बिना केमिकल कीटों का सफाया संभवइस समय देशभर में किसान खरीफ सीजन की फसलों की बुवाई और नर्सरी तैयार करने की तैयारियों में जुटे हैं. दूसरी तरफ, मई और जून के महीने में सूरज की भीषण गर्मी पड़ रही है, जिससे तापमान काफी बढ़ जाता है. आम तौर पर लोग इस तपती धूप से परेशान होते हैं, लेकिन इस बढ़ती गर्मी का इस्तेमाल अपनी मिट्टी को सुधारने के लिए वरदान के रूप में कर सकते हैं. अक्सर खरीफ फसलों की नर्सरी को मिट्टी में पहले से मौजूद हानिकारक कीड़े, रोग और खरपतवार से भारी नुकसान होता है. इनसे निपटने के लिए ज्यादातर किसान महंगे और जहरीले रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं, जो मिट्टी की ताकत को कम करते हैं और हमारी सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं.
कृषि विज्ञान केन्द्र, नरकटियागंज पश्चिम चम्पारण, बिहार के हेड डॉ. आर. पी. सिंह बताते हैं कि इस समस्या से बचने के लिए मई-जून की तेज धूप का फायदा उठाकर 'मृदा सौरीकरण' (soil solarization) यानी सूरज की गर्मी से मिट्टी का उपचार करना सबसे बढ़िया और प्राकृतिक उपाय है.
डॉ. सिंह के अनुसार, मृदा सौरीकरण तकनीक तभी सबसे अच्छा काम करती है जब वातावरण में तेज धूप हो और तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए. इसलिए खरीफ की बुवाई से ठीक पहले, यानी मई और जून का यह महीना इस काम के लिए सबसे सही है.
इसे करने के लिए सबसे पहले खेत को साफ करके पुरानी फसल के बचे हुए अवशेषों को हटा दें. फिर मिट्टी को पलटकर समतल और भुरभुरा बना लें. इसके बाद खेत में हल्की सिंचाई कर दें. अब पूरी जमीन को 200 गेज की पारदर्शी प्लास्टिक शीट से अच्छी तरह ढक दें और उसके किनारों को मिट्टी से दबा दें, ताकि अंदर की हवा और भीषण गर्मी से बनी भाप बाहर न निकल सके. इसे करीब 4 से 6 सप्ताह के लिए ऐसे ही छोड़ दें. इससे प्लास्टिक के अंदर का तापमान और ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे मिट्टी में छिपे कीड़ों के अंडे, प्यूपा और खरपतवार के बीज पूरी तरह जलकर नष्ट हो जाते हैं.
मई-जून की इस भीषण गर्मी में की गई सौरीकरण की यह विधि रसायनों की तुलना में बहुत सस्ती और फायदेमंद है. खासकर खरीफ सीजन में फल, सब्जियों और धान की नर्सरी तैयार करने के लिए यह विधि एक वरदान की तरह काम करती है. बिना किसी हानिकारक कीटनाशक के किसान भाई बिल्कुल स्वस्थ और रोगमुक्त पौधे तैयार कर सकते हैं. जब तपती धूप के कारण मिट्टी के सारे रोग पहले ही खत्म हो जाएंगे, तो नर्सरी के पौधे तंदुरुस्त होंगे और आगे चलकर खरीफ फसल की पैदावार भी बंपर होगी. इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें दवाइयों पर होने वाला फालतू खर्च पूरी तरह बच जाता है.
सूरज की इस कड़क धूप का उपयोग सिर्फ मिट्टी सुधारने में ही नहीं, बल्कि खरीफ और आने वाले सीजन के बीजों के उपचार के लिए भी किया जा सकता है. इससे गेहूं, धान, जौ और चने में लगने वाले कई गंभीर रोग, जैसे—कंडुआ रोग, झुलसा रोग, जड़ सड़न और पत्ती रोग से फसलों को बचाया जा सकता है. इसके लिए मई-जून की इस भीषण गर्मी में बीजों को साफ फर्श पर अच्छी तरह फैलाकर सुखा लेना चाहिए. इसके बाद, अगले साल बुवाई करने से ठीक पहले बीजों को और सुरक्षित करने के लिए कार्बोक्सिन या थायरम दवा की 2 ग्राम मात्रा प्रति किलो बीज के हिसाब से मिलाकर बोना चाहिए.
भीषण गर्मी के मौसम में सौरीकरण अपनाने से किसानों को कई बड़े फायदे होते हैं. इससे जहरीले रसायनों से मुक्ति मिलती है और खरीफ सीजन के दौरान खेतों में बार-बार खरपतवार निकालने की मेहनत भी कम हो जाती है. सबसे अच्छी बात यह है कि इस तेज गर्मी से मिट्टी के मित्र जीवाणु नष्ट नहीं होते बल्कि उनकी संख्या बढ़ती है, जो पौधों के विकास और फसल की क्वालिटी में सुधार करते हैं. सौरीकरण से प्रदूषित मिट्टी भी दोबारा उपजाऊ और स्वस्थ हो जाती है, और मिट्टी में हुआ यह सुधार आगे के 2 वर्षों तक बरकरार रहता है. अगर किसान भाई मई-जून की इस धूप का सही इस्तेमाल करेंगे, तो कम लागत में अपनी फसलों से बहुत शानदार मुनाफा कमा सकते हैं.
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