500 रुपये प्रति टन का भुगतान किया जाए. मंगलवार दोपहर शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन के कारण व्यस्त हाईवे पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे कई ट्रक और अन्य वाहन रास्ते में ही फंस गए हैं.
आंदोलन को 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद, किसानों का कहना है कि इस गतिरोध को सुलझाने के लिए न तो सरकार के प्रतिनिधियों और न ही चीनी मिल मालिकों ने उनसे बातचीत की कोई पहल की है. राजू शेट्टी ने चीनी मिल मालिकों और राज्य सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए आरोप लगाया है कि चीनी की बढ़ती कीमतों और गन्ने के बाय प्रोडक्ट (जैसे खोई और शीरा) से होने वाली भारी कमाई के बावजूद, वे किसानों की मांगों को नजरअंदाज कर रहे हैं.
उन्होंने सवाल उठाया कि जब बाजार में चीनी और उससे जुड़े उत्पादों की कीमतें अच्छी हैं, तो चीनी मिलें किसानों को अधिक दाम देने के लिए तैयार क्यों नहीं हैं? शेट्टी ने चेतावनी दी है कि जब तक 4,500 रुपये प्रति टन की पहली किस्त की मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक यह आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा. उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि अगर सरकार ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो उनका संगठन मुंबई और पुणे में दूध और सब्जियों की आपूर्ति रोककर आंदोलन को और तेज कर सकता है. इससे पहले, गन्ने से जुड़े एक सम्मेलन में शेट्टी ने मौजूदा पेराई सीजन के लिए 5,500 रुपये प्रति टन के दाम की मांग की थी.
किसानों द्वारा किए गए इस जाम के कारण अब एक और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है. मंगलवार दोपहर से पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर अलग-अलग जगहों पर फंसे ट्रक चालकों ने यातायात पर लगी पाबंदियों को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया है.
ट्रक चालकों का आरोप है कि जहां कारों और छोटे वाहनों को जाने दिया जा रहा है, वहीं भारी वाहनों को अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं दिया गया है. उन्होंने हाईवे पर कई घंटों तक फंसे रहने के दौरान खाने-पीने की सुविधाओं के अभाव की भी शिकायत की.
बुधवार को, कुछ ट्रक चालकों ने इन पाबंदियों के खिलाफ विरोध जताते हुए हाईवे को अलग से जाम करने की कोशिश की. हालांकि, पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप किया और बल प्रयोग करके उन्हें सड़क के किनारे कर दिया.
ट्रक ड्राइवरों का आरोप है कि इस दौरान पुलिसकर्मियों ने एक ड्राइवर को थप्पड़ मारा और उसके साथ मारपीट की. स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है.
ट्रक ड्राइवरों की मांग है कि अगर भारी वाहनों को बंद हाईवे से गुजरने की अनुमति नहीं दी जा सकती, तो प्रशासन को उनके लिए वैकल्पिक रास्तों का इंतजाम करना चाहिए, ताकि उन्हें अनिश्चित काल तक फंसे न रहना पड़े.
इस आंदोलन के कारण पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर कई जगहों पर ट्रैफिक प्रभावित हुआ है. कोल्हापुर के किनी टोल प्लाजा के अलावा, किसानों ने सतारा जिले के नागठाणे के पास भी सड़क जाम कर दी है. सतारा, नागठाणे, उमब्रज, अतीत, किनी और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक प्रभावित हुआ है.
पुलिस ने कराड, पेठ नाका, सांगली फाटा, टॉप, वथर, कागल और उचगांव फाटा सहित कई जगहों पर ट्रैफिक को दूसरे रास्तों (डायवर्जन) की ओर मोड़ दिया है. इससे भारी वाहन सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, और हाईवे पर कई जगहों पर लंबी कतारें लग गई हैं.
स्वाभिमानी शेतकरी संगठन का तर्क है कि शुगर मिलें चीनी, इथेनॉल और अन्य प्रोडक्ट से भारी कमाई कर रही हैं, लेकिन वे इस मुनाफे का उचित हिस्सा गन्ना किसानों को देने के लिए तैयार नहीं हैं.
संगठन ने चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत 31 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो करने और इथेनॉल खरीद की कीमतों में बदलाव करने की भी मांग की है.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहले चेतावनी दी थी कि अगर महाराष्ट्र की शुगर मिलों में गन्ने की पेराई शुरू करने में देरी हुई, तो पड़ोसी राज्य कर्नाटक की मिलें महाराष्ट्र के किसानों से गन्ना खरीद सकती हैं. ऐसी स्थिति में महाराष्ट्र की शुगर मिलों के लिए गन्ने की कमी हो सकती है. हालांकि, किनी में चल रहे इस जाम को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से कोई नया और आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के नेता राजू शेट्टी से गन्ने के 'उचित और लाभकारी मूल्य' (FRP) को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन को वापस लेने की अपील की. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे को सुलझाने के लिए बातचीत कर रही है. फडणवीस ने बताया कि सरकार पहले ही FRP की घोषणा कर चुकी है, लेकिन किसान इससे अधिक कीमत की मांग कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि किसानों और चीनी मिल मालिकों के बीच बातचीत चल रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त होना चाहिए. साथ ही, उन्होंने मंत्री हसन मुश्रीफ को भी निर्देश दिया है कि वे इस मुद्दे को सुलझाने के लिए संबंधित पक्षों के साथ बातचीत करें.(राहुल गायकवाड के इनपुट के साथ)
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