
खेती के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहा है और किसान अब परंपरागत फसलों से आगे बढ़कर हाई वैल्यू फ्लावर क्रॉप्स की ओर रुख कर रहे हैं. इन्हीं में से एक है लिली फूल जिसकी गिनती दुनिया के सबसे खूबसूरत और महंगे फूलों में होती है. कम समय में तैयार होने और बाजार में भारी मांग के कारण लिली की खेती आज किसानों के लिए कमाई का शानदार जरिया बन चुकी है. लिली की खेती सिर्फ एक फसल नहीं बल्कि किसानों के लिए आर्थिक तरक्की का नया रास्ता है. अगर सही प्लानिंग और मार्केटिंग की जाए तो यह खेती कम समय में किसानों को लाखों की कमाई दे सकती है.
लिली एक विदेशी फूल है जिसकी खुशबू और आकर्षक रंग इसे बेहद खास बनाते हैं. इसका उपयोग शादी-विवाह, होटल-रेस्टोरेंट डेकोरेशन, पूजा-पाठ, गिफ्ट बुके और इवेंट मैनेजमेंट में बड़े पैमाने पर होता है. यही वजह है कि इसकी मांग साल भर बनी रहती है. लिली की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 55 से 60 दिनों में फूल देने लगती है. एक बार पौधे तैयार हो जाने के बाद नियमित कटाई से किसान लगातार फूल बेच सकते हैं. कम समय में तैयार होने वाली यह फसल किसानों को जल्दी रिटर्न देती है.
लिली की खेती मुख्य रूप से पॉलीहाउस या ग्रीनहाउस में की जाती है. इसके लिए 15–25 डिग्री सेल्सियस तापमान और अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है. लिली की खेती बीज से नहीं बल्कि बल्ब से की जाती है और यह आसानी से बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं. एक एकड़ में लिली की खेती पर करीब 7 से 10 लाख रुपये तक का खर्च आता है. इसमें पॉलीहाउस, बल्ब, खाद और देखभाल का खर्च शामिल होता है. वहीं अच्छी पैदावार होने पर किसान 10 से 18 लाख रुपये तक की कमाई सिर्फ दो महीने में कर सकते हैं. शादी और त्योहारों के सीजन में फूलों के दाम और भी बढ़ जाते हैं.
शहरीकरण और बढ़ते लाइफस्टाइल के चलते सजावटी फूलों की मांग तेजी से बढ़ रही है. दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में लिली की भारी खपत है. साथ ही एक्सपोर्ट के जरिए किसान विदेशी बाजार से भी जुड़कर ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं.लिली की खेती उन किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है जो कम जमीन में ज्यादा कमाई करना चाहते हैं. सही तकनीक, बाजार की समझ और थोड़ी मेहनत से यह खेती किसानों की आर्थिक स्थिति बदल सकती है.
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