
पंजाब, गुजरात समेत सभी प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में उत्पादन में गिरावट का अनुमान जताया गया है. बीते कुछ वर्षों से कपास उत्पादन में आ रही गिरावट को देखते हुए हुए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने HDPS तकनीक से खेती करने की सलाह दी है. आईसीएआर वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया है कि वह हाई डेंसिटी प्लांटेशन सिस्टम (HDPS) के जरिए खेती करें. इसके लिए न्यूमेटिक प्लांटर मशीन के इस्तेमाल की सलाह दी गई है. इससे पैदावार में बढ़ोत्तरी होगी और इनपुट लागत में कमी आएगी. बता दें कि पंजाब, गुजरात समेत सभी प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में उत्पादन में गिरावट का अनुमान जताया गया है.
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के अधीन केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान (CRIDA) हैदराबाद की ओर से कपास की उत्पादकता बढ़ाने के लिए किसान मेला आयोजित किया गया. कृषि विज्ञान केंद्र हयातनगर अनुसंधान फार्म में वैज्ञानिकों ने कपास की उत्पादकता बढ़ाने वाली वैरायटी के बारे में किसानों को जानकारी दी. इस दौरान सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के लिए एग्रीकल्चर इकोसिस्टम में तकनीक इस्तेमाल पर जोर दिया गया.
कपास किसानों को उच्च घनत्व रोपण प्रणाली (HDPS) के जरिए खेती करने की सलाह दी गई. कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि इसके लिए वह न्यूमेटिक प्लांटर मशीन का इस्तेमाल करें, ताकि बीजरोपण निश्चित दूरी पर सटीक रूप से किया जा सके. किसानों को कीट और रोग प्रबंधन, जल संरक्षण के साथ कपास की तुड़ाई में तकनीक अपनाने की सलाह दी गई.
भारत में कपास उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नागपुर में ICAR-केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान (CICR) की ओर से चलाए जा रहे HDPS प्रोजेक्ट की जानकारी किसानों को दी गई. इसके प्रोजेक्ट के जरिए उत्पादकता बढ़ाने, इनपुट लागत को कम करने और विपरीत परिस्थितियों में कपास की खेती में स्थिरता और लचीलापन लाने में मदद मिली है.

उन्होंने किसानों से अधिक उपज के लिए सर्वोत्तम कृषि प्रथाओं को अपनाने की सलाह दी. रंगा रेड्डी जिले के जिला कृषि अधिकारी बी. नरसिम्हा राव ने अधिक उपज हासिल करने के लिए किसानों की सराहना की. आईसीएआर-सीआरआईडीए के प्रभारी निदेशक डॉ. एसके बाल ने विभिन्न परिस्थितियों में आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए समय पर बुवाई, उचित कीटनाशक का उपयोग और सिंचाई जैसे प्रोजेक्ट पर दिशानिर्देशों का पालन करने के महत्व पर जोर दिया.
भारतीय कपास संघ (CAI) ने 15 फरवरी तक कपास उत्पादन अनुमान में कहा है कि 301.75 लाख गांठ पैदावार होगी. इससे पहले के अनुमान में 304.25 लाख गांठ उत्पादन की बात कही गई थी. संघ ने कहा कि विपरीत मौसम स्थितियों और कीट रोगों के चलते पंजाब, हरियाणा और राजस्थान सहित उत्तर भारत में अनुमानित उत्पादन में 2.5 लाख गांठ की कटौती करके 28 लाख गांठ कर दिया है. संघ ने गुजरात के उत्पादन में 5 लाख गांठ की कटौती करके 75 लाख गांठ कर दिया है. इसके साथ ही तेलंगाना की फसल को 5 लाख गांठ बढ़ाकर 47 लाख गांठ कर दिया. तेलंगाना तीसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक राज्य बन जाएगा, जबकि महाराष्ट्र 90 लाख गांठ उत्पादन करके अपना नंबर एक स्थान बनाए रखेगा. जबकि, कुछ साल पहले 100 लाख गांठ उत्पादन करने वाला गुजरात दूसरे स्थान पर रहेगा.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today