कांदा एक्सप्रेस में ‘सड़ा प्याज’ या सरकारी खरीद का खेल? 450 टन की खेप पर किसानों ने उठाए सवाल

कांदा एक्सप्रेस में ‘सड़ा प्याज’ या सरकारी खरीद का खेल? 450 टन की खेप पर किसानों ने उठाए सवाल

नाशिक से दिल्ली जा रही कांदा एक्सप्रेस में सिर्फ 450 मीट्रिक टन प्याज भेजे जाने और उसकी गुणवत्ता पर किसानों ने सवाल उठाए हैं. किसानों का आरोप है कि ट्रेन में छोटा और खराब प्याज लोड किया गया है. उन्होंने पूछा कि किसानों से खरीदा गया 45-55 एमएम का प्याज कहां है. मामले को लेकर किसान ने ट्रेन रोकने की कोशिश भी की.

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कांदा एक्सप्रेस में ‘सड़ा प्याज’ या सरकारी खरीद का खेल? 450 टन की खेप पर किसानों ने उठाए सवालकांदा एक्सप्रेस में सड़ा प्याज होने का आरोप

किसानों और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए नाशिक से दिल्ली के आदर्श नगर के लिए भेजी जा रही कांदा एक्सप्रेस एक बार फिर सवालों के घेरे में है. आजतक की पड़ताल में ट्रेन पर लोड किए गए प्याज को लेकर किसानों ने गंभीर सवाल उठाए हैं. किसानों का दावा है कि ट्रेन में अच्छी क्वालिटी के बजाय छोटा, खराब और सड़ा हुआ प्याज भेजा जा रहा है. वहीं, उनका सवाल है कि सरकार और एजेंसियों की ओर से किसानों से खरीदा गया 45 से 55 एमएम का प्याज आखिर कहां है.

450 मीट्रिक टन प्याज लेकर दिल्ली जाएगी कांदा एक्सप्रेस

नाशिक से आदर्श नगर के लिए कांदा एक्सप्रेस दोपहर करीब 3 से 4 बजे के बीच रवाना होगी. करीब 24 घंटे के सफर के बाद यह ट्रेन दिल्ली के आदर्श नगर पहुंचेगी. पहले दावा किया गया था कि ट्रेन के जरिए 840 मीट्रिक टन प्याज दिल्ली भेजा जाएगा. हालांकि, दो दिन बाद भी ट्रेन में इतना प्याज लोड नहीं हो सका. अब सिर्फ 450 मीट्रिक टन प्याज दिल्ली भेजे जाने की बात सामने आई है. इसको लेकर किसानों का कहना है कि अगर सरकार के पास पर्याप्त मात्रा में प्याज का स्टॉक है, तो ट्रेन में तय मात्रा में प्याज क्यों नहीं भेजा जा रहा है.

लोडिंग के दौरान छोटे साइज के प्याज पर सवाल

ट्रेन में लोड किए गए प्याज का जायजा लेने पर बोरियों में 10 एमएम और 20 एमएम साइज का प्याज दिखाई दिया. किसानों का आरोप है कि इसमें कुछ प्याज खराब और सड़ा हुआ भी है. किसानों के मुताबिक, नाशिक में इस तरह के प्याज को खराब या थर्ड कैटेगरी का माना जाता है और इसे करीब 5 से 10 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेचा जाता है या खाद बनाने में इस्तेमाल किया जाता है. किसानों का आरोप है कि जिस प्याज को स्थानीय स्तर पर कम कीमत वाला या खराब माना जाता है, वही प्याज दिल्ली में 30 से 35 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेचा जा सकता है. इसी वजह से अब प्याज की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.

किसानों का सवाल- 45 से 55 एमएम वाला प्याज कहां गया?

किसानों का कहना है कि जब उनसे प्याज खरीदने की बात आती है तो कई तरह की शर्तें रखी जाती हैं. किसानों के मुताबिक, 45 से 55 एमएम साइज के प्याज को लेकर खरीद के लिए अलग-अलग मानक और शर्तें रखी गई थीं. अब किसान सवाल कर रहे हैं कि अगर NCCF और NAFED ने किसानों से इन मानकों के हिसाब से प्याज खरीदा है, तो वह प्याज कहां है? किसानों का कहना है कि कांदा एक्सप्रेस में भेजे जा रहे प्याज की क्वालिटी और किसानों से खरीदे गए प्याज के बीच अंतर साफ दिखाई दे रहा है.

किसान ने ट्रेन रोकने की कोशिश की

मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रहार किसान संगठन से जुड़े किसान गणेश निम्बालकर ने कांदा एक्सप्रेस को रोकने की कोशिश की. उन्होंने ट्रेन में लोड किए गए प्याज की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर यह अच्छी क्वालिटी का प्याज है तो इसे दिखाया जाए. किसान का आरोप है कि ट्रेन में लो क्वालिटी और खराब प्याज भरा गया है. उन्होंने इसे भ्रष्टाचार का मामला बताते हुए सवाल किया कि प्याज आखिर कहां से और किस किसान से खरीदा गया है. किसानों का कहना है कि अगर सरकार को प्याज की जरूरत है तो वे 30 रुपये प्रति किलो के भाव पर अच्छी क्वालिटी का प्याज देने के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार किसानों से वह प्याज खरीदने को तैयार नहीं है.

पर्याप्त स्टॉक नहीं होने का भी दावा

कांदा एक्सप्रेस में 840 मीट्रिक टन प्याज भेजे जाने की बात कही गई थी. लेकिन दो दिन बाद भी ट्रेन में इतनी मात्रा में प्याज लोड नहीं हो सका और अब करीब 450 मीट्रिक टन प्याज भेजा जा रहा है. इसे लेकर किसानों ने दावा किया कि NCCF और NAFED के पास पर्याप्त प्याज का स्टॉक नहीं है. हालांकि, स्टॉक और खरीद की स्थिति को लेकर संबंधित एजेंसियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण है. किसानों की मांग है कि प्याज की खरीद, स्टॉक और ट्रेन में भेजे जा रहे प्याज की गुणवत्ता को लेकर पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए.

डिमांड आने पर भेजी जाएगी अगली ट्रेन

वहीं, सेंट्रल वेयरहाउस के क्षेत्रीय प्रबंधक का कहना है कि आगे प्याज की ट्रेन डिमांड के आधार पर भेजी जाएगी. यानी दिल्ली से प्याज की मांग आने के बाद ही अगली खेप भेजने का फैसला किया जाएगा. फिलहाल कांदा एक्सप्रेस के जरिए भेजे जा रहे प्याज ने एक तरफ दिल्ली में उपभोक्ताओं तक सस्ती प्याज पहुंचाने की उम्मीद बढ़ाई है, तो दूसरी तरफ किसानों ने इसकी गुणवत्ता और सरकारी खरीद पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखना होगा कि ट्रेन में भेजे जा रहे प्याज की गुणवत्ता को लेकर किसानों के आरोपों पर NCCF और NAFED की ओर से क्या सफाई सामने आती है. (प्रवीण ठाकरे का इनपुट)

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