आम की खेतीआम को यूं ही फलों का राजा नहीं कहा जाता. इसकी मांग देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी खूब रहती है. यही वजह है कि किसान भी आम की खेती से अच्छी कमाई की उम्मीद रखते हैं. लेकिन अच्छी पैदावार सिर्फ किस्मत से नहीं मिलती, इसके लिए सही समय पर सही देखभाल करना भी बहुत जरूरी होता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च का महीना आम के पेड़ों के लिए बेहद अहम माना जाता है. इसी समय पेड़ों पर बौर यानी फूल फल में बदलते हैं. अगर इस दौरान सिंचाई, खाद या देखभाल में थोड़ी भी लापरवाही हो जाए तो फूल झड़ सकते हैं और फलों की कमी हो सकती है. इसलिए इस समय किसानों को खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है. आइए जानते हैं किन बातों का ध्यान रखें.
जब मार्च में पेड़ों पर बौर निकल रहे हों, उस समय ज्यादा पानी नहीं देना चाहिए. कुल मिलाकर मार्च के महीने में बागानों में अधिक सिंचाई नहीं करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा सिंचाई करने से पेड़ों में नई पत्तियां निकलने लगती हैं, जिससे फूल कमजोर पड़ जाते हैं और झड़ने का खतरा बढ़ जाता है. जब पेड़ों पर मटर के दाने जितने छोटे फल दिखाई देने लगें, तब हल्की सिंचाई शुरू करनी चाहिए. मार्च में जब फल बढ़ने लगते हैं, तब नियमित लेकिन सीमित मात्रा में पानी देना जरूरी होता है. विशेषज्ञों के मुताबिक ड्रिप सिंचाई इस समय सबसे बेहतर तरीका माना जाता है, क्योंकि इससे जड़ों तक सही मात्रा में नमी पहुंचती है और पानी की बचत भी होती है.
इस मौसम में पेड़ों को संतुलित पोषण देना भी बेहद जरूरी होता है. इसके लिए गोबर की सड़ी खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालना फायदेमंद माना जाता है. इसके साथ ही बोरॉन, जिंक और मैग्नीशियम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करने से फूल और फल मजबूत बनते हैं. ऐसे में किसान मार्च के महीने में पोटाश युक्त खाद जैसे NPK 13:00:45 या पोटैशियम नाइट्रेट का 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे कर सकते हैं. इससे एक मंजर से 8–10 आम तक लगने की संभावना बढ़ जाती है.
मार्च के महीनें में मौसम में हो रहे बदलाव और तापमान में बढ़ोतरी होने से आम के पेड़ों पर मधुआ, गुझिया और हॉपर जैसे कीट हमला कर सकते हैं, जो फूलों को नुकसान पहुंचाते हैं. इसके अलावा झुलसा रोग भी आम की फसल के लिए बड़ी समस्या बन सकता है. ऐसे में मार्च के दौरान ही पहला और दूसरा स्प्रे कर लेना चाहिए. जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही दवाओं का इस्तेमाल करें.
पेड़ों के नीचे सूखी घास, पत्तियां या प्लास्टिक की मदद से मल्चिंग करने से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बनी रहती है. इससे खरपतवार भी कम उगते हैं और पेड़ों की जड़ों को बेहतर वातावरण मिलता है. इसलिए मार्च के महीनें में आम के बागानों में मल्चिंग करें
अगर पेड़ों की टहनियां बहुत घनी हो गई हों तो सूखी या बीमार शाखाओं को हल्का काट देना चाहिए. इससे धूप और हवा पेड़ के अंदर तक पहुंचती है और फल बेहतर लगते हैं. हालांकि इस समय भारी छंटाई से बचना चाहिए, क्योंकि पेड़ फूल के दौर में होता है. वहीं, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान मार्च में आम के बाग की सही तरीके से देखभाल करें, तो न केवल फूल झड़ने से बच सकते हैं बल्कि पैदावार और आम की क्वालिटी दोनों में अच्छा सुधार देखा जा सकता है.
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