स्मार्ट सिंचाई से AI आधारित तकनीक तक, बदलेगी पूर्वी भारत की कृषि की तस्वीर

स्मार्ट सिंचाई से AI आधारित तकनीक तक, बदलेगी पूर्वी भारत की कृषि की तस्वीर

पूर्वी भारत की खेती को आधुनिक और जलवायु के अनुकूल बनाने के लिए ICAR के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना ने नई अनुसंधान प्राथमिकताएं तय की हैं. स्मार्ट सिंचाई से लेकर ड्रोन, AI और मशीन लर्निंग आधारित खेती तक पर काम किया जाएगा.

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स्मार्ट सिंचाई से AI आधारित तकनीक तक, बदलेगी पूर्वी भारत की कृषि की तस्वीरस्मार्ट सिंचाई से AI आधारित तकनीक

खेती और पशुपालन के क्षेत्र में हो रहे नए-नए बदलाव और जलवायु परिवर्तन की वजह से खेती में कई तरह की चुनौतियां आ रही हैं. जिसको लेकर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना की ओर से पूर्वी भारत की कृषि और किसानों की जरूरत को लेकर अनुसंधान की नई प्राथमिकताएं तय की गई हैं. जिसमें आने वाले वर्षों में स्मार्ट सिंचाई, ड्रोन आधारित परिशुद्ध कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सहित पशुपालन के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करेगी. तीन दिवसीय संस्थान अनुसंधान परिषद (IRC) की आयोजित बैठक के दौरान इन विषयों को लेकर चर्चा की गई. जहां, संस्थान और इसके अधीनस्थ केंद्रों के वैज्ञानिकों ने विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और नई परियोजनाओं को मंजूरी दी.

AI आधारित कृषि पर जोर

5 से 7 अगस्त के बीच ICAR के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में अनुसंधान परिषद की बैठक हुई. इसमें 85 अनुसंधान परियोजनाओं की समीक्षा की गई. वैज्ञानिकों ने संरक्षण कृषि, प्राकृतिक खेती, धान परती क्षेत्रों का हरितीकरण, जलवायु-अनुकूल खेती, जल उत्पादकता, हरित ऊर्जा, फसल विविधीकरण और फसल-पशुधन सुधार जैसे विषयों पर चर्चा की. बैठक में भविष्य की नई परियोजनाओं पर भी सहमति बनी. इनमें स्मार्ट सिंचाई, ड्रोन आधारित खेती, AI और मशीन लर्निंग से कृषि और पशुधन प्रबंधन, देशी पशु नस्लों का संरक्षण, बकरी प्रजनन, पशुधन से मीथेन उत्सर्जन कम करना, रोग निदान और बायोफ्लॉक मछली पालन जैसे क्षेत्र शामिल हैं. इन शोधों का उद्देश्य खेती को आधुनिक, कम लागत वाली और जलवायु के अनुकूल बनाना है.

किसान की सेवा ही अनुसंधान का अंतिम उद्देश्य

ICAR के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास ने कहा कि अनुसंधान का पहला और अंतिम उद्देश्य किसानों की सेवा करना और उनकी खेती में आ रही दिक्कतों का समाधान उपलब्ध कराना है. आगे उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि जलवायु-स्मार्ट कृषि, समेकित प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण, सौर ऊर्जा के उपयोग, उन्नत किस्मों के विकास, कटाई उपरांत प्रबंधन और मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. वहीं, उन्होंने वैज्ञानिकों से वन टीम वन टास्क के तहत कार्य करने का अपील किया.

वैज्ञानिकों ने दिए अपने सुझाव

संस्थान अनुसंधान परिषद की बैठक में शामिल हुए अलग-अलग राज्यों के वैज्ञानिकों ने कृषि क्षेत्र में कार्य को लेकर अलग-अलग सुझाव दिए. जिसमें केंद्रीय अंतर्देशीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, कोलकाता के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अरुण पंडित ने समेकित कृषि प्रणाली और जल संसाधन प्रबंधन के माध्यम से छोटे किसानों के लिए उपयोगी तकनीक विकसित करने पर जोर दिया. वहीं, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान केंद्र, कोलकाता के प्रभारी डॉ. अर्नब सेन ने ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण के साथ आधुनिक आणविक, डिजिटल और परिशुद्ध कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई. जबकि बामेती, पटना के निदेशक डॉ. पी.के. मिश्रा ने अनुसंधान और विस्तार के बीच बेहतर समन्वय और डिजिटल माध्यम से किसानों तक तकनीक पहुंचाने पर बल दिया.

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