केंद्र सरकार ने DILRMP 3.0 की शुरुआत की हैकेंद्र सरकार ने जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) 3.0 की ऑपरेशनल गाइडलाइंस जारी कीं. इस योजना के लिए वर्ष 2026-31 के दौरान 565.5 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
सरकार का कहना है कि अब सिर्फ जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने तक सीमित रहने के बजाय एक ऐसा सिस्टम तैयार किया जाएगा, जिसमें जमीन से जुड़ी सभी जानकारियां एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी. इसमें जमीन के दस्तावेज, नक्शे, रजिस्ट्री, मालिकाना हक और अन्य संबंधित रिकॉर्ड को GIS आधारित डिजिटल फ्रेमवर्क से जोड़ा जाएगा.
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जमीन केवल मिट्टी का टुकड़ा नहीं है, बल्कि किसानों का सम्मान, पूर्वजों की विरासत और आने वाली पीढ़ियों की पहचान है. उन्होंने कहा कि DILRMP 3.0 भूमि प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और तकनीक आधारित बनाएगा.
नई व्यवस्था के तहत देश के प्रत्येक भूमि खंड को 14 अंकों का भू-आधार (Bhu-Aadhaar) या यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) दिया जाएगा. इससे हर जमीन की अलग डिजिटल पहचान बनेगी. जमीन के नक्शों की पूरी जियो-रेफरेंसिंग की जाएगी, जिससे रिकॉर्ड और नक्शों में किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना कम होगी.
DILRMP 3.0 के तहत प्रत्येक राज्य अपना लैंड स्टैक तैयार करेगा. इसके जरिए जमीन से जुड़े सभी डिजिटल डेटाबेस और सिस्टम को API के माध्यम से जोड़ा जाएगा. बाद में इन्हें मिलाकर राष्ट्रीय स्तर पर एक फेडरेटेड नेशनल लैंड स्टैक बनाया जाएगा. खास बात यह है कि जमीन संबंधी डेटा का नियंत्रण संबंधित राज्यों और विभागों के पास ही रहेगा.
सरकार का दावा है कि इस योजना से किसानों को कई लाभ मिलेंगे. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जमीन के रिकॉर्ड स्पष्ट और ऑनलाइन उपलब्ध होने से किसानों को बैंकों से कृषि लोन लेने में आसानी होगी. इसके साथ ही दाखिल-खारिज, रजिस्ट्री और अन्य भूमि संबंधी कार्यों के लिए सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत भी कम होगी.
योजना के तहत देश के 75 प्रमुख सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर "रजिस्ट्रेशन सेवा केंद्र" के रूप में विकसित किया जाएगा. इन केंद्रों का मॉडल पासपोर्ट सेवा केंद्रों की तर्ज पर होगा, जहां लोगों को तेज और सुविधाजनक सेवाएं मिल सकेंगी.
सरकार पुराने भूमि दस्तावेजों को सुरक्षित रखने पर भी जोर दे रही है. इसके लिए पुराने रिकॉर्ड की स्कैनिंग की जाएगी, डिजिटल रजिस्ट्रेशन रिपॉजिटरी बनाई जाएगी और राजस्व अदालतों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण किया जाएगा. इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में जमीन और संपत्ति के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने के लिए NAKSHA पहल के तहत प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जाएंगे.
सरकार के अनुसार DILRMP के पिछले चरणों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है. अब तक देश में 99.9 प्रतिशत रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (RoR) का डिजिटलीकरण किया जा चुका है. वहीं 97 प्रतिशत भू-नक्शों का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है. इसके अलावा 99 प्रतिशत सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों का कंप्यूटरीकरण किया जा चुका है.
यह योजना देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की जाएगी. इसके लिए 100 प्रतिशत फंडिंग केंद्र सरकार की ओर से दी जाएगी. राज्यों को चरणबद्ध तरीके से प्रदर्शन के आधार पर धनराशि जारी की जाएगी. योजना की निगरानी रियल टाइम DILRMP-MIS डैशबोर्ड के माध्यम से की जाएगी.
भूमि विवाद, रिकॉर्ड में गड़बड़ी और रजिस्ट्री प्रक्रियाओं में देरी लंबे समय से किसानों और ग्रामीण परिवारों के सामने बड़ी समस्या रही हैं. DILRMP 3.0 के लागू होने के बाद जमीन से जुड़े रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी, सटीक और आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे. इससे किसानों को लोन, सरकारी योजनाओं और संपत्ति संबंधी सेवाओं तक आसान पहुंच मिलने की उम्मीद है.(इनपुट/PTI)
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