खेती को आसान और तेज बना रहे एग्री ड्रोन, 5 साल में 80 फीसदी कृषि क्षेत्र कवर करेंगे 

खेती को आसान और तेज बना रहे एग्री ड्रोन, 5 साल में 80 फीसदी कृषि क्षेत्र कवर करेंगे 

ड्रोन टेक्नोलॉजी खेती के तरीके को तेजी से बदल रही है. अक्षय खोब्रागड़े ने कहा कि आने वाले समय में ड्रोन हर किसान के घर पहुंचने वाला है. इन्हें अपनाने में मौजूदा दिक्कत इनकी अधिक कीमत है, जिसे दूर करने के लिए ड्रोन कंपनियों ने DASS मॉडल समेत अन्य उपायों को अपनाना शुरू कर दिया है.

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खेती को आसान और तेज बना रहे एग्री ड्रोन, 5 साल में 80 फीसदी कृषि क्षेत्र कवर करेंगे ड्रोन टेक्नोलॉजी खेती के तरीके को तेजी से बदल रही है.

खेती में तेजी से तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है. एक समय पर ट्रैक्टर ने खेती गतिविधियों को बदलकर रख दिया और अपनी जगह मुख्य उपकरण के रूप में बना ली. इसी तरह अब ड्रोन के बारे में राय दी जा रही है. इंडस्ट्री के एक्सपर्ट ने कहा है कि अगले 5 साल में एग्री ड्रोन 80 फीसदी एरिया को कवर कर रहे होंगे. जबकि, एग्री ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए इसका कारोबार बढ़कर 5300 करोड़ रुपये के पार पहुंचने की पूरी संभावनाएं हैं. 

ड्रोन टेक्नोलॉजी खेती के तरीके को तेजी से बदल रही है. इनका इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है. इन्हें अपनाने में मौजूदा दिक्कत इनकी अधिक कीमत है, जिसे मैनेज करने के लिए ड्रोन कंपनियों ने DASS यानी ड्रोन एज अ सर्विस मॉडल को अपनाना शुरू कर दिया है. इससे जरूरत के समय किसान ड्रोन का इस्तेमाल कर पाएगा और निर्धारित फीस भुगतान कर देगा. मौजूदा समय में इसे सबसे कारगर बताया जा रहा है. 

5300 करोड़ रुपये होगा एग्री ड्रोन कारोबार 

ड्रोन मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के प्रमुख प्लेयर्स में शामिल गरुड़ एयरोस्पेस के संस्थापक और सीईओ अग्नीश्वर जयप्रकाश ने कहा कि ड्रोन खेती को बदल रहे हैं. ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों के बाद ड्रोन अब भारत में खेती के तरीके को बदल रहे हैं, जो आज किसानों के सामने आने वाली कई चुनौतियों का समाधान पेश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में तैनात लगभग 7,000 ड्रोन के साथ भारतीय कृषि ड्रोन बाजार 28 फीसदी की गति से बढ़ने की संभावना है. एग्री ड्रोन मार्केट की मौजूदा वैल्यू 1400 करोड़ रुपये है, जो 2030 तक 5300 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है. 

ड्रोन के कई फायदों से बढ़ रहा इस्तेमाल 

सीईओ अग्नीश्वर जयप्रकाश ने कहा कि इस बढ़ोत्तरी में बड़े फैक्टर के रूप में कीटनाशकों और उर्वरकों का छिड़काव रहा है. इसके इस्तेमाल से मजदूरी लागत में कमी, सब्सिडी, लोन और ट्रेनिंग प्रोग्राम के जरिए ड्रोन को अपनाने को बढ़ावा देने में सरकारी सपोर्ट के चलते इसका खेती में इस्तेमाल बढ़ने की संभावनाएं हैं. भारती एग्री ड्रोन बाजार विस्फोटक गति से बड़ने को तैयार है. ड्रोन भारतीय किसानों के लिए एक जरूरी उपकरण बनने के लिए तैयार हैं, जो भविष्य में अधिक कुशल, टिकाऊ और लाभदायक साबित होने वाले हैं. 

गरुड़ एग्री ड्रोन की मार्केट में 30 फीसदी हिस्सेदारी 

उन्होंने कहा कि 2500 ड्रोन की बिक्री और 6 DGCA मंजूरी के साथ गरुड़ एयरोस्पेस खेती में ड्रोन इस्तेमाल में देश का लीडर है. हमने अपने ड्रोन एज ए सर्विस (DAAS) मॉडल के साथ भौतिक ड्रोन में 25-30 फीसदी और ड्रोन सेवाओं में 45-50 फीसदी की पर्याप्त बाजार हिस्सेदारी हासिल की है. स्वदेशीकरण, किफायती ड्रोन समाधान, सरकारी सब्सिडी हासिल करने और लॉकहीड मार्टिन और थेल्स जैसी वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी पर हमारा ध्यान फायदेमंद रहा है. हम भारत और उसके बाहर ड्रोन टेक्नोलॉजी के भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. 

खेती में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़कर 80 फीसदी होगा 

एक्सपर्ट ने कहा कि ऐसा माना जा रहा है कि अगले 5-7 वर्षों में भारतीय कृषि में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़कर 80 फीसदी तक पहुंच जाएगा. खेती में ड्रोन का इस्तेमाल वर्तमान में 2 फीसदी से भी कम हो रहा है. ड्रोन टेक्नोलॉजी को मिल रहे समर्थन के चलते देश का 80 फीसदी कृषि एरिया अगले 5 साल में ड्रोन के जरिए कवर किया जाएगा. 

अगले 5 साल में घर-घर पहुंच जाएगा ड्रोन 

एग्री ड्रोन कंपनी सलाम किसान के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) अक्षय खोब्रागड़े ने कहा कि आने वाले समय में ड्रोन हर किसान के घर पहुंचने वाला है. उन्होंने कहा कि 2030 तक भारत में 10 लाख कृषि ड्रोन संचालन की उम्मीद है. अभी इसकी कीमत को लेकर पेंच फंस रहा है, जिसे कम करने की कोशिशों के क्रम में DAAS और रेंटल प्रक्रियाएं अपनाई जा रही हैं.  उन्होंने कहा कि एग्री ड्रोन का वैश्विक बाजार 30 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2030 तक 166 बिलियन डॉलर तक पहुंचेगा.

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