ड्रिप तकनीक से की गई सिंचाई पारंपरिक सिंचाई के मुकाबलें अधिक फायदेमंद है, फोटो साभार:freepikदेश में कृषि उपज को बढ़ाने और लागत को कम करने के अनेक प्रयास और प्रयोग किए जा रहे हैं. पारंपरिक खेती छोड़ आधुनिकता को महत्व दिया जा रहा है, जिसमें खेती करने के तौर तरीकों में काफी बदलाव देखे गए हैं, साथ ही उपज भी बढ़ी है. खेत की जुताई से लेकर फसलों के प्रबंधन तक हर काम मशीनों से किया जा रहा है, जिससे खेती को काफी आसान बना दिया है. आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल करने से किसान का समय और मेहनत के साथ- साथ प्राकृतिक रूप से भी फायदेमंद देखा गया है. आज हम बात करेंगे ड्रिप पद्धति से खेती की सिंचाई के बारे में जो कम खर्च में कई तरह के लाभ देती है. इस पद्धति से खेतों की सिंचाई करने के और भी कई लाभ हैं.
ड्रिप तकनीक से की जाने वाली सिंचाई के लाभ जानने से पहले ये जानते हैं कि ड्रिप सिंचाई है क्या. ड्रिप सिंचाई की बात करें तो यह खेतों की सिंचाई का एक खास तरीका है. इस तरीके से खेतों की सिंचाई करने पर जलभराव की जरूरत नहीं होती बल्कि बूंद-बूंद कर पानी पौधों की जड़ों तक पहुंचता है. इसमें जलाशय से पाइपलाइन को जोड़कर खेत में कई जगहों पर लगा दिया जाता है और फव्वारे के रूप में खेतों को आवश्यकता जितना पानी मिलता है. इस तरीके से खेतों की सिंचाई करने पर सरकार की ओर से सब्सिडी देने का भी प्लान है.
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ड्रिप तकनीक से की गई सिंचाई बिजली से चलने वाले ट्यूबेल और डीजल पंपों की तुलना में काफी कम है. इसके अलावा जलभराव कर सिंचाई करने की तुलना में इस तकनीक से सिंचाई करने पर लगभग 90 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है] जिससे कम पानी वाले क्षेत्र में भी सिंचाई को सहज बनाया है. इसके अलावा आप खराब गुणवत्ता और खारे पानी का उपयोग भी इस पद्धति से कर सकते हैं, जो कि बूंदों के रूप में पौधों की जड़ों पर पहुंचता है.साथ ही इस तकनीक की लागत भी बहुत अधिक नहीं है.
ट्यूबेल या डीजल पंप से की गई खेती की तुलना में ड्रिप सिंचाई को अधिक अच्छा माना गया है. दरअसल इस तरीके से खेती करने पर पानी का सीधा असर पौधों पर पड़ता है और पौधे जल से पूरा पोषक प्राप्त करते हैं. खेतों का जलभराव करने पर वहां अनावश्यक रूप से घास फूस या खरपतवारों के बढ़ने का खतरा अधिक रहता है, जबकि इस तरीके से की गई सिंचाई पर घास फूस उगने की संभावना कम रहती है.
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