गाजर घास बनी किसानों की नई मुसीबत! फसल घटाने के साथ सेहत पर भी असर, ऐसे करें खत्म

गाजर घास बनी किसानों की नई मुसीबत! फसल घटाने के साथ सेहत पर भी असर, ऐसे करें खत्म

बीजापुर में गाजर घास के बढ़ते खतरे को रोकने के लिए सात दिवसीय जागरूकता एवं उन्मूलन अभियान चलाया गया. किसानों और विद्यार्थियों को गाजर घास से फसल, पशु और स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान के साथ इसके सुरक्षित उन्मूलन के तरीके बताए गए.

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गाजर घास बनी किसानों की नई मुसीबत! फसल घटाने के साथ सेहत पर भी असर, ऐसे करें खत्म

छत्तीसगढ़ में खेतों और ग्रामीण इलाकों में तेजी से फैल रही गाजर घास यानी पार्थेनियम हिस्टेरोफोरस किसानों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है.यह खरपतवार फसलों की उत्पादकता घटाने के साथ मिट्टी, पशुओं और मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर डाल सकती है. इसके संपर्क में आने से त्वचा में एलर्जी और सांस संबंधी परेशानी हो सकती है.समय पर नियंत्रण नहीं किया जाए तो एक पौधे से बड़ी संख्या में बीज फैलने के कारण यह तेजी से दूसरे क्षेत्रों में भी फैल जाती है.

इसी समस्या को देखते हुए बीजापुर जिले में कृषि विज्ञान केंद्र के नेतृत्व में गाजर घास जागरूकता एवं उन्मूलन सप्ताह आयोजित किया गया.अभियान में स्कूलों से लेकर खेतों तक विद्यार्थियों, किसानों और ग्रामीणों को गाजर घास की पहचान, नुकसान और इसके सुरक्षित नियंत्रण के तरीके बताए गए.

फसलों की पैदावार में 20 से 30 प्रतिशत तक कमी

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक गाजर घास खेतों में फसलों के विकास को प्रभावित कर सकती है. बीजापुर जिले में इसके फैलाव से फसलों की पैदावार में 20 से 30 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना बताई गई है. इसके अलावा यह खरपतवार मिट्टी की गुणवत्ता और आसपास के पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है.

गाजर घास की सबसे बड़ी चुनौती इसका तेजी से फैलना है.पौधे में फूल आने के बाद बड़ी संख्या में बीज बनते हैं, जो खेतों और खाली जमीन में फैलकर अगले साल फिर पौधे तैयार कर सकते हैं. इसलिए फूल आने से पहले इसका नियंत्रण करना अधिक प्रभावी माना जाता है.

गाजर घास हटाने का सुरक्षित तरीका क्या है?

अभियान के दौरान किसानों को बताया गया कि गाजर घास को हटाते समय दस्ताने और मास्क का इस्तेमाल करना जरूरी है. फूल आने से पहले पौधे को सावधानीपूर्वक जड़ सहित निकालना इसके प्रसार को रोकने का एक प्रभावी तरीका है. इसे हाथ से हटाते समय सीधे त्वचा के संपर्क से बचना चाहिए.

कृषि विज्ञान केंद्र की टीम ने किसानों को गाजर घास के जैविक और रासायनिक नियंत्रण की जानकारी भी दी. गैर-कृषि भूमि पर आवश्यकता और अनुशंसाओं के अनुसार शाकनाशी के उपयोग के बारे में बताया गया. जैविक नियंत्रण के लिए मैक्सिकन बीटल की भूमिका की जानकारी भी किसानों को दी गई.

स्कूलों और गांवों में चला अभियान

केंद्रीय विद्यालय बीजापुर, स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल, शासकीय कन्या विद्यालय ज्ञानगुड़ी और पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय सहित कई स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम हुए. विद्यार्थियों को गाजर घास की पहचान और इससे होने वाले नुकसान की जानकारी देकर उन्हें परिवार और ग्रामीणों तक जागरूकता का संदेश पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया.

गाजर घास की समस्या का स्थायी समाधान केवल एक बार सफाई करने से नहीं होगा. समय पर पहचान, फूल आने से पहले सुरक्षित उन्मूलन और लगातार निगरानी इसके फैलाव को रोकने के सबसे जरूरी उपाय हैं.बीजापुर का यह अभियान किसानों और ग्रामीणों को खरपतवार से बचाव के साथ स्वस्थ पर्यावरण के प्रति जागरूक करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है.

 

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