जम्मू कश्मीर में बारिश-बाढ़ से तबाहीजम्मू-कश्मीर में मॉनसून का बदला हुआ मिजाज अब जानलेवा साबित हो रहा है. पिछले तीन दिनों से जारी भारी बारिश, बादल फटने और फ्लैश फ्लड की घटनाओं ने जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में व्यापक तबाही मचाई है. अधिकारियों के अनुसार, इस अवधि में अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सात लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं.
सबसे अधिक नुकसान जम्मू संभाग के पुंछ और राजौरी जिलों में दर्ज किया गया है, जहां बादल फटने और अचानक आई बाढ़ के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. पहाड़ी इलाकों में कई मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और संपर्क मार्गों को भी नुकसान पहुंचा है.
बीती रात बांदीपोरा जिले की गुरेज घाटी में बादल फटने के बाद अचानक आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी. तेज बहाव के कारण कई मकान ढह गए, कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा और किशनगंगा नदी पर बने कई छोटे पुल बह गए. नदी और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ने से आसपास के क्षेत्रों में दहशत का माहौल बन गया.
स्थानीय प्रशासन के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव का काम युद्धस्तर पर जारी है. राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमों को मौके पर तैनात किया गया है और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है.
मौसम विभाग और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पहाड़ी क्षेत्रों में संभावित बादल फटने और फ्लैश फ्लड की आशंका को देखते हुए पहले ही मंगलवार और बुधवार के लिए हाई अलर्ट जारी किया था. प्रशासन ने नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोगों तथा संवेदनशील इलाकों में रहने वाले परिवारों को सतर्क रहने की सलाह दी थी.
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण (I&FC) विभाग, कश्मीर ने झेलम बेसिन में भारी बारिश की चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग, कुलगाम और शोपियां जिलों में 50 से 100 मिमी तक बारिश हो सकती है. इसके चलते नदियों और जलधाराओं के जलस्तर में अचानक वृद्धि की संभावना जताई गई थी.
खराब मौसम का असर अमरनाथ यात्रा पर भी पड़ा है. लगातार भारी बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए यात्रा को मंगलवार को भी स्थगित रखा गया. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बुधवार को भी यात्रियों को पवित्र गुफा की ओर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
यात्रा मार्गों पर लगातार बारिश, फिसलन और पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते जोखिम को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. प्रशासन स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है और मौसम में सुधार के बाद ही यात्रा दोबारा शुरू करने पर निर्णय लिया जाएगा.
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बहुत अधिक भारी बारिश की संभावना जताई है. विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत में अगले चार से पांच दिनों तक मानसून सक्रिय बना रह सकता है.
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के कमजोर पड़ने और उत्तर भारत में मॉनसूनी धाराओं के मजबूत होने से बारिश की गतिविधियों में तेजी आई है. यही कारण है कि जम्मू-कश्मीर और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में बादल फटने और फ्लैश फ्लड जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ गया है.
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें, अनावश्यक यात्रा से बचें और नदी-नालों के किनारे जाने से परहेज करें. संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन और राहत एजेंसियों से संपर्क करने की सलाह दी गई है. लगातार हो रही बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने जम्मू-कश्मीर में जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। राहत और बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन मौसम की चुनौती अभी पूरी तरह टली नहीं है.
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