किसान ने जुगाड़ से बाइक को मिनी ट्रैक्टर में बदलाएक तरफ खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल की बात हो रही है तो वहीं दूसरी ओर खेती में काम करने वाले मजदूरों की संख्या घट रही है. कृषि क्षेत्र में नया ज्ञान तो आ रहा है, लेकिन मजदूरों की कमी के कारण किसान परेशान हैं. बीड जिले के एक किसान ने मजदूरों की समस्या का समाधान कुछ हद तक खोज निकाला है. इस किसान ने कबाड़ की मोटरसाइकिल को जोड़कर एक मिनी ट्रैक्टर बनाया है, जो खेत में काम करता है. इस ट्रैक्टर की मदद से खेती में बुआई और छिड़काव जैसे काम आसानी से हो रहे हैं, इसलिए किसान की बाईक का जुगाड़ चर्चा में आ गया है.
दरअसल, बारामती कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा आयोजित कृषि प्रदर्शनी में बाइक के साथ बना मिनी ट्रैक्टर का डेमो किसानों का ध्यान अपनी और खींच रहा था. इस संबंध में जब यह जुगाड़ करने वाले बीड जिले के आप्पा साहेब बावकर से बात की तो उन्होंने बताया कि, खेती में तंत्रज्ञान तो बढ़ रहा है, लेकिन मजदूरों की कमी के कारण किसान परेशान हैं. मजदूरों की कमी के कारण दिक्कत हो रही है. बैल जोड़ी की मदद से हल चलाना, फसलों की बुवाई करना साथ ही फसलों पर छिड़काव करना ज्यादा समय वाला और खर्चीला भी होता है. इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए यह बाइक से मिनी ट्रैक्टर बनाया गया है. एक पुरानी स्प्लेंडर बाइक का पीछे का टायर खोलकर वहां हल और बुआई की सामग्री के लिए जुगाड़ किया गया है.
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बप्पा साहेब बावकर ने बाइक पर थोड़ा सा खर्च करके घर पर ही जुगाड़ से ट्रैक्टर बना लिया है. इस बाइक में पिछले टायर हटा दिए गए हैं और उसकी जगह खेत जोतने वाला हल लगाया दिया गया है. इसके साथ ही दो टायर जोड़कर बाइक को मिनी ट्रैक्टर का लुक दिया गया है. बाइक को ट्रैक्टर में बदलने के बाद ये किसान इससे अपने खेत जोत रहा है. जिस तरह ट्रैक्टर में धूप से बचने के लिए उसके उपर एक छतरी लगी होती है, ठीक वैसा ही बनाने के लिए किसान ने इस मिनी ट्रैक्टर पर एक शेड लगाया है.
स्प्लेंडर बाईक के इंजन में जुगाड़ करके रिव्हर्स गिअर का भी सिस्टम किया हुआ है. जिसके लिए इंजन के बाजू में एक बक्सा तैयार करके वहा क्लच प्लेट और रिव्हर्स गिअर रखा गया है. रिव्हर्स गिअर डालते ही ट्रॅक्टर पीछे की तरफ दौड़ने लगता है. इस मिनी ट्रैक्टर की खासियत यह है कि यह तीन पहिया होने के कारण कम जगह में मुड़ सकता है. इस जुगाड़ की मदद से एक लीटर पेट्रोल में एक एकड़ जमीन तक फसलों का कल्टीवेशन, छिड़काव और बुवाई की जा सकती है. इसलिए किसान के लिए यह बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है.
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