गेहूं की आखिरी सिंचाईगेहूं की खेती में बुवाई से लेकर कटाई तक कई अहम चरण होते हैं, लेकिन 'आखिरी सिंचाई' सबसे ज्यादा जरूरी मानी जाती है. यही वो समय होता है जब किसान अपनी पूरी मेहनत का फल पा सकते हैं. अगर सही समय पर अंतिम पानी दिया जाए, तो गेहूं के दाने अच्छे से भरते हैं, मोटे, चमकदार और वजनदार बनते हैं. वहीं, इससे फसल की क्वालिटी भी बढ़ती है और उपज में करीब 20 से 30 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन अगर इस समय फसल को पानी कम मिला या गलत समय पर सिंचाई हुई, तो दाने सिकुड़ जाते हैं, भराव ठीक से नहीं होता और पैदावार में नुकसान हो जाता है. इसलिए गेहूं की फसल में आखिरी सिंचाई को बहुत समझदारी और सही समय पर करना बेहद जरूरी होता है. आइए जानते हैं कैसे.
1. भारी और चिकनी मिट्टी: जिन क्षेत्रों की मिट्टी भारी और चिकनी है, वहां जल धारण क्षमता अधिक होती है. ऐसी मिट्टी में जब गेहूं के दानों के अंदर ‘मिल्किंग स्टेज’ यानी दूध भरने की अवस्था हो, तब आखिरी सिंचाई कर देनी चाहिए. दरअसल, जब दाने को दबाने पर दूध की पिचकारी निकले वही सिंचाई का सही समय है.
2. रेतीली और दोमट मिट्टी: रेतीली मिट्टी में पानी जल्दी सूख जाता है. यहां किसानों को मिल्किंग स्टेज से थोड़े दिनों के बाद सिंचाई करनी चाहिए. जब दाना दबाने पर दूध न निकले बल्कि थोड़ा सख्त महसूस होने लगे, तब अंतिम पानी देना उचित रहता है. यदि मिट्टी बहुत अधिक रेतीली है, तो बालियां पीली पड़ने या ऊपर की पत्ती सूखने की शुरुआत होने पर सिंचाई करनी चाहिए.
अंतिम सिंचाई के दौरान सबसे बड़ा खतरा तेज हवाओं का होता है, क्योंकि पानी देने के बाद तेज हवा चलती है और गेहूं की फसल गिर जाती है, तो पैदावार में 30 से 40 फीसदी तक की भारी गिरावट आ सकती है. इसलिए सिंचाई हमेशा तब करें जब हवा बिल्कुल न चल रही हो. ऐसे में मौसम का पूर्वानुमान देखने के लिए मोबाइल ऐप्स का उपयोग करें और तय करें कि आने वाले 4-5 दिनों तक आंधी या तूफान की संभावना न हो. इसके अलावा यदि दिन में हवा चल रही है, तो रात के समय सिंचाई करना अधिक सुरक्षित रहता है.
अभी गेहूं फसल जिस अवस्था होती है. इस समय नाइट्रोजन का अधिक इस्तेमाल हानिकारक हो सकता है क्योंकि इससे पौधा लंबाई में ज्यादा बढ़ता है और कमजोर होकर गिर जाता है. इसलिए इस समय सही मात्रा में पोटाश और फास्फोरस का स्प्रे करें, क्योंकि पोटाश तने को मजबूती देता है और दानों को वजनदार बनाता है, जिससे पौधा हवा के थपेड़ों को सहने की शक्ति रखता है. इसके अलावा गेहूं की फसल में दाना बनते समय बोरॉन की कमी से बालियां सूख सकती हैं या दाने छोटे रह सकते हैं. ऐसे में किसान फसलों में बोरॉन का छिड़काव कर सकते हैं.
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