अब खेत में नहीं जलेगा डीजल! बिहार के वैज्ञानिकों ने बनाई सूरज की रोशनी से चलने वाली वीडर मशीन

अब खेत में नहीं जलेगा डीजल! बिहार के वैज्ञानिकों ने बनाई सूरज की रोशनी से चलने वाली वीडर मशीन

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) सबौर के वैज्ञानिकों ने सौर ऊर्जा से चलने वाली पोर्टेबल वीडर मशीन विकसित की है. यह मशीन बिना डीजल-पेट्रोल के खरपतवार हटाएगी, खेती की लागत कम करेगी और छोटे किसानों को बड़ा फायदा पहुंचाएगी.

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अब खेत में नहीं जलेगा डीजल! बिहार के वैज्ञानिकों ने बनाई सूरज की रोशनी से चलने वाली वीडर मशीनसोलर से चलने वाली वीडर मशीन

खेती में सबसे बड़ी परेशानी आज बढ़ती मजदूरी और महंगा डीजल है. ऐसे समय में बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी मशीन विकसित की है, जो इन दोनों समस्याओं का समाधान है. खास बात यह है कि यह मशीन न पेट्रोल मांगती है और न ही डीजल. यह मशीन पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलती है. इसके नए इनोवेटिव डिजाइन को भारत सरकार की ओर से रजिस्ट्रेशन की मान्यता भी दे दी गई है.

छोटे किसानों की बल्ले बल्ले

बीएयू की ओर से विकसित पोर्टेबल सोलर-पावर्ड वीडर छोटे और मंझोले किसानों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसका इस्तेमाल खेतों में उगने वाले खरपतवार को हटाने के लिए किया जाएगा. वैज्ञानिकों के अनुसार मशीन 1 से 1.5 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से काम करती है और 200 से 500 मिमी कतार दूरी वाली फसलों में आसानी से खरपतवार साफ कर सकती है.

महिला और बुजुर्ग किसान भी चला सकेंगे

इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम परिचालन लागत है. डीजल की जरूरत नहीं होने से किसानों का खर्च घटेगा. साथ ही, मजदूरों पर निर्भरता भी कम होगी. हल्के वजन के कारण महिला किसान और बुजुर्ग किसान भी इसे आसानी से चला सकेंगे.

सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल 

कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है, जो सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचे. उनका कहना है कि यह मशीन खेती को सस्ती, आसान और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में मदद करेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक बड़े स्तर पर किसानों तक पहुंची तो डीजल आधारित कृषि उपकरणों पर निर्भरता कम होगी. इससे खेती का खर्च घटेगा, कार्बन उत्सर्जन कम होगा और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में भी मदद मिलेगी. बिहार में विकसित यह तकनीक आने वाले समय में छोटे किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है.

किसानों का भविष्य बेहतर बनाएगी मशीन

इस परियोजना में डॉ. मनीष कुमार, ई. अशोक कुमार, डॉ. सतीश कुमार, डॉ. सनोज कुमार और डॉ. अनिल कुमार सिंह की अहम भूमिका रही. कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य ऐसी तकनीक विकसित करना है, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिले. इधर, विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि बिहार को कृषि नवाचार के राष्ट्रीय मानचित्र पर और मजबूत करेगी. आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालय की ऐसी तकनीकें देशभर के किसानों तक पहुंचेंगी. जिसका लाभ भारत के किसानों को मिलेगा. ये नई तकनीक ईंधन की खपत को कम करेगी जिससे किसानों का दूरगामी लाभ होगा.

क्या मशीन पर कोई सब्सिडी मिलेगी?

फिलहाल इस नई BAU सबौर की सोलर-पावर्ड वीडर मशीन के लिए कोई अलग या विशेष सब्सिडी योजना सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं दिखती.  हालांकि, बिहार में कृषि यंत्रीकरण योजनाओं के तहत पावर वीडर और अन्य कृषि यंत्रों पर सब्सिडी उपलब्ध है. बिहार कृषि विभाग के OFMAS पोर्टल पर कृषि यंत्रों के लिए अनुदान योजनाएं संचालित की जा रही हैं.

इसके अलावा, बिहार सरकार पहले भी पावर वीडर की खरीद पर 40% से 50% तक अनुदान देती रही है, जिसमें सामान्य वर्ग और SC/ST/EBC किसानों के लिए अलग-अलग सहायता प्रावधान रहे हैं.

किसानों को क्या करना चाहिए?

OFMAS पोर्टल (farmech.bihar.gov.in) पर नई कृषि यंत्र सब्सिडी सूची देखें. BAU सबौर या जिला कृषि पदाधिकारी (DAO) कार्यालय से संपर्क करके पूछें कि यह नई सोलर वीडर मशीन अभी बाजार में उपलब्ध है या नहीं. यदि मशीन को राज्य की अनुमोदित कृषि यंत्र सूची में शामिल किया जाता है, तो भविष्य में उस पर भी अनुदान मिलने की संभावना हो सकती है. अभी इस नई सोलर वीडर पर विशेष सब्सिडी की पुष्टि नहीं है, लेकिन बिहार की कृषि यंत्रीकरण योजनाओं के तहत समान प्रकार के वीडर/कृषि यंत्रों पर अनुदान उपलब्ध है.

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