
एमडीए ऑफिस के बाहर धरने पर बैठी महिलाएंमेरठ में मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) के खिलाफ किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. लोहियानगर, वेदव्यासपुरी और गंगानगर आवासीय योजनाओं से प्रभावित किसान अपने लंबित मुआवजे और विकसित भूखंडों की मांग को लेकर पिछले तीन दिनों से एमडीए कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं. किसानों का आरोप है कि प्राधिकरण के साथ समझौता होने और बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पर सहमति बनने के बावजूद उन्हें अब तक उनका हक नहीं मिला है.
बुधवार को नाराज किसानों ने एमडीए कार्यालय के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर दी. इससे कार्यालय परिसर में हलचल मच गई. सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और किसानों से बातचीत की. पुलिस ने किसानों को प्राधिकरण के अधिकारियों से वार्ता कराने का आश्वासन दिया. इसके बाद किसानों ने गेट का ताला खोल दिया. हालांकि, किसानों ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक उनका धरना जारी रहेगा.

संयुक्त किसान संघर्ष समिति के मुताबिक, वर्ष 2015 में तत्कालीन जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर तीनों आवासीय योजनाओं से प्रभावित किसानों के साथ समझौते की शर्तें तय की गई थीं. इसमें किसानों को विकसित भूखंड देने पर सहमति बनी थी. समिति का आरोप है कि समझौते को कई साल बीत जाने के बावजूद सभी प्रभावित किसानों को इसका लाभ नहीं मिला है.
समिति की ओर से जारी पत्र के अनुसार, 28 सितंबर 2016 को हुई एमडीए की 107वीं बोर्ड बैठक में गंगानगर, गंगानगर विस्तार की 42 एकड़ योजना, डॉ. राममनोहर लोहिया नगर और वेदव्यासपुरी के किसानों को शताब्दीनगर योजना की तर्ज पर अतिरिक्त प्रतिकर देने का प्रस्ताव रखा गया था. समिति का दावा है कि बोर्ड ने इस प्रस्ताव पर सहमति दी थी और 109वीं बोर्ड बैठक में भी इस पर चर्चा हुई थी.
संयुक्त किसान संघर्ष समिति का आरोप है कि इस फैसले के तहत करीब 2 करोड़ 81 लाख 68 हजार रुपये कुछ छोटे किसानों को वितरित किए गए. हालांकि, बड़े किसानों को अब तक विकसित भूखंड या अतिरिक्त प्रतिकर का लाभ नहीं मिला है. समिति का कहना है कि कुछ छोटे किसान भी अभी तक अपने अधिकार से वंचित हैं. किसानों के मुताबिक, 108वीं बोर्ड बैठक में फैसले के क्रियान्वयन को स्थगित कर दिया गया था. इसके बाद भी समझौते की शर्तों के अनुसार सभी पात्र किसानों को लाभ नहीं दिया गया.
संयुक्त किसान संघर्ष समिति ने कहा है कि जिन किसानों ने न्यायालय में मुकदमा नहीं किया और अपनी जमीन पर कब्जा नहीं किया, उन्हें समझौते के तहत लाभ दिया जाना चाहिए. समिति ने चेतावनी दी है कि जब तक किसानों की मांगों का समाधान नहीं होता, धरना जारी रहेगा. किसानों ने 'मुआवजा नहीं तो वोट नहीं' का नारा देते हुए कहा है कि यदि एमडीए ने जल्द उनकी मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.
किसान गौरव गुर्जर ने कहा कि किसानों ने अपनी जमीन आवासीय योजनाओं के लिए दी थी और समझौते के तहत उन्हें विकसित भूखंड तथा प्रतिकर मिलना था. इसके बावजूद लंबे समय से उनकी मांगें लंबित हैं. किसानों को बार-बार आश्वासन मिल रहा है, लेकिन जमीन पर कोई समाधान नहीं हुआ है. जब तक किसानों को उनका हक नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today