
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीकों से जोड़कर खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का काम कर रही है. विदिशा जिले के कृषक भगवानसिंह ने इस योजना का लाभ लेकर अपनी खेती में उल्लेखनीय बदलाव किया है. आज वे क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं.
खेती में बढ़ती लागत और जल संकट की चुनौतियों को देखते हुए भगवानसिंह ने उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया.उद्यानिकी विभाग के अधिकारी शिवम अहिरवार ने उन्हें प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की जानकारी दी और आवेदन प्रक्रिया में सहयोग किया.आवेदन स्वीकृत होने के बाद उन्हें योजना का लाभ मिला और आधुनिक खेती की दिशा में उनका सफर शुरू हुआ.
योजना के तहत भगवानसिंह को 1.20 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित करने के लिए कुल 1 लाख 50 हजार 485 रुपये की लागत पर 82 हजार 766 रुपये 50 पैसे का अनुदान प्रदान किया गया. इस सहायता से उन्होंने अपने खेत में आधुनिक सिंचाई व्यवस्था स्थापित की और मिर्च व टमाटर की खेती शुरू की.
अनुदान मिलने के बाद भगवानसिंह ने अपने खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली के साथ मल्चिंग तकनीक का भी उपयोग किया. ड्रिप सिंचाई से फसलों की जड़ों तक आवश्यक मात्रा में पानी सीधे पहुंचने लगा, जिससे पानी की बचत हुई और सिंचाई लागत कम हुई. वहीं मल्चिंग तकनीक से खरपतवार नियंत्रण में मदद मिली और खेत की नमी लंबे समय तक बनी रही.
मल्चिंग के उपयोग से निराई-गुड़ाई में लगने वाला श्रम और खर्च कम हुआ.साथ ही कीट एवं रोग प्रबंधन भी अधिक प्रभावी और सुविधाजनक बन गया.इससे खेती की कुल लागत में कमी आई और उत्पादन क्षमता में सुधार हुआ.
आधुनिक तकनीकों का लाभ उठाते हुए भगवानसिंह ने लगभग 80 क्विंटल मिर्च और 120 क्विंटल टमाटर का उत्पादन प्राप्त किया.मिर्च का औसत विक्रय मूल्य 2 हजार रुपये प्रति क्विंटल और टमाटर का औसत विक्रय मूल्य 1 हजार 500 रुपये प्रति क्विंटल रहा.इससे मिर्च की फसल से लगभग 1 लाख 60 हजार रुपये तथा टमाटर से लगभग 1 लाख 80 हजार रुपये की आय हुई. दोनों फसलों से उन्हें कुल लगभग 3 लाख 40 हजार रुपये की सकल आय प्राप्त हुई.
ड्रिप सिंचाई प्रणाली ने जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव हुई और फसल को समय पर आवश्यक नमी मिलती रही. इससे उत्पादन बढ़ा और किसान की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई.
भगवानसिंह की सफलता से प्रेरित होकर आसपास के कई किसान भी ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और अन्य आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं.साथ ही वे शासन की विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी आगे आ रहे हैं.
भगवानसिंह की सफलता यह साबित करती है कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ लें, तो सीमित संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं.उनकी उपलब्धि खेती में नवाचार, जल संरक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण है.
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